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दक्षिण भारत के खास 5 मंदिर..जायें जरुर

Written By: Goldi

चाहे आप माने या ना माने लेकिन मंदिरों में घूमने के बाद दिल को एक असीम शांति का एहसास होता है...भले ही आप मंदिर जाना पसंद ना करते हो लेकिन मंदिर की एक चीज सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है वह है मंदिर की वास्तुकला। मंदिर हमारे पूर्वजो द्वारा बनाये गये हैं..जो हमे हमारे इतिहास की ओर ले जाते हैं।

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दक्षिण भारत में कई मंदिर है..खासकर तमिलनाडू का प्रसिद्द मंदिर कांचीपुरम..जोकि हजार मन्दिरों का शहर भी कहा जाता है। इसके साथ ही आप यहां खरीददारी के लिए मदुरे भी जा सकते हैं। केरला में स्थित गुरुवायुर और सबरीमाला मंदिर भी श्रधालुयों के बीच खासा लोकप्रिय है। आंध्रा और तेलांगना में भी कई प्रसिद्ध मंदिर है जैसे हजार पिलर वाला मंदिर,जग्गनाथ मंदिर ,तिरुपति मंदिर आदि। आज हम इन मन्दिरों की बात इसलिए कर रहे हैं...क्यों कि आज हम आपको अपने लेख से दक्षिण भारत के खास मन्दिरों से रुबरू करायेंगे.....

महाबलीपुरम

महाबलीपुरम

महाबलीपुरम को मामाल्‍लापुरम के नाम से भी जाना जाता है,यह जगह दक्षिण भारत खूबसूरत मन्दिरों में से एक है। यहां स्थित शोर मंदिर का निर्माण 700 शताब्दी में हुआ था यह मंदिर द्रविड़ शैली में बना हुआ है।

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पांच पांडव रथ

पांच पांडव रथ

महाबलीपुरम स्थित पंचरथ अपनी नक्काशी और कलात्मक शैली के लिए लिए मशहूर है जो कि पांच पांडवों के नाम से जाना जाता है। इनकी खासियत यह है कि यह एक ही पत्थर को काटकर बनाये गए हैं। इसके अलावा महाबलीपुरम में कई सारे मंदिर व् खूबसूरत समुद्री तट है..जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

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तंजावुर

तंजावुर

तंजावुर चेन्नई से करीब 350 किमी की दूरी पर स्थित है..यह एक ऐतिहासिक जगह है ।अगर इतिहास पर नजर डाली जाए तो यह जगह कभी इस जगह पर चोला राजवंशों का शासन हुआ करता था।18 वीं शताब्दी के अंत में देश की संस्कृति का मुख्य केंद्र रहे, एवं अनेंकों आकृषक तीर्थ स्थलों की मौजूदगी से साल दर साल हजारो पर्यटकों को अपनी ओर आकृषित करने वाला तंजावुर बेहद प्रसिद्ध है।तंजावुर में सबसे अधिक भ्रमणशील स्थल बृहदीश्वर मंदिर है, जिसे 11 वीं शताब्दी में प्रसिद्ध चोल शासक,राज राजा चोल द्वारा बनवाया गया था। वर्ष 1987 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित इस बृहदीश्वर मंदिर में भगवान शिव की आराधना होती है। इसके अलावा यहां कई छोटे छोटे मंदिर है जोकि देखे जा सकते हैं।

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बादामी

बादामी

उत्तर कर्नाटक के बागलकोट जिले में स्थित बादामी गुफा मंदिर देश में रॉक-कट वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, और इस तरह, हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उन चीजों में से एक है जो आपको आश्चर्यचकित करता है कि कैसे हमारे पूर्वजों को कलात्मक और व्यावहारिक रूप से उन्नत किया गया था - उनके पास ऐसे संरचनाएं बनाने के तरीके थे, और उन्हें उन्हें इतनी सुंदर और सौंदर्यवादी शक्तिशाली बनाने की संवेदनशीलता थी यह चार गुफा मंदिर हैं, जो सभी बलुआ पत्थर से तैयार किए गए हैं। एक जैन मंदिर है, एक शिव को समर्पित है और दो विष्णु को समर्पित है। बुद्ध की मूर्ति के साथ पांचवीं छोटी प्राकृतिक गुफा है। ये और अन्य समान पुराने मंदिर अगस्थ टैंक के आसपास हैं, जो एक शानदार दृश्य प्रदान करता है।

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रामेश्वरम

रामेश्वरम

रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध हैं..जब राम रावण रावण युद्ध के दौरान एक ब्राह्मण की मृत्यु हो जाती है..तो राम ने उस पाप से बचने के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया। राम ने हनुमान से दुनिया का सबसे बड़ा शिव लिंगम लाने को कहकर उन्हें हिमालय की ओर भेज दिया। इस स्थान को बेहद ही पविर माना जाता है।मंदिर की वास्तुकला को ध्यान से देखा जाये तो इसके गलियारे बेहद ही शानदार है। देश के सबसे लोकप्रिय स्थलों में से एक रामेश्वरम एक द्वीप है जिसके पास धनुषकोडी स्थित है। यहां स्थित बंगाल की खाड़ी को महिला समुद्र यानी 'पेंकाडल' कहा जाता है क्योंकि यह एक तरफ अपेक्षाकृत शांत है; तो दूसरी ओर अरब सागर, दूसरे पर नर समुद्र या 'आकड' कहा जाता है, क्योंकि इसकि लहरे काफी शोर करती है।

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अंबलाप्पुज़ा

अंबलाप्पुज़ा

केरल में अधिक प्रसिद्ध, भव्य मंदिर हैं, लेकिन अंबलाप्पुज़ा एक ऐसे गीत की तरह है जो सभी को पसंद आता है। यह मन्दिरों का शहर केरल के अलापुझा जिले में है। यहां स्थित प्रसिद्ध गुरुवयूर मंदिर में वर्ष 1798 में श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित की गयी थी...जोकि श्रधालुयों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस मंदिर में मिलने वाला पायसम भी खासा प्रसिद्ध हैअलापुझा में मन्दिरों के अलावा कई सारे समुद्री तट है जिन्हें घूमना एक रोमांच से कम नहीं है।

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