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कोरबा – सांस्कृतिक विरासत का स्थान

छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी कोरबा हरे-भरे जंगलों से भरा है और अहिरन तथा हसदेव नाम की दो नदियों के संगम पर स्थित है। यह 252 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ पर कई विद्युत उत्पादन ईकाइयाँ स्थित हैं जो छत्तीसगढ़ के लिये आवश्यक विद्युत ऊर्जा की स्रोत हैं। कोरबा की कोयला की खानें भी क्षेत्र में स्थित हैं। यहाँ के लोगों की स्थानीय भाषा छत्तीसगढ़ी है।

यहाँ की जनसंख्या का ज्यादातर भाग जनजातीय लोगों का है और आदिवासी, गोंड, कवर, बिंजवर, सतनामी, राज गोंड क्षेत्र में पाये जाने वाले कुछ जनजातीय समूह हैं। भारत के प्रमुख पर्वों के अलावा क्षेत्र में पोला, हरेली, कर्मा, देव उठनी आदि स्थानीय जनजातीय पर्व भी मनाये जाते हैं। पोला पर्व बैलों की पूजा के साथ मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान बैलों की दौड़ का आयोजन किया जाता है। हरेली सावन के महीने में किसानों द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। किसान अपने कृषि सम्बन्धी औजारों की पूजा करते हैं।

यह क्षेत्र सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता के मामले में धनी है। यह क्षेत्र उत्तम किस्म के रेशम कोसा के उत्पादन के लिये भी लोकप्रिय है जिसका उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले कपड़ों के निर्माण में किया जाता है जिनसे फिर वस्त्र और पर्दे बनाये जाते हैं। कोसा साड़ियाँ विश्व प्रसिद्ध हैं। कोसा साड़ियों को हाट या स्थानीय बाजारों में बेंचा जाता है।

कोरबा और इसके आसपास के पर्यटक स्थल

कोरबा और इसके आसपास के क्षेत्र के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में माडवा रानी, कनकी, कोसागईगढ़, केन्डई झरने और चित्तौड़गढ़ का किला शामिल हैं। यहाँ के मन्दिर और किले देखने लायक हैं। इसके अलावा यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता भी कई पर्यटकों को आकर्षित करती है। सुन्दर केन्डई झरना भी पर्यटकों के लिये लुभावना दृश्य प्रस्तुत करता है। चित्तौड़गढ़ का किला क्षेत्र का प्रसिद्ध किला है और नव रात्रि के दौरान यहाँ भारी संख्या में पर्यटक आते हैं।

कोरबा का मौसम

कोरबा का मौसम शुष्क रहता है और गर्म तापमान क्षेत्र के अन्तर्गत आता है।

कोरबा तक कैसे पहुँचें

कोरबा रेल, वायु तथा सड़क मार्गों से अच्छी तरह से जुड़ा है।

 

 

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