किसी समय में नंदापुर जयपुर की राजधानी था। सेमिलिगुडा से लगभग 14 किमी. की दूरी पर तथा पतंगी से 50 किमी. की दूरी पर स्थित यह स्थान ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। खुदाई के दौरान इस स्थान से कुछ प्राचीन वस्तुएं मिली जो जैन धर्म और शक संस्कृति की उपस्थिति दर्शाती है।
नंदापुर को इसकी प्रसिद्धि 32 सीढ़ियों वाले सिंहासन से मिली है जिसे “बतरिसा सिंहासन” भी कहा जाता है तथा ऐसा विश्वास है कि इसका निर्माण महान विक्रमादित्य ने किया था। इस गाँव में कुछ छोटी धाराएं भी है। गाँव के उत्तरी छोर पर दो बड़े शिलाखंड पत्थर हैं।
इनमें से एक पर सुंदर शिलालेख हैं तथा दूसरे पर उकेरकर हाथी बनाया गया है। इसी दिशा में कुछ दूरी पर भगवान सर्वेश्वर का मंदिर है जिसमें भी कुछ शिलालेख हैं। इन मूर्तियों और शिलालेखों को देखकर कोई भी व्यक्ति इस गाँव के समृद्ध भूतकाल को देख सकता है।



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