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दुर्ग - तीर्थ स्थलों का शहर

छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण शहर दुर्ग एक प्रमुख औद्योगिक और कृषि केन्द्र के लिए जाना जाता है। यह शहर शेवनाथ नदी के पूर्वी किनारे पर बसा हुआ है। शेवनाथ नदी को शिव नदी के नाम से भी जाना जाता है। दुर्ग छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा शहर है। शहर की जनसंख्या भी काफी है और यहां खनिज संपदा की कमी नहीं है। यह जिला ऊपरी शेवनाथ-महानदी घाटी के दक्षिण में स्थित है।

दुर्ग तस्वीरें, देओबलोद  - देओबलोद  मंदिर का दृश्य
Image source: en.wikipedia.org
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दुर्ग को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है- छत्तीसगढ़ का मैदानी भाग और दक्षिण का पठार। शेवनाथ दुर्ग जिले की प्रमुख नदी और महानदी की प्रमुख सहायक नदी है। शेवनाथ नदी की कुल लंबाई 345 किमी है और टंडुला नदी इसकी सहायक नदी है। दुर्ग में खरखरा नाम की एक और नदी है।

इतिहास से पता चलता है कि पहले दुर्ग ‘दक्षिण’ या ‘कौशल’ साम्राज्य का हिस्सा था। साथ ही यहां अशोक के शासन और उसके बाद मराठा व अंग्रेजों के शासन के भी प्रमाण मिलते हैं। बाद में 1906 में दुर्ग को एक अलग जिला बना दिया गया। 2001 की जनगणना के अनुसार दुर्ग की जनसंख्या 2,31,182 थी।

संस्कृति

दुर्ग की सांस्कृति विरासत काफी समृद्ध है। यहां 35 से ज्यादा तरह की जनजातियां रहती है, जिससे परंपरागत नृत्य, संगीत और नाटक में काफी विविधता देखी जाती है। पंडवानी दुर्ग का एक चर्चित नृत्य है। यह एक लोक संगीत विधा है, जिसके जरिए महाभारत के पांडव की कहानी को बताया जाता है। इस विधा में एक गायक होता है, जो जरूरत पड़ने पर नृत्य भी करता है। रौत नचा एक और परंपरागत नृत्य है, जिन्हें मुख्य रूप से यादवों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। वास्तव में यह नृत्य भगवान राम की अराधना करने का एक रूप है।

दुर्ग और आसपास के पर्यटन स्थल

दुर्ग में घूमने लायक कई जगहें हैं। श्री उवासग्गहरम पार्श्व तीर्थ, चंडी मंदिर, गंगा मय्या मंदिर, देवबलोड़ और नगपुरा का जैन मंदिर यहां के कुछ चुनिंदा तीर्थ स्थल हैं। इसके अलावा अगर आप दुर्ग जा रहे हैं तो हिंदी भवन, पाटन, प्रचीन किला, बलोड़, टंडुला और मैत्रीबाग (जू) घूमना भी न भूलें।

दुर्ग का मौसम

दुर्ग की जलवायु उष्णकटिबंधीय है। यहां भीषण गर्मी पड़ती है और मुसलाधार वर्षा भी होती है। गर्मी का मौसम आमतौर पर मार्च से शुरू होता है और मई तक रहता है। वहीं बरसात का मौसम जून से सितंबर तक रहता है। यहां करीब 1052 मिमी वार्षिक वर्षा होती है। जुलाई के महीने में दुर्ग में सबसे ज्यादा बरसात होती है।

कैसे पहुंचें

अच्छी यातायात व्यवस्था होने के कारण दुर्ग आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां हवाई, रेल और सड़क मार्ग के जरिए पहुंचा जा सकता है।

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