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भारत के हजार साल पुराने मंदिर..वास्तुकला ऐसी की बस देखते ही रह जाओ

भारतीयों में आस्था और विश्वास की पकड़ इतनी मजबूत है कि वो इसके सहारे बड़ी से बड़ी बाधा को भी पार कर जाते हैं।

Written by: Goldi
Updated: Friday, July 21, 2017, 12:55 [IST]
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भारत मंदिरों का देश है हजारों साल पहले सनातन धर्म के उत्थान के साथ ही यहां मंदिर और देवालय बनने लगे थे। आज दुनिया में सबसे अधिक मंदिर भारत में हैं। पूरे भारत में एक से बढ़कर एक भव्य कलात्मक मंदिर हैं। कोई अपने वैभव के कारण प्रसिद्ध है तो कोई भक्तों की आस्था के कारण।

हरि की ओर बुलाने वाला द्वार 'हरिद्वार'

भारतीयों में आस्था और विश्वास की पकड़ इतनी मजबूत है कि वो इसके सहारे बड़ी से बड़ी बाधा को भी पार कर जाते हैं। भारत जहाँ कण कण में भगवान बसते हैं, जहाँ धर्म और आस्था को जीवन माना जाता है। यहाँ पर धार्मिक और तीर्थ स्थलों का यूँ तो अम्बार है और हर स्थल की कोई न कोई मान्यता है।

भारत के सबसे धनी मंदिर,बिल गेट्स की भी दौलत हैं यहां फीकी

मंदिरों के देश भारत में कई ऐसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं जो आज भी अपनी भव्यता और महत्ता के लिए भक्तों और पर्यटकों के बीच प्रसिद्द हैं। इसी क्रम में आज हम आपको रूबरू कराने जा रहें है भारत के कुछ बेहद ही प्राचीन मन्दिरों से......

शोर मंदिर, महाबलीपुरम, तमिलनाडु

चेन्नई से करीब 55 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित शोर मंदिर को दक्षिण भारत के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक,इस मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था..यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। यहां दरअसल तीन मंदिरों का एक समूह है। बीच में भगवान विष्णु का मंदिर है, जिसके दोनों तरफ शिव मंदिर हैं। PC: Bernard Gagnon

सोमनाथ मंदिर, गुजरात

सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम हैं। ज्यादातर श्रद्धालू जो 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन की योजना बनाते हैं, वे सोमनाथ से ही शुरुआत करते हैं। मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था। इस वैभवशाली मंदिर को इस्लामिक आक्रान्ताओं ने कई बार लूटा और तोड़ा। यह मंदिर मंदिर इतना पुराना है कि इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। PC:Samadolfo

अंबरनाथ मंदिर, महाराष्ट्र

यह मंदिर प्राचीन हिन्दू शिल्पकला की ज्वलंत मिसाल है। ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य में बने अंबरनाथ शिव मंदिर के बारे में कहा जाता है ​कि इसके जैसा मंदिर पूरी दुनिया में और कहीं नहीं। इसे 11वीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था। यहां पर वर्ष 1060 ई. का एक प्राचीन शिलालेख भी पाया गया है। इस अनोखे मंदिर को शिलाहाट नरेश मांबणि द्वारा निर्मित है।यह मंदिर वलधान नदी के तट पर है और इसके चारों ओर आम तथा इमली के पेड़ हैं। 
PC:Akshay Vijay Nachankar

केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड

केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है। उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की सवारी नन्दी बैल की प्रतिमा मन्दिर के बाहर एक रक्षक के रूप में स्थित है। 1000 साल से भी ज्यादा पुराने इस मन्दिर को एक चतुर्भुजाकार मंच पर भारी पत्थरों को काट कर समान पटियाओं को मिलाकर बनाया गया है।
 PC: Naresh Balakrishnan

बद्रीनाथ मंदिर, उत्तराखंड

भारत के चार धामों में प्रमुख तीर्थ-स्थल बद्रीनाथ भगवान विष्णु के रूप समर्पित है। बद्रीनाथ उत्तर दिशा में हिमालय की उपत्यका में अवस्थित हिन्दुओं का मुख्य यात्राधाम माना जाता है। यह मंदिर अपनी वास्तुकला और पौराणिक कथाओं के साथ पूरी दुनिया में सुप्रसिद्ध है।
PC: ShashankMalathisha

लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर, ओडिशा

लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर का सबसे बड़ा मंदिर है। कई कारणों से मंदिर का विशेष महत्व है। यह शहर का सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और इस मंदिर का निर्माण सोमवंशी राजा जजाति केशरि ने 11वीं शताब्दी में करवाया था।। यह मंदिर भगवना शिव के एक रूप हरिहारा को समर्पित है और शहर का एक प्रमुख लैंडमार्क है। लिंगराज का विशाल मन्दिर अपनी अनुपम स्थापत्यकला के लिए प्रसिद्ध है। मन्दिर में प्रत्येक शिला पर कारीगरी और मूर्तिकला का चमत्कार है। PC: Bernard Gagnon

