यों का मजा..तो इन छुट्टियों यहां जरुर जायें
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ये हैं उत्तर भारत की बेस्ट जगहें...जहां आप अकेले भी कर सकते हैं FUN

उत्तर भारत में कई ऐसी जगहें जहां अकेले घूम कर एन्जॉय किया जा सकता है..इसी क्रम में हमारे आज के लेख में जानिए उत्तर भारत में अकेले घूमने वाली जगहों के बारे में

Written by: Goldi
Published: Tuesday, February 21, 2017, 11:27 [IST]
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बचपन में हम अक्सर अपने परिवार के साथ घूमने जाते थे, जब थोड़े बड़े हुए तो दोस्तों के साथ घूमना शुरू कर दिया।परिवार और दोस्तों के साथ घूमने में हमेसा ही बेफिक्री रहती हैं, लेकिन जब बात आती है अकेले घूमने की तो मन थोड़ा घबरा उठता है।

अकेले घूमना कोई आसान काम नहीं है। जब आप अकेले यात्रा पर निकलते है,तो यह आपके पेशन्स,साहस का परिचय होता है। यकीन मानिये अकेले यात्रा करना बेहद दिलचस्प होता है, क्योंकि, इसमें सारे फैसले आपके हैं, और साथ ही आप अपनी जिन्दगी में नए एक्सपिरियंस को देखने के लिए तैयार रहते हैं।

 अकेला घूमना कभी कभी मन में डर भी पैदा करता है, लेकिन जब आप इसकी शुरुआत करेंगे तो आपको अपने अंदर एक नई स्फूर्ति का एहसास होगा। साथ ही जब अप अनजानी जगहों को अपमना हमराही बनायेंगे, जो आप आपके अंदर एक आत्मविश्वास होगा जो आपको और आपके जीवन को और भी सरल बना देता है।

जब आप अकेले ट्रेवल करते है तो सारे फैसले आपके होते हैं, कि कहां कितनी देर रुकना है। जैसे कहा जाता है जब व्यक्ति अकेला बाहर रहने लगता है तो बहुत कुछ सीखता है ठीक वैसे ही जब एक व्यक्ति अकेला यात्रा पर निकलता है, तो उसका आत्मविश्वास खुद पर और भी बढ़ जाता है। आइयेइसी क्रम में जानते है उत्तर भारत के बेस्ट ट्रेकिंग स्थल जहां अकेले की जा सकती है जमकर मस्ती....

त्रिउंड

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में स्थित एक छोटे से हिल स्टेशन के रूप में जाना जाता है, जो धर्मकोट हिल स्टेशन का ही एक भाग है। धौलाधार पर्वत की तलहटी पर बसा यह क्षेत्र लगभग 2,828 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। त्रिउंड ट्रेक का यह सफ़र शुरू होता है मेकलॉडगंज से जो तिब्बत की निर्वासित सरकार की राजधानी है। त्रिउंड, हिमाचल प्रदेश का ऐसा ट्रेकिंग सफ़र है जो हर एक रोमांच पसंद करने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता है। झरनों पहाड़ों
के साथ होता हुआ यह ट्रेकिंग सफ़र आपको प्रकृति के हर रंग से रूबरू कराता है।

खीरगंगा

खीरगंगा, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में है। भौगोलिक रूप से यह वृहद हिमालय नेशनल पार्क की बाहरी परिधि पर पार्वती नदी की घाटी में स्थित है। खीरगंगा की समुंद्र तल से उंचाई है 2804 मीटर यानि लगभग 9200 फीट। खीरगंगा के बारे में कहा जाता है कि कभी यहां भगवान शिव की कृपा से खीर निकलती थी। लेकिन जब परशुराम जी ने देखा कि लोग इस खीर को खाने के लालच में बावले हुये जा रहे हैं तो उन्होंने श्राप दे दिया कि अब यहां से कोई खीर नहीं निकलेगी। और बस, तभी से खीर निकलनी बंद। हालांकि आज भी दूध की मलाई जैसी चीज गरम खौलते पानी के साथ निरंतर निकलती रहती है।यहां आने वाले पर्यटक यहां ट्रेकिंग का भरपूर मजा ले सकते हैंखीरगंगा के बारे में कहा जाता है कि कभी यहां भगवान शिव की कृपा से खीर निकलती थी। लेकिन जब परशुराम जी ने देखा कि लोग इस खीर को खाने के लालच में बावले हुये जा रहे हैं तो उन्होंने श्राप दे दिया कि अब यहां से कोई खीर नहीं निकलेगी। और बस, तभी से खीर निकलनी बंद। हालांकि आज भी दूध की मलाई जैसी चीज गरम खौलते पानी के साथ निरंतर निकलती रहती है। खीर गंगा आने का उचित समय मार्च से नवंबर है।

