अल्छी गाव में स्थित अल्छी मठ, लद्दाख का सबसे पुराना मठ है। सिंधु नदी के किनारे स्थित इस मठ को अल्छी चोसखेर तथा अल्छी गोम्पा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बौद्धिक ग्रंथों का संस्कृत से तिब्बती में अनुवाद करने वाले रिनचेन ज़ैंगपो ने इस मठ को 958 और 1055 के बीच बनवाया था। इस मठ की विशेषता यह है कि यह समतल ज़मीन पर बना हुआ है।
इस मठ के भवन में तीन मंदिर हैं- डू-खंग, सुम-त्ज़ेक तथा मंजुश्री मंदिर। इनका इतिहास 12वीं तथा 13वीं शताब्दी का है। इस मठ में स्थित दो अन्य मंदिर हैं- लोत्स्वा ला-खंग अथवा अनुवादक का मंदिर तथा ला-खंग सोमा मंदिर। मठ के प्रवेशद्वार पर बने चोरतेन अथवा स्तूप भी यहा की विशेष संरचनाएँ हैं। फिलहाल लिकिर मठ के साधु इस गोम्पा की देखरेख करते हैं।
यहाँ फोटो खींचना मना है तथा बिजली की व्यवस्था न होने के कारण पर्यटकों को टार्च आदि साथ लाने की आवश्यकता होती है।



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