खीर भवानी मंदिर, कश्मीर

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खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं, जो यहां की सुंदरता को बढाते हैं। इस मंदिर का नाम इस प्रकार पड़ा कि यहां प्रसाद के रूप में भक्तों द्वारा केवल एक भारतीय मिठाई खीर और दूध ही चढ़ाया जाता है। वास्तविक रूप से 1912 में महाराजा प्रताप सिंह द्वारा हिंदू देवी राग्न्य के सम्मान में बनवाए गए इस मंदिर का पुनर्निर्माण महाराजा हरि सिंग ने किया।

इस मंदिर में एक षट्कोणीय झरना है जो देवी का प्रतीत है। किवदंती है कि हिंदुओं के देवता राम ने अपने निर्वासन में इस मंदिर का इस्तेमाल पूजा की जगह के रूप में किया था। निर्वासन की अवधि समाप्त होने के बाद हिंदू भगवान हनुमान को देवी की मूर्ति को शादिपोरा स्थानान्तरित करने के लिए कहा गया, जहां यह अब भी स्थित है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि खीर, जो सामान्य रूप से सफेद रंग की होती है उसका रंग काला हो जाता है जो अप्रत्याशित विपत्ति का संकेत होता है। मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त यहां एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी पानी का रंग बदलती है। ज्येष्ठ अष्टम और शुक्ल पक्ष अष्टमी इस मंदिर में मनाये जाने वाले कुछ प्रमुख त्यौहार हैं।

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