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गुजरात- यहां है अतुल्‍य भारत की असली सुगंध

भारत के पश्चिम में बसा राज्य गुजरात अपनी स्थलाकृतिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। जैसे की यह राज्य सिंधु घाटी सभ्यता का उद्गमस्थल भी है गुजरात हमेशा भारत के इतिहास में सांस्कृतिक और व्यापार का केंद्र माना जाता रहा है। गुजरात पश्चिमी भारत में स्थित एक राज्य है। इसकी उत्तरी-पश्चिमी सीमा जो अन्तर्राष्ट्रीय सीमा भी है, पाकिस्तान से लगी है। राजस्थान और मध्य प्रदेश इसके क्रमशः उत्तर एवँ उत्तर-पूर्व में स्थित राज्य हैं।

गुजरात
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महाराष्ट्र इसके दक्षिण में है। अरब सागर इसकी पश्चिमी-दक्षिणी सीमा बनाता है। इसकी दक्षिणी सीमा पर दादरा एवँ नगर-हवेली हैं। इस राज्य की राजधानी गांधीनगर है। गांधीनगर, राज्य के प्रमुख व्यवसायिक केन्द्र अहमदाबाद के समीप स्थित है। गुजरात का क्षेत्रफल 1,96,077 किलोमीटर है। गुजरात, भारत का अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। कच्छ, सौराष्ट्र और गुजरात उसके प्रादेशिक सांस्कृतिक अंग हैं। इनकी लोक संस्कृति और साहित्य का अनुबन्ध राजस्थान, सिंध और पंजाब, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के साथ है।

विशाल सागर तट वाले इस राज्य में इतिहास युग के आरम्भ होने से पूर्व ही अनेक विदेशी जातियाँ थल और समुद्र मार्ग से आकर स्थायी रूप से बसी हुई हैं। इसके उपरांत गुजरात में अट्ठाइस आदिवासी जातियां हैं। जन-समाज के ऐसे वैविध्य के कारण इस प्रदेश को भाँति-भाँति की लोक संस्कृतियों का लाभ मिला है। ये राज्य हमारे राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी का भी जन्म स्थल है।

अगर इस राज्य की भौगोलिक विविधता के बारे में बात करें तो कच्छ में नमक का दलदल , समुद्र तट और सापूतारा और गिरनार की पहाड़ियां सबसे पहले जुबां पर आते है। इतनी विशेषता से भरा यह राज्य यहाँ आने वाले पर्यटकों को पर्यटन का पूरा पैकेज उपलब्ध कराता है। गुजरात को दो क्षेत्रों में बटा गया है, राज्य के उत्तर में बसा है कच्छ और दक्षिण पश्चिम में है काठियावाड़।

काठियावाड़ को सौराष्ट्र के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें ब्रिटिश काल के दौरान 217 रियासतें शामिल की गयी थी।पुराने समय की वास्तुकला आज भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इसके अलावा , अगर गुजरात की जीवंत संस्कृति के बारे में बात करें तो रास और गरबा जैसे लोकप्रिय समारोह को भूलना गलत होगा।

गुजरात में पर्यटन

गुजरात में कुल 26 जिलों है, जो किसी बाकी राज्य की तरह इष्टतम विविधता प्रस्तुत करते हैं। अरब सागर और सहयाद्रि रेंज की पहाड़ियां और स्वच्छ और प्राचीन समुद्र तट, अरावली रेंज, सतपुड़ा रेंज और सह्याद्री रंजे कच्छ के रण का अनूठा स्थलाकृतिक है, यहाँ आये पर्यटकों को शायद ही किसी अन्य जगह ऐसा नज़ारा देखने को मिलेगा। तीथल काले रेत का समुद्र तट, मांडवी बीच , चोरवाड़ समुद्र तट , अहमदपुर-मांडवी बीच , सोमनाथ बीच, पोरबंदर तट, द्वारका बीच, गुजरात के समुद्र तटों की फेहरिस्त बड़ी लम्बी है और वैसे ही तीर्थस्थलों की भी। द्वारका और सोमनाथ जैसी जगह हमारे भारतीय पौराणिक कथाओं और धर्म का अभिन्न हिस्सा हैं, कुछ वैसे ही है अंबाजी मंदिर और गिरनार की पहाड़ियों पर बने हिंदू और जैन मंदिर।

