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ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

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Updated: Thursday, September 29, 2016, 13:39 [IST]
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भारत को दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा। हर राज्य के छोटे- छोटे क्षेत्रों में थोड़ी-थोड़ी दूर पर या फिर यूँ कहें कि हर 5 आदमी पर एक मंदिर स्थापित हैं ही। खैर ये तो रही व्यंग्य की बात, जो मूलतः कहीं न कहीं भारत की धार्मिक विश्वास से जुड़ी सच्चाई से वाकिफ कराती है। हर मंदिरों को किसी न किसी कहानी व आश्चर्य से भी खूब अच्छी तरह जोड़ा गया है।

इन्हीं धार्मिक स्थलों व असामान्य मंदिरों में से एक है, उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थापित रुद्रनाथ का मंदिर। रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव जी को समर्पित धार्मिक स्थल है, जो पंचकेदारों में से एक केदार कहलाता है। समुद्रतल से 3600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रनाथ मंदिर भव्य प्राकृतिक छटा से परिपूर्ण है। इस मंदिर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि, इस मंदिर में भगवान शिव जी के एकानन, यानि कि मुख की पूजा होती है। इनके अन्य, बाकि बचे सम्पूर्ण शरीर की पूजा भारत के पड़ोसी देश नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में की जाती है।

ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

रुद्रनाथ मंदिर
Image Courtesy:
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आपने भारत के कई ऐसे मंदिरों के दर्शन किये होंगे, जो भगवान शिव जी को समर्पित हैं, और वहां उनके लिंग की पूजा की जाती है। पर केवल उनके मुख की पूजा, शायद ही कहीं की जाती है और मंदिर से जुड़ा यही अद्वितीय तथ्य इस मंदिर को सबसे अलग और रोचक बनाता है। यहाँ पूजे जाने वाले शिव जी के मुख को 'नीलकंठ महादेव' कहते हैं।

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रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा

रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा गोपेश्वर से शुरू होती है। उत्तराखंड के हिल स्टेशनों में एक गोपेश्वर, ऐतिहासिक मंदिर गोपीनाथ मंदिर के लिए लोकप्रिय है। इस मंदिर का ऐतिहासिक लौह त्रिशूल भी आकर्षण का केंद्र है। रुद्रनाथ की यात्रा के दौरान भक्तगण व यात्री इस गोपीनाथ मंदिर व लौह त्रिशूल के दर्शन करना नहीं भूलते।गोपेश्वर से फिर सगर गाँव तक की यात्रा की जाती है, जो रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा का बस द्वारा अंतिम पड़ाव है। इसके बाद शुरू होती है इस मंदिर तक के लिए अकल्पनीय चढ़ाई। सगर से लगभग 4 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद प्रारम्भ होती है, उत्तराखंड के सुन्दर बुग्यालों की यात्रा, जो पुंग बुग्याल से प्रारम्भ होती है।

ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

रुद्रनाथ
Image Courtesy: Cvashisth

बुग्यालों व चढ़ाइयों को पार करके पहुँचते हैं पित्रधार नामक स्थान जहाँ शिव, पार्वती और नारायण मंदिर हैं। यहां पर यात्री अपने पितरों के नाम के पत्थर रखते हैं। रुद्रनाथ की चढ़ाई पित्रधार में खत्म हो जाती है और यहां से हल्की उतराई शुरू हो जाती है। रास्ते में तरह-तरह के फूलों की खुशबू यात्री को मदहोश करती रहती है जो फूलों की घाटी सा आभास देती है।

पित्रधार होते हुए लगभग 10-11 किलोमीटर बाद पहुंचते हैं आप अपने गन्तव्य, पंचकेदारों में तीसरे केदार, रुद्रनाथ मंदिर में। यहां विशाल प्राकृतिक गुफा में बने मंदिर में शिव की दुर्लभ पाषाण मूर्ति है, जहाँ शिवजी गर्दन टेढ़े किये हुए विराजमान हैं। माना जाता है कि, शिवजी की यह दुर्लभ मूर्ति स्वयंभू है, यानी अपने आप प्रकट हुई है और अब तक इसकी गहराई का पता नहीं लग पाया है। [केदारनाथ यात्रा!]