लद्दाख

लद्दाख अपनी विशिष्ठ संस्कृति के लिए विश्वविख्यात है। ऐतिहासिक काल से बल्तिस्तान घाटी, सिन्धु घाटी और जंस्कार का क्षेत्र लद्दाख के रूप में जाना जाता है। विभिन्न हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं और चोटियों से आवृत्त यह क्षेत्र अनेक प्रसिद्ध नदियों, हिमनदों, झीलों एवं झरनों के साथ ही बौद्ध संस्कृति के लिए भी यह क्षेत्र विख्यात है। ट्रैकिंग, पर्वतारोहण और राफ्टिंग के लिए काफी लोकप्रिय है। यूं तो यहां पहुंचना ही किसी रोमांच से कम नहीं लेकिन यहां आने वालों के
लिए उससे भी आगे बेइंतहा रोमांच यहां उपलब्ध है। दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित सड़कों (मारस्मिक ला व खारदूंग ला) के अलावा इस इलाके में सात हजार मीटर से ऊंची कई चोटियां हैं जिनपर चढ़ने पर्वातारोही आते हैं।  ट्रैकिंग के भी यहां कई रास्ते हैं। ट्रैकिंग व राफ्टिंग के लिए तो यहां उपकरण व गाइड आपको मिल जाएंगे ।

स्पीति

हिमाचल के जिला लाहौल स्पीति में स्थित स्पीती घाटी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। साल में कुछ ही महीने यह सैर सपाटे के लिए खुला रहता है। लेकिन इसके बावजूद कई सैलानियों की यह पहली पसंद है।यहां कई बड़ी झीलें भी हैं जो सर्दियों के दौरान जम जाती है। सैलानी गर्मियों के महीनों में यहां आ सकते हैं। सर्दियों में ज्यादातर दिन यह घाटी बाहरी दुनिया से कटी रहती है। यहां पर्यटकों के रुकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है, इसलिए यहां आने वाले पर्यटक काजा में रुक सकते हैं,वहां पर्यटकों को रुकने के लिए होटल और रिसोर्ट आसानी से उपलब्ध हो जाते है।

रुपिन पास

रुपिन पास हिमालय पर्वत श्रृंखला के पास स्थित है, जोकि समुद्र तल से 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। रुपिन आने वाले पर्यटक यहां ट्रेकिंग का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं।

तोष घाटी

तोष घाटी को पार्वती घाटी के नाम से भी जाना जाता है जोकि हिमाचल प्रदेश में स्थित है।तोष घाटी अकेले यात्रा करने वालो के लिए एकदम परफेक्ट स्थान है। यहां आने वाले पर्यटकों को यहां आकर असीम शांति की अनुभूति होती है। तोष घाटी से कुछ दूर ही मणिकरण स्थित है जोकि धार्मिक स्थान है।

मारखा घाटी

मारखा घाटी लद्दाख में स्थित है,यहां आने वाले पर्यटकों को सर्दियों के दौरान भरी मात्रा में बर्फबारी देखने को मिलती है।

मलाणा

मलाणा हिमाचल प्रदेशा कि कुल्लू घाटी के उत्तर पूर्व में स्थित एक प्राचीन गांव है।जोकि चन्द्र्खानी और देओ टिब्बा नाम की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह जगह मार्च में अकेले यात्रा करने के लिए एकदम परफेक्ट है।

कसोल

चांदी सी चमचम करती बर्फ से ढकी बुलन्द पहाडों की गोदी में रचता-बसता हो एक छोटा सा दिलकश गांव कसोल। कसोल हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से महज 35 किलोमीटर के फासले पर है। ऊंचाई है करीब पांच हजार फीट। यहां न दिल्ली या मुम्बई जैसी उमस है, न कुल्लू शहर जैसी रेलमपेल। कुछ है तो बस सादगी। कसोल आने वाले पर्यटक यहां ट्रेकिंग का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं।

 

 

