यों का मजा..तो इन छुट्टियों यहां जरुर जायें
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अगर नहीं है भूतों में यकीन..तो एकबार जरुर जायें मेहंदीपुर बालाजी

क्या आप भूतो में यकीन करते हैं...या फिर आपने कभी किसी को आत्मा या प्रेत के वश में किसी को देखा है। क्या आप इसे वास्तव में जाकर खुद देखना या महसूस करना चाहेंगे। तो जरुर जायें मेहंदीपुर बालाजी

Written by: Goldi
Updated: Friday, April 14, 2017, 17:58 [IST]
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क्या आप भूतो में यकीन करते हैं...या फिर आपने कभी किसी को आत्मा या प्रेत के वश में किसी को देखा है। क्या आप इसे वास्तव में जाकर खुद देखना या महसूस करना चाहेंगे।

जी हां..एक ऐसा ही मंदिर मौजूद है राजस्थान के दौसा जिले में जिसे हम सभी मेहंदीपुर बालाजी के नाम से जानते हैं। मेहंदीपुर बालाजी करीब 1 हजार साल पुराना है। यहां पर एक बहुत विशाल चट्टान में हनुमान जी की आकृति स्वयं ही उभर आई थी। इसे ही श्री हनुमान जी का स्वरूप माना जाता है।

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इनके चरणों में छोटी सी कुण्डी है, जिसका जल कभी समाप्त नहीं होता। यह मंदिर तथा यहाँ के हनुमान जी का विग्रह काफी शक्तिशाली एवं चमत्कारिक माना जाता है तथा इसी वजह से यह स्थान न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में विख्यात है।

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यह मंदिर और इससे जुड़े चमत्कार देखकर कोई भी हैरान हो सकता है। शाम के समय जब बालाजी की आरती होती है तो भूतप्रेत से पीड़ित लोगों को जूझते देखा जाता है।

यात्रा गाइड: दिल्ली से मेहंदीपुर अब सिफ 4 घंटे में

यह मंदिर जयपुर-बांदीकुई- बस मार्ग पर जयपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर है। दो पहाडिय़ों के बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर भी कहते हैं ।

बुरी आत्मायों से छुटकारा पाने आते हैं लोग

मेहंदीपुर बालाजी में श्रद्धालु यहां बुरी आत्माओं और काले जादू से पीड़ित रोगों से छुटकारा पाने लोग यहां आते हैं। इस मंदिर को इन पीड़ाओं से मुक्ति का एकमात्र मार्ग माना जाता है। यहां कई गंभीर रोगियों को लोहे की जंजीर से बांधकर मंदिर में लाया जाता है। यहां आने वाले पीड़ित लोगों को देखकर सामान्य लोगों की रूह तक कांप जाती है। PC: wikipedia.org

लोगों की कांप जाती है रूह

ये लोग मंदिर के सामने ऐसे चिल्ला-चिल्ला के अपने अंदर बैठी बुरी आत्माओं के बारे में बताते हैं, जिनके बारे में इनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहता है। भूत प्रेत ऊपरी बाधाओं के निवारणार्थ यहां आने वालों का तांता लगा रहता है।ऐसे लोग यहां पर बिना दवा और तंत्र मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं।
PC: wikipedia.org 

मुक्ति का मार्ग

इस मंदिर को इन पीड़ाओं से मुक्ति का एकमात्र मार्ग माना जाता है। मंदिर के पंडित इन रोगों से मुक्ति के लिए कई उपचार बताते हैं। शनिवार और मंगलवार को यहां आने वाले भक्तों की संख्या लाखों में पहुच जाती है।

भगाते हैं बुरी आत्मायों को

कई गंभीर रोगियों को लोहे की जंजीर से बांधकर मंदिर में लाया जाता है। यहां आने वाले पीडित लोगों को देखकर सामान्य लोगों की रूह तक कांप जाती है। ये लोग मंदिर के सामने ऐसे चिल्ला-चिल्ला के अपने अंदर बैठी बुरी आत्माओं के बारे में बताते हैं, जिनके बारे में इनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहता है। भूत प्रेत ऊपरी बाधाओं के निवारणार्थ यहां आने वालों का तांता लगा रहता है। ऐसे लोग यहां पर बिना दवा और तंत्र मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं।

संकी मनोकामना होती है पूरी

इस मंदिर में भारत के हर स्थान से दर्शनार्थी तीन में से किसी उद्देश्य को लेकर आते हैं। पहला मात्र दर्शन, दूसरा मनोकामना की पूर्ति के लिए अर्जी लगाना और तीसरा भूत-प्रेत से पीडि़तों के लिए मुक्ति के लिए।

