खम्माम किले का निर्माण 950 ईस्वी में हुआ था, जब यह क्षेत्र काकतीय राजाओं के नियंत्रण में था। हालांकि, यह किला उनके काल में पूरा ना हो सका और फिर मुसुनूरी नायक और विलामा राजाओं ने इस किले के निर्माण को पूरा करने का बीड़ा उठाया।
1531 में, कुतुब शाही के शासन काल दौरान इस किले को और विकसित किया गया तथा इस किले में नए भवन एवं कमरे जोड़े गए। यह किला दोनों हिंदू और मुस्लिम वास्तुकलाओं का एक अच्छा उदाहरण है और यह दोनों शैलियों को प्रभावित करता है क्योंकि इस किले के निर्माण कार्य में दोनों धर्मों के शासक शामिल थे।
आज, यह किला अपने अस्तित्व के 1000 से भी अधिक वर्ष पूरे होने के बाद बड़े गर्व से खड़ा है। यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और खम्माम एवं आंध्र प्रदेश के इतिहास में एक गौरव का स्थान रखता है। राज्य सरकार ने पर्यटन की दृष्टि से इस किले को विकसित करने के लिए कई प्रयास तथा धन खर्च किया है।



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