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मुक्तेश्वर - प्रकृति को निहारना

उत्तराखंड के कुमाऊं प्रभाग के नैनीताल जिले में स्थित मुक्तेश्वर सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। यह समुद्र सतह से 2286 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस स्थान का नाम हिंदू भगवान शिव को समर्पित 350 वर्ष पुराने मंदिर के नाम पर पड़ा है जो मुक्तेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। ऐसा विश्वास है कि भगवान शिव भक्तों “मोक्ष” प्रदान करते हैं।

मुक्तेश्वर तस्वीरें
commons.wikimedia.org
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वर्ष 1893 में ब्रिटिश लोगों ने इस हिल स्टेशन को एक अनुसंधान और शिक्षण संस्थान में परिवर्तित कर दिया गया। इस स्थान से पर्यटक नंदा देवी का साँस रोक देने वाला दृश्य देख सकते हैं जो भारत की दूसरी सर्वोच्च चोटी है। प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी और प्रकृतिवादी जिम कॉर्बेट द्वारा लिखित आकर्षक उपन्यास “मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं” ने मुक्तेश्वर को बहुत लोकप्रिय बनाया है। प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी ने कुमाऊं के छह खतरनाक बाघों को मारा जिसमें चंपावत बाघ और पानर चीता शामिल हैं जो इस क्षेत्र के सैंकडों निवासियों को मारने के लिए उत्तरदायी थे।

क्या है मुक्तेश्वर के आस पास 

मुक्तेश्वर के जंगल रेसस बंदरों, लंगूर, जब्बार, हिरण, दुर्लभ पर्वतीय पक्षियों, पर्वतीय चीते और हिमालयी काले भालुओं का घर है। इस स्थान की यात्रा करने वाले पर्यटक विभिन्न प्रकार के पक्षियों जैसे हिमालयी रूबीथ्रोट, सफ़ेद कलगी वाली हँसने वाली चिड़िया, लाल चोंच वाला लियोथ्रिक्स और काले पंखों वाला पतंगा देख सकते हैं। इसके अलावा वे दुर्लभ हिमालयी पर्वतीय बटेर भी देख सकते हैं।

इस क्षेत्र की ऊँची पर्वत श्रेणियों में पर्यटक लोकप्रिय साहसिक खेलों जैसे रॉक क्लाइम्बिंग और रेपलिंग का आनंद भी उठा सकते हैं। प्राचीन मुक्तेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहाँ सफ़ेद संगमरमर से बना एक शिवलिंग है जो विभिन्न हिंदू देवताओं जैसे ब्रह्मा, विष्णु, पार्वती, हनुमान, गणेश और नंदी की मूर्तियों से घिरा हुआ है। पत्थर की सीढ़ियों द्वारा इस मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।

सीतला एक सुंदर हिल स्टेशन है जो 7000 फुट की ऊँचाई पर स्थित है जो मुक्तेश्वर के पास स्थित एक आकर्षक पर्यटन स्थल है। यह हिल स्टेशन 39 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और विशाल हिमालय का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। यह हिल स्टेशन ओक और देवदार के सदाबहार जंगलों से ढंका हुआ है।

मुक्तेश्वर मंदिर के पास स्थित चौथी जाली या चौली की जाली अपनी किवदंतियों के लिए प्रसिद्द है। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ देवी और राक्षस के बीच एक युद्ध हुआ था। एक ढाल, हाथी की सूंड और तलवार की एक हल्की रेखा आज भी देखी जा सकती है। पूरे वर्ष यहाँ कई पर्यटक आते है। अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल प्राचीन राजारानी मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में हुआ था और यहाँ राजारानी पत्थर की सुंदर मूर्ति है।

ब्रम्हेश्वर मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जिसका निर्माण 1050 में हुआ था। इस मंदिर की सैर के दौरान पर्यटक पत्थर की अनेक मूर्तियां और नक्काशियां देख सकते हैं। कुमाऊं की पहाड़ियों में एक सुंदर गाँव स्थित है जो नाथूखान के नाम से जाना जाता है जहाँ से हिमालय की घाटियों का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। यह क्षेत्र ओक, देवदार, सनोवर और काफल के वृक्षों से ढंका हुआ है और यहाँ छोटे ग्रामीण मकान भी हैं जो यहाँ की सुंदरता बढ़ाते हैं। पर्यटक इस क्षेत्र में प्रकृति भ्रमण और ट्रेकिंग का आनंद उठा सकते हैं।

भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान एक विरासत औपनिवेशिक संगठन है जिसकी स्थापना 1893 में हुई थी। यह भारत में पशुचिकित्सा विज्ञान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह संस्थान जीवाणु विज्ञान, अनुवांशिकी और पशु पोषण में विस्तृत अनुसंधान कर रहा है। परिसर में स्थित पशुचिकित्सा संग्रहालय और पुस्तकालय की सैर भी की जा सकती है।

शिव मंदिर के पास स्थित मुक्तेश्वर निरीक्षण बंगला प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी और प्रकृतिवादी जिम कॉर्बेट को समर्पित है जो एडवर्ड जेम्स के नाम से भी जाने जाते थे। यह बंगला जिम कॉर्बेट के आराम करने का स्थान था जहाँ वे कुमाऊं के खतरनाक बाघों को मारने की योजना बनाते थे। इस प्रतिष्टित व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाई गई केतली आज भी इस बंगले में देखी जा सकती है।

कैसे जाएं मुक्तेश्वर

मुक्तेश्वर हवाई मार्ग, रेल और रास्ते द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

मुक्तेश्वर का मौसम

इस क्षेत्र का मौसम पूरे वर्ष आरामदायक रहता है। पर्यटक ठंड और मानसून के दौरान यहाँ की यात्रा करना टालते हैं क्योंकि उड़ानें डेरी से चलती हैं और इन मौसमों में अक्सर ट्रैफिक की समस्या आती है।

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