कुक्के सुब्रमण्य - जहाँ नाग देवता निवास करते हैं   कुक्के सुब्रमण्य मंदिर सुलिया में मैंगलौर के पास, कर्नाटक में स्थित है। यह मंदिर अद्वितीय है क्यों कि भगवान सुब्रामय यहाँ साँपों के स्वामी के रूप में पूजे जाते हैं। यह मंदिर एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है और मंदिर से जुड़ी कथा भी इस जगह तक कई पर्यटकों को आकर्षित करती है।   प्राचीन विद्या पर एक नज़र   प्राचीन विद्या के अनुसार, मंदिर उस बनाया गया है जहाँ साँप के राजा वासुकी ने भगवान शिव से गरुड़ के क्रोध से साँप की रक्षा करने कि प्रार्थना की थी। भगवान शिव तपस्या से प्रसन्न होकर, सुब्रमन्या को सापों की रक्षा करने के लिए भेजा और तब से वह सापों के रक्षक के रूप में पूजे जाते है।   मंदिर के रोचक पहलुओं में से एक गरुडा टॉवर है। यह चांदी का मीनार वासुकी के सांस के जहरीले धुवों से भक्तों की रक्षा करने के लिए बनाया गया है। यह माना जाता है कि वासुकी मंदिर के अंदर रहता है। अश्लेषा बाली और सर्प संस्कार यह दो महत्वपूर्ण पूजा मंदिर में आयोजित किये जाते हैं। कैसे जाएं कुक्के सुब्रमण्य कुक्के सुब्रमण्य मंदिर हवा, सड़क और रेल के द्वारा पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा मंगलौर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मंदिर के परिसर से 7 किमी के दूरी पर है। बहुत सारे राज्य परिवहन बसें बंगलौर और मंगलौर से कुक्के सुब्रमण्य मंदिर को जोड़ते हैं। कुक्के सुब्रमण्य जाने का सबसे अच्छा समय सितम्बर से मार्च कुक्के सुब्रमण्य जाने का सबसे अच्छा समय है।   

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