तीन देवताओं का है वास

इस मंदिर में तीन देवताओं का वास है-बाल रूप में हनुमान जी, भैंरो बाबा और प्रेत राज सरकार। प्रत्येक दर्शनार्थी तीनों देवों के दर्शन कर कृतार्थ महसूस करता है। कामना पूर्ति के लिए यहां अर्जी लगायी जाती है। इसका नियम से पालन करने वाले की बालाजी तत्काल सुनते हैं।

नियम 1

नियम इस तरह है-सबसे पहले हलवाई से दरख्वास्त लेते हैं। यह कागज पर कलम से लिखी दरख्वास्त नहीं, अपितु यह एक दौने में छह बूंदी के लड्डू, कुछ बताशे तथा घी का एक दीपक होता है।

नियम 2

इस दौने को लेकर बालाजी के मंदिर ले जाकर वहां पुजारी को देना होता हैं। पुजारी दौने में से कुछ बताशे, लड्डू जल रहे अग्निकुंड में डाल देता है। जिस समय वह प्रसाद कुंड में डाल रहा हो, आपको अपनी मनोकामना मन में ही कहनी होती है। जैसे कि बालाजी भगवान मैं आपके दरबार में हूं, मेरी रक्षा करते रहना आदि।

नियम 3

पुजारी दौने में शेष रहा प्रसाद आपको वापस कर देता है। तब उसमें से दो लड्डू निकाल कर अपने पास रख लेते हैं और शेष दौने को भैंरो बाबा के मंदिर में पुजारी को दे देते हैं। वह भी उस दौने में से कुछ प्रसाद लेकर हवन कुंड में प्रवाहित कर देता है। ठीक उसी समय आपको वहीं मनोकामना के शब्द दोहराने हैं, जो आपने बालाजी के सामने मन ही मन कहे थे।

सबकी मनोकामना होती है पूरी

कुछ लोग बालाजी का नाम सुनते ही चैंक पड़ते हैं। उनका मानना है कि भूतप्रेतादि बाधाओं से ग्रस्त व्यक्ति को ही वहां जाना चाहिए। ऐसा सही नहीं है। कोई भी - जो बालाजी के प्रति भक्तिभाव रखने वाला है , इन तीनों देवों
की आराधना कर सकता है।

नहीं खाते प्रसाद

अब वही दौना लेकर आगे प्रेतराज सरकार के दरबार में पुजारी को देते हैं। वह भी कुछ सामग्री लेकर हवन कुंड में डालेगा। यहां भी वही मनोकामना के शब्द आपको दोहराने हैं। पुजारी शेष दौना आपको वापस कर देता है। यहां से बाहर एक चबूतरा है, वहां वह दौना फैंक देते हैं और मंदिर से बाहर आकर जो दो लड्डू बालाजी के भोग लगाने के बाद मिले थे, उन्हें खा लेते हैं। इस तरह अर्जी का एक चरण पूरा हो जाता है।

कोई नहीं लेता प्रसाद

इस मंदिर में यह विशेष बात है कि मंदिर में लगाया भोग प्रसाद न कोई लेता है और न किसी को दिया जाता है। और न कोई खाता है। यह प्रसाद अपने घर भी नहीं ले जाया जाता। केवल मिश्री-मेवा का प्रसाद ही घर ले जा सकते हैं।

मंदिर में क्या करें क्या ना करें

जिन रोगियो को मार पड़ती हुई हो उनके लिए आस-पास की जगह खाली छोड देनी चाहिए तथा समस्त उपस्थित भक्तो को जयकारो व भजनो के अलावा कोई भी वर्तालाप नही करना चाहिए।

मंदिर में क्या करें क्या ना करें

आरती सम्पूर्ण होने पर श्रध्दालुओ को ध्यानपूर्वक एवं श्रद्धा-भाव से श्री बालाजी की स्तुति प्रेम पूर्वक गानी चाहिए। श्रध्दालुओ को अपने हाथ से कोई भी पूजन सामग्री छूनी नही चाहिए।

 

मंदिर में क्या करें क्या ना करें

बालाजी के धाम की यात्रा करने से कम से कम एक हफ्ते पूर्व प्याज, लहसुन, मदिरा, मांस, अंडा और शराब का सेवन बंद कर देना चाहिए।

मंदिर में क्या करें क्या ना करें

मेहंदीपुर में चढ़ाया गया प्रसाद यहीं पूर्ण कर जाएं। इसे घर पर ले जाने का निषेध है। खासतौर से जो लोग प्रेतबाधा से परेशान हैं, उन्हें और उनके परिजनों को कोई भी मीठी चीज और प्रसाद आदि साथ लेकर नहीं जाना चाहिए।

 

 

English summary

Balaji temple in Rajasthan, a place to exorcise ghosts

Do you believe in ghosts? Do you think a human being can be possessed by a harmful spirit? Do you even think the spirits exist? Let us visit a temple in Rajasthan where they have answers for all these questions.
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