यों का मजा..तो इन छुट्टियों यहां जरुर जायें
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बादलों की ओट में देहरादून से नैनीताल रोड ट्रिप

चिलचिलाती गर्मी में हो जाये देहरादून से नैनीताल की एक सैर

Written by: Goldi
Published: Wednesday, June 7, 2017, 13:00 [IST]
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून उत्तरभारत की खूबसूरत जगहों में से एक है।देहरादून का नाम 'देहरा' अर्थ 'शिविर' और 'दून' अर्थ 'पहाड़ों के तल पर नीची भूमि' शब्दों से उत्पन्न हुआ है।

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देहरादून के पूर्व में गंगा नदी बहती है, जबकि यमुना नदी पश्चिम को बहती है कि देहरादून का नाम 'देहरा' अर्थ 'शिविर' और 'दून' अर्थ 'पहाड़ों के तल पर नीची भूमि' शब्दों से उत्पन्न हुआ है।

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पौराणिक कथायों के मुताबिक,यहां हिंदू भगवान श्री राम, अपने भाई लक्ष्मण के साथ, असुर राजा रावण की हत्या करने के बाद देहरादून आये थे। एक और कहानी से पता चलता है कि गुरु द्रोणाचार्य भी एक समय में यहाँ रहते थे। यहाँ पाये जाने वाले प्राचीन मंदिर और खंडहर लगभग 2000 साल पुराने हैं।

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देहरादून के आसपास बेहद ही खूबसूरत हिलस्टेशन और धार्मिक स्थान मौजूद है..जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

देहरादून कुछ अनुसंधान और शिक्षण संस्थानों जैसे, भारतीय सैन्य अकादमी, वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालय भूविज्ञान, वन अनुसंधान संस्थान और दून पब्लिक स्कूल के लिए प्रसिद्ध है।

नैनीताल को भारत का झीलों वाला कस्बा भी कहा जाता है। नैनीताल में करीबन 60 झीले मौजूद है..यह जगह 435 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। नैनीताल चारो और ओर खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

नैनीताल अपने खूबसूरत परिदृश्यों और शांत परिवेश के कारण पर्यटकों के स्वर्ग के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रिटिश व्यापारी, पी. बैरून ने 1839 में, यहाँ की सम्मोहित कर देने वाली खूबसूरती से प्रभावित होकर ब्रिटिश कॉलोनी स्थापित करके नैनीताल को लोकप्रिय बना दिया।

देहरादून

देहरादून अपनी रोमांचक ऐतिहासिक किस्सों के अलावा प्राकृतिक सौंदर्य की धरोहर है। यहां पर्यटकों के लिहाज़ से वो सब मौजूद है जो किसी भी पर्यटक के लिए पर्याप्त होता है। देहरादून के बारे में कहा जाता है कि जो इस शहर में एक बार आया वो समझो यहीं का हो गया। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य बेहद लुभावना है जो किसी भी पर्यटक को अपनी और खींच सकता है। यहाँ पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक महत्व के संग्रहालय, तीर्थस्थल, प्राकृतिक सुषमा, खेलकूद व पशु-पक्षियों के अभयारण्य आदि हैं। यहाँ आपको संतोलादेवी मंदिर, मालसी मृग विहार, चकराता, लक्ष्मण सिद्ध, वन अनुसंधान संस्थान, टपकेश्वर मंदिर, लच्छीवाला, आसन झील, तपोवन, वाडिया संस्थान, डाक पत्थर, सहस्त्रधारा, मालसी डियर पार्क, चंद्रबाणी, लाखामंडल, रॉबर्स केव (गुच्चू पानी) और कलंगा स्मारक आदि दर्शनीय स्थल देखने को मिलेंगे।PC: Nandanautiyal

तपोवन

तपोवन गंगा नदी के किनारे स्थित है,जोकि हिदुयों के लिए काफी पवित्र स्थान है।PC: Lokeshwar23

टपकेश्वर मंदिर

टपकेश्‍वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक लोकप्रिय गुफा मंदिर है। यह देहरादून शहर के बस स्टैंड से 5.5 किमी दूर स्थित एक प्रवासी नदी के तट पर स्थित है। टपक एक हिन्दी शब्द है, जिसका मतलब है बूंद-बूंद गिरना। यह कहा जाता है कि मंदिर में एक शिवलिंग है और गुफा की छत से पानी स्‍वाभाविक रूप से टपकता रहता है।

