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बिहार पर्यटन– नालंदा के अवशेषों से होकर जाने वाली एक यात्रा

जनसंख्या की दृष्टि से बिहार भारत का दूसरा बड़ा राज्य है और भौगोलिक दृष्टि से बारहवां बड़ा राज्य है। बिहार राज्य का यह नाम ‘विहारा’ से लिया गया है जिसका अर्थ होता है ‘मठ’ । बिहार, हिंदुओं, जैन और विशेषतः बौद्ध धर्म के लोगों के लिए धार्मिक केंद्र हुआ करता था। वह बोधगया ही था जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।

भगवान महावीर, जो एक महान धर्म, जैन धर्म के प्रतिस्थापक थे, वे भी यहीं पैदा हुए थे और उन्हें निर्वाण भी यहीं प्राप्त हुआ था। बिहार राज्य, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल का उत्तरी भाग और दक्षिण में झारखंड की सीमाओं से लगा हुआ है। 

बिहार और उसके आसपास के पर्यटन

बिहार पर्यटन- झील, झरने और हॉट स्प्रिंग्स के रूप में प्राकृतिक सुंदरता के क्षेत्र प्रदान करता है। प्राचीनकाल के क्लासिक भारत में प्राचीन बिहार ताकत, शिक्षा और संस्कृति का केंद्र था। बिहार की राजधानी पटना के पास नालंदा और विक्रमशिला शिक्षा के केंद्र थे, जो कि क्रमशः 5 वीं और 8 वीं शताब्दी में स्थापित किये गए थे, और उस समय के सबसे पुराने माने जाने वाले वास्तविक अंतर्राष्ट्रीय विश्विद्यालयों में गिने जाते हैं।

बिहार हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख और इस्लाम जैसे विभिन्न धर्मों के सबसे पवित्र स्थान में से एक है। एक बौद्ध मंदिर और यूनेस्को का विश्व विरासत स्थल ‘महाबोधि मंदिर’, भी बिहार में स्थित है। 1980 के दशक में महात्मा गांधी सेतु पटना, पूरे विश्व में किसी नदी पर बनाया गया सबसे लंबा पुल माना जाता था। पटना और राजगीर शहर बिहार के दो ऐतिहासिक शहरों के रूप में जाने जाते हैं।

बिहार का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत

हिन्दू,जैन और मुख्यतः बौध धर्म के लिए बिहार एक बड़ा धार्मिक स्थल था। बोधगया में भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। पास ही स्थित नालंदा 5 वीं ई. में विश्व का प्रसिद्ध बौद्ध विश्वविद्यालय था, जबकि राजगीर बुद्ध और जैन पथप्रदर्शक महावीर, दोनों से जुड़ा हुआ था। यहाँ ऐसा माना जाता था कि एक और बड़े धर्म के, ‘जैन धर्म’ के प्रतिस्थापक भगवान ‘महावीर’ का जन्म यहीं हुआ और उन्हें निर्वाण भी यहीं प्राप्त हुआ था।

यदि कोइ व्यक्ति बौद्ध धर्म का अध्ययन करना चाहता है तो ‘बोधगया’ की यात्रा उसके लिए सबसे अच्छी साबित हो सकती है। सासाराम और विशेष रूप से नालंदा, सबसे आकर्षक पर्यटक स्थलों में से एक हैं जो सामान्य पर्यटकों को दूर से लुभाते हैं। बिहार कई वर्षों से संस्कृति और शिक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है।  गुप्ता साम्राज्य जो 240 ई. में मगध से उत्पन्न हुआ था, विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान, वाणिज्य, धर्म और भारतीय दर्शन के क्षेत्र में, भारत के सुनहरे युग के रूप में जाना जाता है। 

विक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत में शिक्षा के सबसे पुराने और सबसे अच्छे केंद्रों में से एक थे। कुछ लेखक मानते हैं कि 400 ई. और 1,000 ई. के बीच की अवधि में बौद्ध धर्म को बढ़ाने के लिए हिंदू धर्म ने बहुत सहारा दिया। ब्रम्हविहार के निर्माण के लिए हिन्दू राजाओं ने बौद्ध भिक्षुओं को बहुत से अनुदान दिए।

बिहार के व्यंजन, मेले और त्यौहार

बिहार में व्यंजनों की विविधता बिहार पर्यटन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बिहार का भोजन मुख्य रूप से शाकाहारी है क्योंकि पारंपरिक बिहारी समाज बौद्ध और हिन्दू धर्म के अहिंसा के मूल्यों से प्रभावित हैं वे अंडे, चिकन, मछली और अन्य पशु उत्पाद नहीं खाते। बिहार के लोग मुख्यरूप से शाकाहारी हैं। चिकन और मटन के साथ कई बिहारी मांसाहारी व्यंजन भी यहाँ आम हैं।

कुछ व्यंजन जिनके लिए बिहार प्रसिद्ध है- सत्तू पराठा, इसमें भूने हुए चने के आटे को पराठे के अन्दर भरा जाता है और चोखा मैश किए हुए आलू का मसालेदार व्यंजन है। 

छठ, बिहार का एक प्राचीन और महत्वपूर्ण त्यौहार है, यह वर्ष में दो बार मनाया जाता है: एक बार गर्मियों में, जिसे छठी का छठ कहा जाता है, और एक बार दीपावली के बाद के एक सप्ताह के आसपास, जिसे कार्तिक छठ कहा जाता है। छठ में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है। इसमें एक बार शाम को और एक बार पौ फटने पर (सूर्योदय के समय) बहती हुई नदी के किनारे या किसी भी बड़े जलाशय पर, दो बार पूजा की जाती है।

छठ के अलावा भारत के सभी प्रमुख त्योहार जैसे मकर संक्रांति, सरस्वती पूजा और होली पूरी भव्यता के साथ बिहार में मनाए जाते हैं। सोनीपुर पशु मेला एक महीने चलने वाला समारोह है जो दीवाली के लगभग आधा महीने के बाद शुरू होता है। यह एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है। यह सोनीपुर की गंडक नदी के किनारे आयोजित किया जाता है।

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