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कहीं जलती हुई सिगरेट, तो कहीं रॉयल इंफील्ड , ये हैं इन मंदिरों के प्रमुख देवता

Posted By: Staff

क्या आप बुलट बाबा को जानते हैं ? या ये कहा जाए कि क्या अब तक आपने बुलट बाबा के बारे में सुना है। आपको बताते चलें कि बुलट बाबा कोई बहुत बड़े और पहुंचे हुए संत नहीं है न ही ये कोई पीर फ़क़ीर हैं। बुलट बाबा "रॉयल इंफील्ड" की एक बुलट है जिसे राजस्थान के स्थानीय निवासियों द्वारा पूजा जाता है। या फिर हम अगर आपसे ये कहें कि कहीं जलती हुई सिगरेट को भी पूजा जाता है तो आपका आश्चर्यचकित होना लाज़मी है। 33 करोड़ देवी देवता होने के बावजूद एक "रॉयल इंफील्ड बुलट" की पूजा, अब इसे आस्था कहा जाए या अंधविश्वास लेकिन बात जो भी हो सुनने में और देखने में ये सब बड़ा रोचक होता है। आप यकीन मानें या ना मानें लेकिन हिंदुस्तान में ऐसे बहुत से मंदिर है जो हमेशा से ही कौतुहल का विषय रहे हैं।

सदियों पुराने हिन्दू धर्म ने प्राचीन काल से ही अपने मानने वालों को कई बेहरतरीन मंदिर दिए हैं। अगर भारत के इतिहास पर एक दृष्टि डाले तो मिलता है कि प्रत्येक राजवंश में यहां शासन करने वाले राजाओं ने यहां कई बेमिसाल मंदिरों का निर्माण कराया है और इन्हीं मंदिरों के कारण ये मंदिर और ये राजा आज भी याद किये जाते हैं। आज भारत में कई मंदिर है कुछ तो ऐसे हैं जो 2000 साल से भी पुराने और अपने में ख़ास हैं।

इन पौराणिक मंदिरों के अलावा, आज भारत में कई ऐसे भी मंदिर हैं जो विचित्र और अद्भुत हैं कहीं मोटर साइकिल मंदिर की आराध्य देवी है तो कहीं चूहें प्रमुख देवता। तो आइये जाने ऐसे ही कुछ विचित्र मंदिरों के बारें में।

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कैप्टन बाबा, लखनऊ

कैप्टन बाबा, लखनऊ

प्रायः हम यही सुनते आ रहे हैं कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है। सिगरेट से कर्क रोग यानी कैंसर होता है। लेकिन अब अगर ये कहा जाए कि भारत में इसी खरतनाक सिगरेट को समर्पित एक मंदिर है तो शायद आपको आश्चर्य हो, मगर ये सच है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अंतर्गत आने वाले मूसाबाग में एक मंदिर है जिसका नाम "कैप्टन बाबा की मजार है" ये मजार एक अंग्रेज सिपाही कैप्टन एफ वेल को समर्पित है यहां मजार को सिगरेट चढ़ाई जाती है ख़ास तौर पर "कैप्टन" ब्रांड की सिगरेट। यहां आने वाले लोगों का मानना है कि अगर आप यहां जलती हुई सिगरेट चढ़ाएंगे तब आपकी मन्नत पूरी होगी।

 बुलट बाबा, जोधपुर

बुलट बाबा, जोधपुर

बुलट बाबा या ओम बनना समाधी राजस्थान के जोधपुर में स्थित है। यहां आने वाले भक्त रॉयल इंफील्ड की एक बुलट की पूजा करते हैं। साथ ही यहां चढ़ावे के तौर पर "बुलट बाबा" को शराब चढ़ाई जाती है। यहां के स्थानीय निवासियों का मानना है कि बुलट बाबा यहां के लोगों की सड़क यात्रा के दौरान हादसों से सुरक्षा करते हैं।

 जलमग्न शिव मंदिर, वाराणसी

जलमग्न शिव मंदिर, वाराणसी

वाराणसी में सिंधिया घाट के नजदीक भगवान शिव को समर्पित ये मंदिर जलमग्न और झुका हुआ है। जब आप इसे देखेंगे तो हमारा दावा है आपको पीसा की झुकी हुई मिनार की याद आ जायगी। ये मन्दिर जलमग्न क्यों हुआ इसके बारे में बताया जाता है कि सन 1830 में जब इस घाट का निर्माण हुआ तो ये मंदिर पानी में चला गया। आज ये मंदिर सुनसान और बंद है।

विश्व का एकमात्र ब्रहमा मंदिर, पुष्कर

विश्व का एकमात्र ब्रहमा मंदिर, पुष्कर

ब्रहमा मंदिर, राजस्थान के पुष्‍कर में पुष्कर झील के किनारे पर स्थित है। ये विश्व का एकमात्र स्थान है जहां भगवान ब्रहमा की पूजा होती है। ये मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया है। मंदिर में राजसी छवि वाले कमल पर विराजमान, ब्रहमा जी की चार मुख वाली मूर्ति स्‍थापित है जिसके बाएं तरफ उनकी युवा पत्‍नी गायत्री और दाएं तरफ सावित्री बैठी हैं।

