सिंकदर बाग, एक गार्डन के रूप में जाना जाता है और इस गार्डन परिसर में एक विला भी है। इसे नवाब वाजिद अली शाह ने बनवाया था, जो अवध के आखिरी नवाब थे। उन्होने सिकंदर बाग को गर्मियों के निवास स्थान के रूप में बनवाया था। यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होने यह नाम सिंकदर महान के नाम रखा या अपनी बेगम सिंकदर महल बेगम के नाम पर रखा।
नवाब वाजिद अली शाह एक रंगीन मिज़ाज व्यक्ति थे। इसलिए उन्होने इस परिसर में मध्य में एक मंडप का निर्माण करवाया था जहां वह बैठकर रास लीला, कत्थक नृत्य, संगीत संध्या और मुशायरे व अन्य सांस्कृतिक और कलात्मक सुनना पसंद करते थे।
इस बाग को 1857 में आजादी की पहली लड़ाई में ब्रिटिश सेना के खिलाफ एक गढ़ में तब्दील कर दिया गया था। इस बाग में उस दौरान लखनऊ की घेराबंदी होने के कारण 2,200 सैनिकों को ठहराया गया था। कई लोग, ब्रिटिश सेना के द्वारा मारे गए थे जिसका नेतृत्व कमांडर - इन - चीफ सर कोलीन कैम्पवेल कर रहे थे। अतीत में, सिंकदर बाग भारत के राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान के लिए एक घर है।



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