दमन और दीव पर्यटन – प्रकृति का सानिध्य

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अगर आप ऐसे स्थानों पर छुट्टियों के लिये जाना चाहते हैं जहाँ आपको प्राकृतिक सुन्दरता और शान्ति मिल सके तो भारत के दो केन्द्र शासित प्रदेश आपके लिये सबसे बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ये जिले भारत की स्वतन्त्रता से पूर्व 450 से अधिक वर्षों के लिये पुर्तगाली क्षेत्र रहे थे और 19 दिसम्बर 1961 को गोवा के साथ भारतीय गणराज्य के क्षेत्र घोषित किये गये।

इतिहास के अनुसार प्राचीन काल में दमन और दीव कई युद्धों के साक्षी रहे हैं। अंग्रेजी, हिन्दी, गुजराती, पुर्तगाली और मराठी इन दोनों जिलों में बोली जाने वाली प्रमुख भाषायें हैं।

दमन पर्यटन – एक संक्षिप्त इतिहास

दमन जिला दमन गंगा नदी के मुहाने पर स्थित है। अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के कारण यह विशेष जिला दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस क्षेत्र में विभिन्न जातियाँ और संस्कृतियाँ सामन्जस्य के साथ रहती हैं। दमन जिला विशेष रूप से अपने पुर्तगाली उपनिवेशी वास्तुकला, आकर्षक समुद्रतटों और गिरिजाघरों के लिये जाना जाता है। यह आनन्दित क्षेत्र पहले कालना पवरी या कीचड़ के कमल के रूप में जाना जाता था। एक और रोचक तथ्य यह है कि दमनगंगा नदी दमन जिले को नानी दमन और मोती दमन नामक दो छोटे शहरों में बाँट देती है।

दमन – सांस्कृतिक विविधता

दमन पर्यटन का सांस्कृतिक स्वरूप जनजातीय, शहरी, यूरोपीय और भारतीय परम्पराओं को मिश्रण है। इस जिले की बहुत ही समृद्ध विरासत है। यहाँ के निवासी नृत्य और संगीत को विशेष महत्व देते हैं। इस जगह की शान्त सुन्दरता के साथ-साथ आप दमन के समुद्रतटों पर गुनगुनी धूप का आनन्द भी ले सकते हैं।

सुन्दर दृश्यों के अलावा पर्यटक दमन के विभिन्न प्रकार के लज़ीज समुद्री पकवानों का भी आनन्द ले सकते हैं।पूरे वर्ष भर सुहावना मौसम रहने के कारण पर्यटकों के लिये वर्ष के किसी समय आने के लिये दमन एकदम सटीक स्थान है। तापमान न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस से अधिकतम 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। गर्मियों के दौरान भी दमन में ठंडी हवायें चलती हैं। दमन की यात्रा के लिये सर्वश्रेष्ठ समय सितम्बर की शुरुआत से मई के अन्त के बीच का समय है।

दमन और इसके आसपास के पर्यटक स्थल

दमन पर्यटन के रोचक स्थानों में जैमपोर समुद्रतट, देवका समद्रतट, बॉम ज़ीसस गिरिजाघर, वैभव वॉटर वर्ल्ड और सेन्ट जेरोम का किला आदि प्रमुख हैं।

दीव पर्यटन – इतिहास की झलक

अपने रोचक इतिहास और शान्तिपूर्ण वातावारण के साथ दीव जिला अरब सागर से घिरे गुजरात के सौराष्ट्र (काठियावाड़) प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है। दमन की भाँति ही दीव भी 1961 तक पुर्तगाली उपनिवेश था। उससे पहले दीव पर प्रागैतिहासिक एवं मध्ययुगीन शासकों को शासन था। एक पतला चैनल तट और दीव द्वीप को अलग करता है। यह केन्द्रशासित क्षेत्र भारत देश के कम जनगणना वाले जिलों में नवें स्थान पर है।दीव का मौसम

ठंडी हवा वाले मौसम के कारण दीव पर्यटकों के लिये शान्त एवं आरामदायक स्थान है। चूँकि दीव का मौसम पूरे वर्ष भर खुले आसमान के साथ सुहावना रहता है इसलिये पर्यटक यहाँ अपनी सहूलियत के अनुसार कभी भी आ सकते हैं। दीव के समुद्रतटों के सुखद अनुभवों के कारण पर्यटक यहाँ अक्सर आते रहते हैं।

दीव – समृद्ध संस्कृति

दीव पर्यटन समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उदाहरण है जहाँ काठियावाड़ या सौराष्ट्र की परम्परा और पुर्तगाली संस्कृति का मिश्रण देखने को मिलता है। इस जिले के वास्तुकला में भी पुर्तगाली प्रभाव देखने को मिलता हैं। इस जिले के धार्मिक अनुयायियों में हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई प्रमुख हैं। दीव अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर, वड़ोदरा जैसे प्रमुख शहरों से सड़क द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है जिससे पर्यटक आसानी से इस स्थान तक पहुँच सकते हैं।

दीव और इसके आस-पास के पर्यटक स्थल

पर्यटक यहाँ आने पर दीव के सुप्रसिद्ध पर्यटक आकर्षणों को अवश्य देखें जिनमें नागोवा समुद्रतट, घोघला समुद्रतट, जालन्धर समुद्रतट, गंगेश्वर मन्दिर, सेंट पॉल गिरिजाघर, सीपी संग्रहालय और दीव का किला आदि प्रमुख हैं।नयनाभिरामी वास्तुकला, शान्त एवं सुन्दर वातावारण, समुद्रतट और सटीक मौसम के साथ हरियाली, दमन और दीव को पर्यटकों के लिये एक आदर्श स्थान बनाते हैं।

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