होसांग मकबरा, भारत की पहली संगमरमर संरचना है और यह अफगान स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है। इस मकबरे की अविश्सनीय गुंबदें और मेहराबें, ताजमहल के लिए प्रेरणा रही थी। इस मकबरे के द्वार पर नीले तामचीनी सितारें और दक्षिण द्वार पर कमल के फूल यहां की संरचना को आकर्षक बनाते है।
अगर ताजमहल, प्रेम और इतिहास का प्रतीक है तो होसांग मकबरा एक ऐसा स्मारक है जहां से ताजमहल को बनाने और उसकी वास्तुकला का आईडिया आया था। होसांग शाह का भारतीय इतिहास में काफी बोलबाला था और इसे मालवा क्षेत्र के पहले इस्लामी राजा होने का दर्जा प्राप्त है।
होसांग को अल्प खान के नाम से जाना जाता था, मालवा का राजा बनने के बाद उन्होने स्वंय का नाम होसांग शाह रख लिया था। होसांग शाह ने मालवा पर 27 साल तक राज्य किया और उन्हे मालवा में उनके द्वारा बनवाई गई उत्कृष्ट कला और वास्तुकला के लिए जाना जाता है। होसांग शाह को मांडू को भारत में सबसे मजबूत और सुरक्षित क्षेत्र बनाने का श्रेय दिया जाता है।



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