अल्छी गाव में स्थित अल्छी मठ, लद्दाख का सबसे पुराना मठ है। सिंधु नदी के किनारे स्थित इस मठ को अल्छी चोसखेर तथा अल्छी गोम्पा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बौद्धिक ग्रंथों का संस्कृत से तिब्बती में अनुवाद करने वाले रिनचेन ज़ैंगपो ने इस मठ को 958 और...
सुम-त्ज़ेक मंदिर अल्छी मठ का ही एक भाग है जो अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। ’सुम-त्ज़ेक’ का शाब्दिक अर्थ है- ’तीन मंजि़ला भवन’। यह इमारत तिब्बती वास्तुकला शैली में बनी है जिसके निर्माण के लिए प्राकृतिक पत्थर और चिकनी बलुई मिट्टी का...
अल्छी में लोत्स्वा ला-खंग के पास स्थित मंजुश्री मंदिर, जंपे ला-खंग के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर का इतिहास 12वीं शताब्दी से संबंधित है। वर्गाकार में बने इस मंदिर में मंजुरी-एक ’बौद्धिस्त्व’ अथवा उत्कृष्ट ज्ञान से संबंधित प्रबुद्ध व्यक्ति की चार...
लोत्स्वा ला-खंग, अल्छी में स्थित एक बौद्ध मंदिर है जो बौद्ध ग्रंथों के संस्कृत से तिब्बती में अनुवादक, रिनचेन ज़ैंगपो को समर्पित है। साक्या वंश के साधु, साक्यामुनि की मूर्ति इस मंदिर में रखी गई है। ड्रूपी जैसे कानों वाले रिनचेन ज़ैंगपो की मूर्ति दायीं ओर देखी जा...
डू-खंग अथवा सभागार, अल्छी मठ के बीच में स्थित है। मठ में बना यह स्थान सबसे पुराना है जहाँ साधुओं द्वारा अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 12वीं तथा 13वीं शताब्दी में यहाँ अनेक बदलाव किए गए। मंदिर के गलियारों में भगवान बुद्ध के लगभग 1000 भित्तिचित्र बनाए गए...