हरिद्वार

हरिद्वार देहरादून से 53 किमी की दूरी पर स्थित हिंदुयों का धार्मिक स्थल है...पर्यटक यहां देहरादून से 1 से दो घंटे में पहुंच सकते हैं। हरिद्वार का सबसे अलौकिक दृश्य शाम की गंगा आरती है..इस आरती को देखने के बाद आपकी सारी थकान चुटकियों में दूर हो जायेगी।PC: Julian Nyča

पतंजली योगपीठ

हरिद्वार स्थित पतंजली योगपीठ हरिद्वार के मुख आकर्षणों में से एक है..पतंजली के आलवा आप यहां मनसा देवी, चंडी देवी, भारत माता मंदिर आदि देख सकते है।PC:Alokprasad

नजीबाबाद

हरिद्वार के बाद अगला स्टॉप है नजीबाबाद..यह जगह हरिद्वार से 50 किमी की दूरी पर स्थित है..आप यहां एक घंटे की ड्राइव कर आसानी से पहुंच सकते हैं।हालांकि यहां घूमने का कुछ खास नहीं है..लेकिन आप यहां चाय नाश्ता कर सकते हैं।

रामनगर

रामनगर नजीबाबाद से 120 किमी की दूरी पर है जिसे आप 3 घंटे में कवर सकते हैं। यहां गर्जिया माता का मंदिर है जहां गर्जिया माता की 4.5 फिट ऊंची मूर्ति स्थापित है ।देवी गिरिजा जो गिरिराज हिमालय की पुत्री तथा संसार के पालनहार भगवान शंकर की अर्द्धागिनी हैं, कोसी (कौशिकी) नदी के मध्य एक टीले पर यह मंदिर स्थित है। PC:Anamdas

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क

रामनगर स्थित जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क काफी प्रसिद्ध है..यह देश के पुराने राष्ट्रीय पार्कों में से एक है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क 1974 में यह सबसे पहला बाघ अभ्यारण्य के रूप में उभर कर सामने आया। सबसे पुराना यह अभ्यारण्य बिल्लियों की एक अनोखी जाति, एक अलग किस्म के बाघों और अन्य जंगली जातियों जैसे फिशिंग बिल्लियाँ, हिमालयी तहर, सीरो, आदि जैसे जीवों के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है।
PC: wikimedia.org

खरीददारी

कोई भीं यात्रा बिना शॉपिंग के पूरी नहीं होती है..अगर अप नैनीताल जा रहें हैं तो बड़ा बाजार, तिब्बती मार्केट और मॉल रोड पर शॉपिंग करना कतई ना भूले।इन बाजरों में आपको आपको कपड़े, हस्तशिल्प जैसी तमाम चीजें मिल जाएंगी।

सूर्योदय

नैनीताल पहुँचने के बाद आपको टिफ़िन टॉप से सूर्योदय जरुर देखना चाहिए..टिफिन टॉप नैनीताल का एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है जो कि ‘डोरोथी की सीट' के नाम से भी जाना जाता है। अयारपट्टा पीक पर स्थित यह स्थान समुद्र की सतह से 7520 फीट की उंचाई पर स्थित है। यात्री यहाँ से ग्रामीण परिदृश्यों के साथ शक्तिशाली हिमालय पर्वतमाला के प्रभावशाली दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।PC:Perplexeus

सूर्यास्त

नैनीताल स्थित हनुमान गढ़ी भगवान हनुमानजी का मंदिर है..पहाड़ी अपर स्थित इस मंदिर से सूर्यास्त देखने का अपना एक अलग ही मजा है।यहां काफी संख्या में पर्यटक सूर्यास्त देखने पहुंचते है..भीड़ में अपनी जगह बनाने के लिए यहां शाम 4 बजे तक पहुंच जाएँ।PC: Ujjwalmah

केबल कार की सवारी

नैनीताल स्थित में एक चोटी से दूसरी चोटी पहुँचाने वाली केबल कार की सवारी अवश्य करें। क्यूंकि इसकी सवारी इसे पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय बनाती है। यहाँ प्राकृतिक दृश्यों का आप जी भर कर लुफ्त उठा सकते हैं।PC:Mandeep Thander

