हयाग्रिवा माधव मंदिर केवल हाजो का ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां अधिक संख्या में श्रद्धालू दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि हयाग्रिवा माधव मंदिर में स्थापित भगवान की प्रतिमा पुरी में स्थापित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा जैसी दिखती है।
यह भी माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवान बुद्ध को निर्वाण प्राप्त हुआ। अतः हर साल हिंदू श्रद्धालुओं के साथ-साथ बौद्ध श्रद्धालू भी हयाग्रिवा माधव मंदिर के दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर का प्रमुख आकर्षण मार्च के महीने में मनाया जाने वाला होली का त्यौहार है। इस मंदिर में होली के त्यौहार पर भक्तों और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती है। बिहू और जन्माष्टमी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने वाले अन्य त्यौहार हैं।
यह कहना मुश्किल है कि इस मंदिर का निर्माण किस वर्ष में किया गया, लेकिन प्रमाणों से यह पता चलता है कि मुसलमानों द्वारा पुरानी इमारत को खंड़ित करने के बाद 1543 में कोच राजवंश के राजा रघुदेव ने इसे पुनः निर्मित किया।



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