बिक्षालय, मंत्रालयम से लगभग 20 किमी दूर स्थित है और स्थानीय भाषा में बिचाली के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थान एक ऐसे स्थान के रूप में जाना जाता है, जहां श्री अप्पनाचार्य ने अपना अधिकांश जीवन व्यतीत किया। श्री अप्पनाचार्य, गुरू राघवेन्द्र के पक्के भक्त होने के साथ-साथ उनके विधार्थी भी थे।
यह भी एक ज्ञात तथ्य है कि गुरू राघवेन्द्र स्वामी 13 साल तक श्री अप्पराचार्य के साथ बिक्षालय में रहे थे। बिक्षालय, तुंगभद्रा नदी के किनारे है और इसलिए प्राकृतिक सुंदरता के मध्य स्थित होने की वजह से यह हरियाली व शांतिपूर्ण वातावरण से युक्त है।
आज बहुत सारे लोग यहां शहर के हलचल भरे जीवन से मुक्त होने के लिए यहां आते हैं। यह स्थान उन्हें ध्यान करने व आत्मसाक्षात्कार करने के लिए शांत एवं शांतिपूर्ण वातावरण प्रदान करता है। बिक्षालय स्थानीय व पर्यटकों के लिए भी उनके परिवार और प्रियजनों के साथ कुछ बेशकीमती पल बिताने के लिए एक पिकनिक स्थल के रूप में लोकप्रिय हो गया है।



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