नौकायान

नैनीताल की खूबसूरत झीलों में से एक नैनी झील में बोटिंग का मजा जरुर ले। इस झील का पानी बेहद साफ़ है और इसमें तीनों ओर के पहाड़ों और पेड़ों की परछाई साफ दिखती है। आप इस झील में 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक बोटिंग का मजा ले सकते है।PC:Sanjoy Ghosh

पंगोट और किलवरी बर्ड सेंचुरी

अगर आप खूबसूरत पक्षियों को देखने की चाह रखते हैं तो किलवरी बर्ड सेंचुरी आपके लिए स्वर्ग से कम नहीं है।इस बर्ड सेंचुरी में आप करीबन 580 तरह के पक्षियों की प्रजाति को निहार सकते हैं।PC:Raman Kumar

स्नो व्यूपॉइंट-नैना पीक

नैना पीक' जिसे चाइना पीक भी कहते हैं, नैनीताल की सबसे ऊँची चोटी है। यह समुद्र तल से 2611 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, यहाँ तक घोड़े की सवारी करके पहुँचा जा सकता है।आप इस चोटी अपर ट्रेकिंग भी कर सकते हैं।PC:Dr. Satyabrata Ghosh

नैनीताल चिड़ियाघर

नैनीताल स्थित चिड़ियाघर को बल्लभ पंत चिड़ियाघर के नाम से जाना जाता है। समुद्रतल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस चिड़ियाघर में हिमालयन काले भालू सहित विभिन्न जानवरों जैसे बंदरों, साइबेरियन बाघ, तेंदुए, भेड़िए, पाम सीविट बिल्लियों, रोज़ रिंग पैराकीटों, सिल्वर तीतर, पहाड़ी लोमड़ी, सांबर, घोरल और भौंकने वाले हिरणों को देखा जा सकता है।PC: Nainital Zoo official website

नैना देवी मंदिर

नैना देवी मंदिर नैनी झील के पास स्थित है...नैनी देवी मंदिर का शुमार प्रमुख शक्ति पीठों के रूप में भी होता है। ज्ञात हो कि 1880 में भूस्‍खलन से यह मंदिर नष्‍ट हो गया था। बाद में इसे दुबारा बनाया गया। यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है। मंदिर में दो नेत्र हैं जो नैना देवी को दर्शाते हैं।

PC:Ekabhishek

इको गार्डन गुफा

नैनीताल के खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक गार्डन गुफा बच्चो के बीच खासा लोकप्रिय है ।इसमें छह भूमिगत केव हैं जिन्हें पेट्रोमैक्स लैम्पों के द्वारा प्रकाशित किया जाता है और एक संगीत की लय पर चलने वाला फ़व्वारा भी है जो सर्वप्रथम नैनीताल में लगाया गया था। इन गुफाओं को टाइगर गुफा, पैंथर गुफा, बैट गुफा, स्क्वेरिल गुफा, फ्लाइंग फॉक्स गुफा और एप गुफा के नाम से जाना जाता है। इन गुफाओं को जोड़ने वाला रास्ता काफी संकरा है, कहीं-कहीं यात्रियों को रेंगने की ज़रुरत पड़ती है। ये सभी गुफाएँ प्राकृतिक हैं और इनकी देख-रेख स्थानीय प्रशासन के द्वारा की जाती है।

कब जायें नैनीताल

नैनीताल घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल के अंत से जून तथा सितंबर से अक्टूबर तक होता है..अगर आपको बर्फबारी देखनी है तो जनवरी से मार्च तक के महीनों में यहाँ घूमने आ सकते हैं लेकिन ऊनी कोट, बूट्स, हैट्स और ग्लव्स जरुर रखें।PC:Tusharbohra01

कैसे आये नैनीताल

वायु मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर विमानक्षेत्र नैनीताल से 71 किलोमीटर दूर है। यहाँ से दिल्‍ली के लिए उड़ानें हैं।

रेल मार्ग
निकटतम रेलहेड काठगोदाम रेलवे स्‍टेशन (35किलोमीटर) है जो सभी प्रमुख नगरों से जुड़ा है।

सड़क मार्ग
नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग 87 से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, आगरा, देहरादून, हरिद्वार, लखनऊ, कानपुर और बरेली से रोडवेज की बसें नियमित रूप से यहां के लिए चलती हैं।

 

 

English summary

dehradun-nainital-drive-among-the-clouds-hindi

Travel among the clouds, take a roadtrip from Dehradun to Nainital. Read about the best time and the must-visit places in these serene places.
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