कानातल

कानातल एक छोटा सा गांव है जो उत्तराखंड में स्थित है।य हां सर्दियों के समय भरी बर्फबारी देखने को मिलती है साथ ही यहां गर्मियों में मौसम बेहद ही अनुकूल रहता है। यहां घूमने का उचित समय अप्रैल मार्च है।यहां आकर आप बर्फ की चादर से ढके पहाड़ो का मनोरम नजारा देख सकते हैं।

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

कॉर्बेट नेशनल पार्क वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है जो प्रकृति माँ की शांत गोद में आराम करना चाहते हैं। पहले यह पार्क (उद्यान) रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था परंतु वर्ष 1957 में इसका नाम कॉर्बेट नेशनल पार्क(कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान) रखा गया। इस पार्क का नाम प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी, प्रकृतिवादी और फोटोग्राफर जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया। भारत जंगली बाघों की सबसे अधिक आबादी के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्द है और जिम कॉर्बेट पार्क लगभग 160 बाघों का आवास है। इस पार्क में लगभग 600 प्रजातियों के रंगबिरंगे पक्षी रहते है जिनमें मोर, तीतर, कबूतर, उल्लू, हॉर्नबिल, बार्बिट, चक्रवाक, मैना, मैगपाई, मिनिवेट, तीतर, चिड़िया, टिट, नॉटहैच, वागटेल, सनबर्ड, बंटिंग, ओरियल, किंगफिशर, ड्रोंगो, कबूतर, कठफोडवा, बतख, चैती, गिद्ध, सारस, जलकाग, बाज़, बुलबुल और फ्लायकेचर शामिल हैं। इसके अलावा यात्री यहाँ 51 प्रकार की झाडियाँ, 30 प्रकार के बाँस और लगभग 110 प्रकार के विभिन्न वृक्ष देख सकते हैं। पर्यटक यहां जंगल सफारी और राफ्टिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का भी मजा ले सकते हैं।

हर की दून

हर की दून यानि प्राकृतिक सौन्दर्य का अकूत खजाना! आप इसे पृथ्वी का स्वर्ग भी कह सकते हैं । हर की दून जाने के दो मार्ग हैं। एक मार्ग हरिद्वार से ऋषिकेश, नरेन्द्र नगर, चंबा, धरासू, बड़कोट, नैनबाग से पुरौला तक और दूसरा देहरादून से मसूरी, कैंप्टी फाल, नौगांव, नैनबाग से पुरौला तक जाता है। पुरौला सुंदर पहाड़ी कस्बा है और चारों ओर पहाड़ों से घिरा बड़ा कटोरा जैसा लगता है। बस्ती के चारों ओर धान के खेत, फिर चीड़ के वृक्ष और उनके ऊपर से झांकती पर्वत श्रृंखलाएं।

चन्द्रशिला

चन्द्रशिला उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ के बीच बसी एक छोटी-सी चोटी है, जहाँ से हिमालय के अद्भुत दर्शन होते हैं। तुंगनाथ से तकरीबन दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई के बाद चौदह हज़ार फीट की ऊँचाई पर चंद्रशिला चोटी है। यहाँ केवल पैदल ही जाया जा सकता है। चन्द्रशिला से हिमालय इतना नजदीक है कि ऐसा लगता है मानो उसे छू ही लेंगे। यह जगह काफ़ी ऊँचाई पर स्थित है कहा जाता है कि, यह वाही जगह है जहाँ भगवान राम ने राक्षसों के राजा रावण को जीतने के बाद तप किया था। यह भी माना जाता है कि चाँद के देवता चन्द्रमा ने यहाँ अपना प्रायश्चित संपादित किया था। चन्द्रशिला आने वाले पर्यटक यहाँ स्केलिंग, स्कीइंग और पर्वता रोहण जैसी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। चन्द्रशिला ट्रैक दर्शकों के बीच सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग मार्गों में से एक है।

चलाल

चलाल हिमाचल प्रदेश का एक छोटा सा गांव है, जोकि कसोल से 15 किमी की दूरी पर स्थित है।यहां आने का उचित समय मार्च से मध्य जून और सितम्बर से नवंबर है। यहां पर्यटकों के ठहरने के कई रिसोर्ट भी उपलब्ध हैं।यहां एक ट्रेकिंग पॉइंट है जोकि पार्वती घाटी से होकर गुजरता है।

English summary

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Travelling solo isn't always easy. It can test your patience, courage and willingness to adapt to situations outside of your comfort zone.A solo trip often offers several advantages that are but overlooked when planning trips with a group.
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