यों का मजा..तो इन छुट्टियों यहां जरुर जायें
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हिमाचल के इस खूबसूरत गांव पर आज भी है विदेशियों का कब्जा

आजादी के बाद भी भारत में एक ऐसा गांव है जहां आज भी भारतीय पुरुषों का जाना वर्जित है..आखिर क्यों

Written by: Goldi
Published: Friday, May 19, 2017, 10:00 [IST]
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भारत को आजाद हुए कई वर्ष बीत चुके है,,बावजूद आज भी यहां एक ऐसी जगह हैं, जहां भारतीय पुरुषों का जाना प्रतिबंधित है। सुनकर थोड़ा सा अजीब लग सकता है लेकिन ऐसा है।

जी हां, यह जगह कहीं और नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश में स्थित है जिसे हम सभी कसोल के नाम से जानते हैं। इस गांव में पुरुष इसीलिए प्रतिबंधित हैं, क्योंकि इस गांव में पिछले कई सालों से इसराइली लोग छुट्टियाँ मनाने पहुंच रहे हैं।

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इस गांव में आने के बाद आपको लगेगा कि, आप भारत में नहीं बल्कि किसी और देश में हैं और यह बात आपको बिलकुल चौंका देगी कि यहां पर भारतीय पुरुषों का आना वर्जित है। एवं अगर कोई गलती से पहुंच भी जाता है तो उसे यहां ठहरने के लिए कोई जगह नहीं मिलेगी।

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इस जगह पर पुरुषो का वर्जित करने का कारण छेड़छाड़ बताया गया है।भारतीय पुरुष इजराइली महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं जो कि उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आता बस इसी कारण से भारतीय पर्यटक यहां वर्जित है।

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यहां के रेस्तरां में सारे मैन्यू हिब्रू भाषा में है, नमस्कार की जगह आपको 'शलोम' सुनाई पड़ेगा और यूं ही घूमते-फिरते कई इजराइलियों से आपका सामना होगा। इसीलिए इस इलाक़े को मिनी इसराइल कहते हैं। यहां शाम की बयार में लहराते दिखते हैं तिब्बती या 'स्टार ऑफ़ डेविड' वाले इसराइली झंडे।

आखिर इजरायलियों ने सोलन ही क्यों चुना?

बताया जाता है कि, इस जगह इजरायली पर्यटक पिछले 20 सालों से आ रहें है।इतना ही नहीं यह गांव उन्ही की खोज है।दरअसल पहले विदेशी पर्यटक शिमला,मनाली जाना पसंद करते थे, लेकिन घरेलू पर्यटकों की भीड़ के चलते विदेशी पर्यटकों ने सुकून के पल और एकांत की तलाश में सोलन और कसोल की ओर आने लगे।

खुद के बनाया गेस्ट हाउस

बताया जाता है कि पहली बार इसराइली जब यहां आए थे तब उन्होंने यहां पर गेस्ट हाउस लिए कैफ़े बनाएं और अपने व्यवसाय शुरू किए लोगों को यह एहसास दिलाया कि उनके लिए व्यवसाय पैदा होगा लेकिन हुआ इसके विपरीत।यहां आप इसराइली झंडे को देख सकते हैं।

बोली जाती है इजरायली भाषा

इजरायली पर्यटकों क हिंदी कम समझ में आती है, इसलिए इस गांव के कैफ़े और गेस्ट हाउस में हिब्रू भाषा बोली जाती है। यहां के लोकल लोग भी इसराइली कैफ़े में नहीं जाते हैं। यहां पर आकर इसराइली नहीं बदले जबकि गांव उनके लिए बदल गया। यहां पर ज्यादातर हमसा और पीटा ब्रेड चलती है जो कि यहूदियों को बहुत पसंद है।

मनमोहक कसोल

मनमोहक कसोल पार्वती नदी के किनार खड़े देवदार और चीड़ के पेड़ से कसोल को और भी खूबसूरत बनाते हैं।अगर आप भी हिमालय की तलहटी में बसे कसोल को देखना चाहतें है तो फ़ौरन ट्रिप प्लान कर डालिए।
 PC:Alok Kumar

कसोल में घूमने की जगह

कसोल ट्रेकिंग लवर्स के लिए बेहद खास है। यहां ट्रेकिंग के लिए खीर गंगा ट्रेक, मलाना, द ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क ट्रेक आदि है जो कसोल के पास से गुजरते हैं।

कहां है कसोल

कसोल कुल्लू से महज 40 किलो-मीटर की दूरी पर बसा हुआ है। कसौल गांव भुंतर-मणिकर्ण के रूट का बीच मे आता है। PC: Suresh Karia

English summary

Indian Men Not Allowed inPakistan-India Borders

Kasol is also called mini Israel. It is situated on the bank of Parbati river in the Parbati valley.
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