चाइनीज काली मंदिर, कोलकाता

चाइनीज काली मंदिर, कोलकाता

कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है। इस मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। यहाँ आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई। एक बात और है जो इस मंदिर को खास बनाती है वो ये है कि इस मंदिर के मुख्य पुजारी एक बंगाली ब्राह्मण हैं । यहां आने वाले लोगों को प्रशाद में न्यूडल, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है।

गायब होता वडोदरा का मंदिर

गायब होता वडोदरा का मंदिर

क्या आप यकीन करेंगे कोई कोई मंदिर पहले गायब हो फिर वापस आ जाये। लेकिन ये सच है वडोदरा से 40 मील दूर स्तम्बेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा मंदिर है जो अरब सागर में डूबा हुआ है और केवल तब दिखता है जब लो टाइड हो, साथ ही ये मंदिर तब चला जाता है जब समुन्द्र में हाई टाइड के दौरान लहरें उठी रहती हैं।

यहां होती ही चूहों की पूजा, राजस्थान

यहां होती ही चूहों की पूजा, राजस्थान

करनी माता मंदिर जिसे मूषक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है देशनोक का एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है। देवी करनी माता इस मंदिर की प्रमुख देवी हैं जिनको ये मंदिर समर्पित किया गया है इन्हें मां दुर्गा का अवतार भी माना जाता है। ये मंदिर अपने चूहों के लिए भी जाना जाता है जिन्हें कबस कहा जाता है। ऐसा माना जाता है की इन चूहों में देवी के बच्चों की आत्मा होती हैं जिन्हें चरण कहा जाता है। इन चूहों के प्रति यहाँ के लोगों में गहरी आस्था है। यहाँ के लोगों की ऐसी धारणा है की यदि कोई श्रद्धालु यहाँ सफ़ेद चूहा देख ले तो वो बहुत भाग्यशाली होता है।

शिवालय के आकार का मंदिर, मनाली

शिवालय के आकार का मंदिर, मनाली

मनाली का हिडम्‍बा मंदिर एक चार मंजिला मंदिर है जिसका आकार शिवालय की तरह है साथ ही इस मंदिर की वास्तुकला अपने में बेमिसाल और लाजवाब है। ये मंदिर भीम की पत्नी और राक्षस हिडिम्ब की बहन हिडम्‍बा को समर्पित है ये देश का एक मात्र मंदिर है जहां एक राक्षसी की पूजा होती है।

 खीर भवानी मंदिर, कश्मीर

खीर भवानी मंदिर, कश्मीर

खीर भवानी मंदिर श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित है। इस मंदिर के चारों ओर चिनार के पेड़ और नदियों की धाराएं हैं, जो यहां की सुंदरता को बढाते हैं। यहां प्रसाद के रूप में भक्तों द्वारा केवल एक भारतीय मिठाई खीर और दूध ही चढ़ाया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि खीर,जो सामान्य रूप से सफेद रंग की होती है उसका रंग काला हो जाता है जो अप्रत्याशित विपत्ति का संकेत होता है। मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त यहां एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी पानी का रंग बदलती है।

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी

कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी

प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर घूमे बिना गुवाहाटी की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी। यहां त्रिपुरासंदरी, मतांगी और कमला की प्रतिमा जहां मुख्य मंदिर में स्थापित है, वहीं 7 अन्य रूपों की प्रतिमा अलग-अलग मंदिरों में स्थापित की गई है, जो मुख्य मंदिर को घेरे हुए है। पौराणिक मान्यता है कि साल में एक बार अम्बूवाची पर्व के दौरान माँ भगवती रजस्वला होती हैं और मां भगवती की गर्भ गृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है।

 गांव जहां नहीं है दरवाजे

गांव जहां नहीं है दरवाजे

आज के समय में जिस तरह से अपराध बढ़ गए है, ऐसे में बिना दरवाजे वाले घर की कल्पना करना भी मुश्किल हो गया है। यह गांव प्रसिद्ध तीर्थस्थल शिरडी से 70 किमी दूर है। साथ ही यह गांव नासिक से सिर्फ 75 किमी दूर है। गांव में भगवान शनेश्वर का एक मंदिर है, जिससे इसका नाम शनि शिंगनापुर पड़ा। ऐसा माना जाता है कि मंदिर की प्रतिमा ही पूरे गांव की रक्षा करती है। यहां चोरी या अपराध के बारे में शायद ही कभी सुनने को मिलता है। यहां बनने वाले घर में न ही दरवाजे होते हैं और न ही खिड़कियां। एक धारणा यह है कि अगर कोई व्यक्ति चोरी की कोशिश करता है तो वह गांव के क्षेत्र से बाहर जाते ही मर जाएगा या फिर पागल हो जाएगा।

 ज्वालामुखी मंदिर, कांगड़ा

ज्वालामुखी मंदिर, कांगड़ा

ज्वालामुखी मंदिर को ज्वालाजी के रूप में भी जाना जाता है, जो कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किमी की दूरी पर स्थित है। ये मंदिर हिन्दू देवी ज्वालामुखी को समर्पित है। जिनके मुख से अग्नि का प्रवाह होता है। इस जगह का एक अन्य आकर्षण ताम्बे का पाइप भी है जिसमें से प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है। इस मंदिर में अलग अग्नि की अलग अलग 6 लपटें हैं जो अलग अलग देवियों को समर्पित हैं।