कैलाश मंदिर, महाराष्ट्र

एलोरा का कैलाश मन्दिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में प्रसिद्ध ‘एलोरा की गुफ़ाओं' में स्थित है। यह प्राचीन भारतीय सभ्यता का जीवंत प्रदर्शन करता है। यह मंदिर दुनिया भर में एक ही पत्थर की शिला से बनी हुई सबसे बड़ी मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर को तैयार करने में क़रीब 150 वर्ष लगे और लगभग 7000 मज़दूरों ने लगातार इस पर काम किया। बता दें, यह मंदिर करीब 12000 हजार साल पुराना है। PC:Rajesh Rane

बृहदेश्वर मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के तंजौर में स्थित बृहदेश्वर मंदिर हिन्दुओं का प्रसिद्ध मंदिर है। जिसकी आस्था में लोग कोसो दूर से भी मीलों की दूरी तय करके यहाँ भगवान के दर्शन करने और भगवान के दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं। यह अपने समय के विश्व के विशालतम संरचनाओं में गिना जाता था। इस मंन्दिर का निर्माण कार्य 1003-1010 ई. के बीच चोल शासक राजाराज चोल प्रथम ने करवाया था।PC:Visaran

द्वारिकाधीश मंदिर, गुजरात

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) भी कहा जाता है। किवदंती है कि जगत मंदिर - द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़ पोते वज्रनाभ ने किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद जब द्वारका जो भगवान कृष्ण का राज्य था, पानी में डूब गई थी तब इस मंदिर का निर्माण किया गया था। कृष्ण भक्तों की दृष्टि में यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ है और द्वारका नगरी शंकराचार्य द्वारा स्थापित देश के चार महत्वपूर्ण धामों में से एक है। 
PC: Rohit Gupta

पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर, राजस्थान

पुष्कर राजस्थान में प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। अजमेर से करीब 11 किलोमीटर दूर यहां ब्रह्मा का एक मंदिर है। मान्यताओं के मुताबिक, ब्रह्मा ने यहां आकर यज्ञ किया था। यहां कार्तिक पूर्णिमा को प्रसिद्ध पुष्कर मेला का आयोजन होता है।यह मंदिर मूल रूप से 14 वीं सदी में बनाया गया था। मंदिर में राजसी छवि वाले कमल पर विराजमान, ब्रहमा जी की चार मुख वाली मूर्ति स्‍थापित है जिसके बाएं तरफ उनकी युवा पत्‍नी गायत्री और दाएं तरफ सावित्री बैठी हैं। PC: Adityavijayavargia

कुंभेश्वर मंदिर, कुंभकोणम, तमिलनाडु

शिव को समर्पित ये चोल मंदिर तमिलनाडु में स्थित है। इसे लगभग नौवीं सदी में बनाया गया था। PC: Ssriram mt

श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर, तमिलनाडु

श्री वरदराजा पेरुमल मंदिर तामिरभरणी नदी के तट पर स्थित है।इस मंदिर के मुख्य देवता या "मूलवर" वीरराघवन हैं और मंदिर की "उत्सव मूर्ति" श्री वरदराजा पेरूमल है, जिनके नाम पर इस मंदिर का नाम रखा गया है। इस मंदिर को सदियों पहले राजा कृष्णवर्मा ने बनवाया था। श्री वरदराजा पेरूमल के एक कट्टर अनुयायी थे। इस मंदिर के दर्शन करना एक फलदायक अनुभव होता है। PC: రహ్మానుద్దీన్

बादामी मंदिर, कर्नाटक

कर्नाटक के बगलकोट में स्थित बादामी गुफा हिंदू और जैन धर्म के चार मंदिर अपनी खूबसूरत नक्काशी, कृत्रिम झील और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध हैं। सुनहरे बलुआ पत्थर की चट्टानों को काटकर बनाए गए इस सुंदर मंदिर का दृश्य अत्यंत आकर्षित करता है। यहाँ भगवान शिव की एक विशाल प्रतिमा है जो तांडव करते हुए है। यहाँ आप महिषासुरमर्दिनी, गणपति, शिवलिंगम और शन्मुख की प्रतिमा भी देख सकते हैं। साथ ही पर्यटक भगवान शिव और पार्वती  विवाह के भित्त चित्रों को भी देख सकते हैं। PC:Jean-Pierre Dalbéra

चेन्नाकेसवा मंदिर, कर्नाटक

होयसला सल्तनत द्वारा 10वीं से 11वीं सदी के बीच इसे बनवाया गया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। PC:Varun Shiv Kapur

English summary

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Temples are the religious places and are symbol of peace and togetherness. In this article today.we shall go back to the indian historypages where the present temples enlisted here still stands erect and proud
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