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ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

रुद्रनाथ मंदिर
Image Courtesy: 
Cvashisth

मंदिर के पास वैतरणी कुंड में शक्ति के रूप में पूजी जाने वाली शेषशायी विष्णु जी की मूर्ति भी है। मंदिर के एक ओर पांच पांडव, कुंती, द्रौपदी के साथ ही छोटे-छोटे मंदिर मौजूद हैं। मंदिर में प्रवेश करने से पहले नारद कुंड है, जिसमें यात्री स्नान करके अपनी थकान मिटाते हैं और उसी के बाद मंदिर के दर्शन करने पहुँचते हैं।

रुद्रनाथ का समूचा परिवेश इतना अलौकिक है कि, यहां के सौन्दर्य को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है। इसके चारों ओर शायद ही ऐसी कोई जगह हो जहां हरियाली न हो, फूल न खिले हों। रास्ते में हिमालयी मोर, मोनाल से लेकर थार, थुनार व मृग जैसे जंगली जानवरों के दर्शन तो होते ही हैं, बिना पूंछ वाले शाकाहारी चूहे भी आपको रास्ते में फुदकते मिल जाएंगे। भोज पत्र के वृक्षों के अलावा, ब्रह्मकमल भी यहां की घाटियों में बहुतायत में मिलते हैं।

ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

मंदिर के पास अठखेलियां करती, मोनाल(हिमालयी मोनाल)
Image Courtesy: Balajisaha

रुद्रनाथ के कपाट, परंपरा के अनुसार खुलते-बंद होते हैं। ठण्ड के मौसम में छह माह के लिए रुद्रनाथ(नीलकंठ महादेव) की गद्दी गोपेश्वर, यहाँ की यात्रा के पहले पड़ाव, के गोपीनाथ मंदिर में लाई जाती है, जहां पर ठण्ड के मौसम के दौरान नीलकंठ महादेव जी की पूजा होती है।

यहाँ पहुंचें कैसे?

देश के किसी भी मार्ग द्वारा चाहे वह रेल मार्ग हो या हवाई मार्ग या सड़क मार्ग, सबसे पहले इन मार्गों द्वारा आपको ऋषिकेश पहुंचना होगा। ऋषिकेश से आपको चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर का रुख करना होगा जो ऋषिकेश से करीब 212 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऋषिकेश से गोपेश्वर पहुंचने के लिए आपको बस या टैक्सी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। एक रात गोपेश्वर में रुकने के बाद अगले दिन आप अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं।

ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

रुद्रनाथ का मनोरम दृश्य
Image Courtesy: Cvashisth

रुद्रनाथ की यात्रा का सही समय

मई के महीने में ही यहाँ की यात्रा शुरू हो जाती है, जब रुद्रनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं। लेकिन यहाँ जाने का सबसे सही समय होगा अगस्त से सितंबर के महीने, जब यहां खिले फूलों से लबालब घाटियां लोगों का मन मोह लेती हैं। ये महीने ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए सबसे सही समय है।

ऋषिकेश कैसे पहुँचें?

नोट: यूं तो मंदिर समिति के पुजारी यात्रियों की हर संभव मदद की कोशिश करते हैं। लेकिन यहां खाने-पीने और रहने की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती है, जैसे कि रात में रुकने के लिए टेंट हो और खाने के लिए भोजन या अन्य चीजें। तो यहाँ की यात्रा आरम्भ करने से पहले आप इन सारी चीजों का ध्यान रखना न भूलें। अगर आप यहाँ पहली बार जा रहे हैं तो अपने साथ गाइड ज़रूर रखें क्योंकि मार्ग पर यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए कोई साइन बोर्ड या चिह्न नहीं हैं।

रुद्रनाथ मंदिर की यात्रा के दौरान बुग्याल का खूबसूरत नज़ारा
Image Courtesy: Himanshu Dutt

तो अब भी आप सोच क्या रहे हैं, सितम्बर का महीना अभी चल ही रहा है, निकल पड़िये इस मनोरम यात्रा पर। यकीन मानिए, आप जिस हद तक प्रकृति की खूबसूरती का अंदाजा लगा सकते है, यह जगह उससे कई ज़्यादा ख़ूबसूरत है।

अपने महत्वपूर्ण सुझाव व अनुभव नीचे व्यक्त करें।

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English summary

Rudranath Temple in Uttarakhand! ऐसा मंदिर जहाँ केवल भगवान शिव जी के मुख की पूजा होती है व उनके बाकि शरीर की, पड़ोसी देश नेपाल में!

Rudranath is a Hindu temple dedicated to god Shiva, located in the Chamoli district in Uttarakhand at 3,600 metres above sea level, this natural rock temple is situated within a dense forest.
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