यों का मजा..तो इन छुट्टियों यहां जरुर जायें
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थौबल -  झीलों, नदियों और धान के खेतों का लें आनंद

थौबल जिले का जिला मुख्यालय थौबल मणिपुर के अन्य शहरों की तुलना में कहीं अधिक विकसित है। शहर के ज्यादातर प्रमुख स्थल थौबल नदी के तट पर बसे हैं। इम्फाल नदी यहां की दूसरी महत्वपूर्ण नदी है। थौबल जिला पूर्व में उखरुल और चंदेल, उत्तर में सेनापति, पश्चिम में इम्फाल पश्चिम व इम्फाल पूर्व और दक्षिण में चुराचंदपुर और बिष्णुपुर जिले से घिरा हुआ है।

थौबल तस्वीरें -  खोंगजोम -  खोंगजोम युद्ध स्मारक 
Image source: commons.wikimedia.org
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थौबल और आसपास के पर्यटन स्थल

पहाड़ों और टीलों के बीच बसा थौबल शहर अपनी सुंदरता में विशिष्टता लिए हुए है। पनथोईबी व चिंगा लैरेनभी मंदिर, तोमजिंग चिंग और मणिपुर साहित्य समिति के अलावा इस जिले में घूमने के लिए कई पर्यटन स्थल हैं। यहां कई बाजार भी हैं, जहां शॉपिंग करना अच्छा अनुभव साबित हो सकता है। इन बाजारों में सोवेनियर से लेकर हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की विशाल श्रृंखला देखने को मिलती है।

थौबल के बाहरी क्षेत्रों में कई ऐसे खुले स्थान हैं, जहां भारी संख्या में पर्यटक पिकनिक मनाने जाते हैं। यहां ट्रेकिंग और लंबी पैदल यात्रा का भी आनंद लिया जा सकता है। इसके अलावा यहां काफी संख्या में झील और नदियां हैं, जिससे यह स्थान आउटडोर गतिविधियों के लिए और भी आदर्श बन जाता है। यहां धान के बड़े-बड़े हरे-भरे खेतों की खूबसूरती पर्यटकों को खूब रिझाती है।

शुरू-शुरू में थौबल जिला कृषि के लिए जाना जाता था। यहां मुख्य रूप से चावल, सरसो, तिलहन, आलू, फल और सब्जियों का उत्पादन होता था। बाद में यहां के लागों ने पशुपालन का पेशा अपना लिया और कच्चे रेशम का उत्पादन करने लगे। विकास की बयार ने जब थौबल को स्पर्श किया तो दुनिया के सामने इसने अपनी शसक्त उपस्थिति दर्ज कराई। आज यहां परंपरा और आधुनिकता का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है।

थौबल घूमने का सबसे अच्छा समय

मानसून के बाद का समय थौबल घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

थौबल कैसे पहुंचे

हवाई, रेल और सड़क मार्ग से थौबल आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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