यात्रियों को जैन मठ जाने की भी सलाह रहती है। लोग इस मठ को चारूकीर्ति भट्टरक स्वामीजी के मठ के नाम से जानते हैं। इस मंदिर के आराध्य देव, भगवान चंद्रांथ, को गर्भगृह में स्थापित किया गया है।
तीन मंजिला जैन मठ की पहली मंजिल सन 1912 की बनी है। यहां पर्यटकों को 19वीं सदी के धातु की परत चढ़े तीन प्रभागों तथा उनमें रखी प्रस्तर मूर्तियां देखने को मिलेंगी। इसके अतिरिक्त,यात्री जैन मठ के भीतर तांबे, पीतल तथा कांसे की बनी नवदेवता बिम्ब तथा याक्षी कुश्मनदिनी देवी की मूर्ति का भी अवलोकन कर सकते हैं।
पर्यटकों को लगभग 400 साल पुरानी खूबसूरत वाल पेंटिंग देखने को मिलेगी। ध्यान से देखने पर, लोग जान सकते हैं कि ये वाल पेंटिंग जैन शासक नागकुमार, पार्श्वनाथ एवं भरत सामवसरन के जीवन को चित्रित करती हैं। जैन मठ में प्रतिदिन पूजा एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।



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