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माजुली  - सांस्कृतिक धरोहरों से सजा विहंगम द्वीप

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इतिहास और संस्कृति को अपने दामन में समेटे हुए माजुली एक अध्यात्मिक जगह है। साथ ही यह असम का सबसे बड़ा आकर्षण भी है। माजुली न सिर्फ नदी से बना विश्व का सबसे बड़ा द्वीप है, बल्कि यह असम में नए वैष्णव धर्म का केन्द्र भी है। माजुली पर्यटन थोड़ा छोटा हो सकता है, पर यह बेहद जीवंत है। एक ओर जहां ब्रह्मपुत्र नदी इसकी प्राकृतिक सुंदरता में बढ़ोत्तरी करती है, वहीं दूसरी ओर सतरा इसे सांस्कृतिक पहचान दिलाता है।

माजुली और आसपास के पर्यटन स्थल

माजुली दुनिया का सबसे बड़ा नदी का द्वीप होने के लिए जाना जाता है। पहले यह द्वीप 1250 वर्ग किमी में फैला हुआ था। हालांकि मिट्टी के कटाव के कारण अब यह सिर्फ 421.65 वर्ग किमी तक सिमट कर रह गया है। माजुली जोरहट से सिर्फ 20 किमी दूर है और नाव के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

माजुली में हमेशा बाढ़ आते रहते हैं और पारिस्थितिक तंत्र भी बिगड़ता रहता है। बावजूद इसके यहां जीवन उमंगों से भरा हुआ है। आज हम माजुली को जिस रूप में देख रहे हैं, वह यहां के धर्म और संस्कृति के कारण ही संभव हो पाया है। यहां की सामाजिक सांस्कृतिक संस्था सतरा इस द्वीप की जीवनरेखा है। इस द्वीप पर कम से कम 25 सतरें हैं, जो मठ और धरोहर की तरह काम करते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों की इनमें खास दिलचस्पी होती है।

ऐसा माना जाता है कि ये सतरें नए वैष्णव धर्म संस्कृति का गढ़ है, जिसे सबसे पहले असमिया संत श्रीमंत शंकरदेव ने बढ़ावा दिया था और फिर बाद में उनके अनुयायी माधवदेव ने इसे आगे बढ़ाया। ऐसा नहीं है कि यहां सिर्फ वैष्णव धर्म का ही प्रचार-प्रसार किया जाता है, दरअसल माजुली भारत का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य सत्तरिया का भी गढ़ है।

सतरा सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं है, जहां असम के अग्रणीय धार्मिग गुरु श्रीमंत शंकरदेव के नए वैष्णव धर्म के बारे में शिक्षा दी जाती है। इन सतरों को देखे बिना माजुली की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी। यहां के हर सतरों की अपनी अलग-अलग विशेषताएं हैं और अलग-अलग चीजें सिखाई जाती हैं, जो कि असमिया संस्कृति और परंपराओं के बारे में होती हैं।

अगर कमलाबाड़ी सतरा माजुली का सबसे प्रभावशाली और प्रमुख सतरा है तो वहीं औनियाती सतरा पालनाम और अप्सरा नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। अन्य सतरों में बेंगानाती और शामागुरी सतरा भी महत्वपूर्ण हैं। द्वीप होने के कारण सिर्फ ब्रह्मपुत्र नदी पर नाव के जरिए ही माजुली पहुंचा जा सकता है। नाव की सेवा जोरहट के नीमाती घाट से उपलब्ध रहती है।

माजुली का मौसम

माजुली के मौसम को आप अप्रिय कह सकते हैं। बरसात का समय काफी लंबे समय तक रहता है। यहां गर्मी भी खूब पड़ती है और मौसम में काफी उमस रहती है। हालांकि ठंड का मौसम काफी आरामदायक होता है और माजुली घूमने के लिए काफी अच्छा माना जाता है।

 

माजुली इसलिए है प्रसिद्ध

माजुली मौसम

घूमने का सही मौसम माजुली

  • Jan
  • Feb
  • Mar
  • Apr
  • May
  • Jun
  • July
  • Aug
  • Sep
  • Oct
  • Nov
  • Dec

कैसे पहुंचें माजुली

  • सड़क मार्ग
    चूंकि माजुली एक द्वीप है, इसलिए ब्रह्मपुत्र नदी को पार करके यहां जाया जाता है। सिर्फ नाव के जरिए ही माजुली पहुंचा जा सकता है। वहीं जोरहट देश के बाकी हिस्सों से नेशनल हाइवे 37 के जरिए अच्छे से जुड़ा हुआ है। जोरहट पहुंचने के बाद माजुली के लिए नीमाती घाट से नाव का सहारा लेना पड़ता है।
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  • ट्रेन द्वारा
    माजुली का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भी जोरहट में ही है। रेल मार्ग के जरिए माजुली पहुंचना अपेक्षाकृत आसान है। जोरहट शहर से 17 किमी दूर मारियानी जंक्शन यहां का मुख्य रेलवे स्टेशन है, जहां कई प्रमुख ट्रेनें रुकती हैं। हालांकि आपको इसके बाद नीमाती घाट जाना होगा, जहां से नाव के जरिए माजुरी पहुंचा जा सकता है।
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  • एयर द्वारा
    माजुली का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जोरहट में है। ये असम का चौथा सबसे ज्यादा व्यस्त एयरपोर्ट है और देश के बाकी हिस्सों से गुवाहाटी, दिल्ली और कोलकाता से जुड़ा हुआ है। जोरहट एयरपोर्ट से सबसे पहले आपको नीमाती घाट जाना होगा और फिर वहां से नाव के जरिए माजुली पहुंचना होगा।
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