गुजरात के राष्ट्रीय उद्यानों और वन्य जीव अभयारण्यों में 40 से अधिक जानवरों की प्रजातियों को संरक्षण देते है जैसे की दुर्लभ एशियाई शेर, जंगली गधा और कृष्णमृग। गिर राष्ट्रीय उद्यान, वंस्दा नेशनल पार्क , वेरावादर कृष्णमृग राष्ट्रीय उद्यान , नारायण सरोवर वन्य जीव अभयारण्य , थोल झील पक्षी अभ्यारण्य , कच्छ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य राज्य के वन्य जीवों की रक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से कुछ हैं।

गुजरात न केवल जानवरों के संरक्षण में आगे है बल्कि ये भारत का आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से धनी राज्य भी है, गुजरात पारंपरिक हस्तशिल्प का केंद्र भी है जो दुनिया भर के पर्यटकों द्वारा सराहा जाता रहा है। यहां के लोगों का पारंपरिक पहनावा भी बड़ा ही ख़ास है। पगड़ी, प्लेटेड जैकेट लंबी आस्तीन का कुर्ता , पतलून, बैगी बॉटम के साथ चूड़ीदार यहाँ के पुरुषों के पारंपरिक पहनावे हैं,  जाहिर सी बात है जब पहनावा इतना रंग बिरंगा होगा तो लाजमी है कि पर्यटक इस राज्य की ओर आकर्षित हों।

रंग बिरंगा घाघरा और चोली, जटिल कढ़ाई के साथ दर्पण कांच आपके संग्रह योग्य हैं।  अगर आप गुजरात में हैं तो पाटन की पटोला साड़ियों को घर ले जाना न भूलें ये आपकी अलमारी में बिलकुल अलग और ख़ास लगेंगी।

जलवायु

गुजरात के मुख्य मौसम गर्मी, बरसात और सर्दियाँ हैं।यहाँ बरसात के मौसम में भारी बारिश होती है समुद्र से निकटता होने के कारण ये राज्य गर्मियाँ में बहुत  ज़्यादा गर्म रहता है इसलिए इस राज्य कि  यात्रा के लिए सबसे अनुकूल मौसम सर्दियों का हैं।

भाषाएँ

गुजरात की प्रमुख मुख्य गुजराती है इसके अलावा यहां पारसी, गम्थी, काठियावाड़ी, सिंधी और कच्छी भाषा का व्यापक रूप से  इस्तेमाल किया जाता है । गुजरात एक बिजनस हब के तौर पर विकसित हो रहा है तो औद्योगीकरण की वजह से भारत के विभिन्न राज्यों से बहुत सारे प्रवासी यहाँ आकर के बस गये है जिसके कारण गुजरात में सामानय रूप से हिन्दी और अंग्रेजी भाषा प्रयोग ज्यादा होता है और लोग इन दो भाषाओँ को आसानी से समझ और बोल सकते हैं।

गुजरात का हर कोना अपने आप में अनूठा है अपने आप में अलग है जिसके पास आपको देने के लिए बहुत कुछ है । वर्तमान गुजरात  सरकार भी अपनी तरफ से अथक प्रयास कर रही है कि राज्य के पर्यटन को बढ़ावा मिले और देश के अलवा विदेश से भी भारत घूमने आने वाले पर्यटक प्रदेश की विविधताओं के बारे में जानें। गुजरात टूरिज्म को जनता के बीच अधिक से अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए यहां कि सरकार द्वारा तरह तरह के अभियान चलाये जा रहे हैं। अंत में हम यही कहेंगे कि एक बार गुजरात अवश्य पधारिये।