यों का मजा..तो इन छुट्टियों यहां जरुर जायें
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त्रिशूर – इतिहास, संस्कृति और आराम का संगम बिंदु

त्रिशूर छुट्टी मनाने के लिए आदर्श स्थान है यदि आप यहाँ वे सब आनंद महसूस नहीं करते जिसमें आप लिप्त रहने का प्रयत्न कर रहे हैं। केरल की सांस्कृतिक राजधानी के नाम से जाना जाने वाला यह वह मोहक स्थान है जो पुरुषों और देवताओं की कारीगरी द्वारा बनाई गई सौंदर्य की दुनिया में आपकी आँखें खोल देगा। त्रिशूर, जो त्रिशिवापेरुर का लघु नाम है (जिसका वास्तविक अर्थ है “भगवान शिव के नाम वाला शहर”), का नाम यहाँ के इष्ट देव वडक्कुम्नाथन क्षेत्रम के नाम पर पड़ा।

त्रिशूर तस्वीरें, 3
Image source: en.wikipedia.org
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त्रिशूर के आस पास के क्षेत्र

त्रिशूर के अन्य आकर्षण द बाइबल टॉवर, केरल कलामंडलम और चावक्कड़ समुद्र तट हैं अतः आप इन्हें अवश्य देखें। 

बीते युग के साक्ष्य

जैसा कि नाम से पता चलता है कि यह शहर दैवत्व, प्रकृति और इसकी संस्कृति के विविध रूपों को स्थापित करता है। यह शहर अपने प्राचीन पूजा करने के स्थानों की वास्तुकला, इसके अभिलेखागार में संरक्षित इतिहास के विशाल खजाने, संग्रहालयों और अनेक कहानियों, जो पुन: कथन और पुन: कल्पना की प्रतीक्षा कर रही है, के द्वारा आपकी कल्पना में हलचल उत्पन्न कर देगा। पुर्तगाली, डच और अंग्रेज़ी शासनकाल का अनुभव प्राप्त यह शहर अपने गौरवशाली और मनोरम अतीत के उत्सव पर खड़ा है।

यह शहर से और अधिक कुछ है...

बाहरी अनुभव के लिए यहाँ कई झरने, समुद्र तट, बाँध हैं जो आपकी आत्मा और खुशी के लिए विश्व को एक अलग रंग में रंगते हैं।

त्रिशूर की सैर कब करे?

वाणिज्य की हलचल वाले इस शहर में पूरे वर्ष आतिथ्य की भावना रहती है परंतु यह उचित होगा कि अप्रैल और मई की उमस और गर्मी को टाला जाए, यद्यपि यह वह समय होता है जब आठ दिन का पूरम त्यौहार अनेक भक्तों और पर्यटकों को अपनी पर आकर्षित करता है। अक्टूबर से फरवरी तक का समय सैर के लिए उत्तम है। त्रिशूर में हवाई अड्डा नहीं है परंतु अनेक स्थानों से बसें यहाँ आती हैं। अधिकांश मामलों में रेल सुविधाजनक होती है।

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