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छत्तीसगढ़- जहां गिरते झरने में उबल जाते हैं अंडे..वहीं पत्थर से निकलती धुनें

Written By: Goldi

हम अपने लेखों से आपको भारत के विभिन्न हिस्सों और पर्यटन स्थलों से आपको रूबरू कराते रहते हैं..ताकि आपकी यात्रा मंगलमय हो।अभी तक हमने आपको उत्तर भारत के कई शहरों के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के बारे में बताया।
इसी क्रम में आज हम आपको बताने जा रहें है..छत्तीसगढ़ के बारे में।

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पर्यटन के मामले में छत्तीसगढ़ न सिर्फ अपनी प्राचीन खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है बल्कि अजीबो-गरीब जगहों के लिए पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।

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जैसे अगर आप किसी पत्थर पर अपना हाथ मारेंगे तो आपको उसमे आपको धुन सुनाई देगी..साथ ही यहां एक ऐसी नदी भी मौजूद है..जिसमे सात नदियों की धाराएं एक साथ आकर मिलती है। इस संगम को देख पर्यटक भी इस नदी में
अठखेलियाँ खेलने से खुद को रोक नहीं पाते। सबसे महत्वपूर्ण है छत्तीसगढ़ में रहने वाले आदिवासी, जो पर्यटकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण का केंद्र हैं। आइये जानते हैं छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के बारे में

टिनटिनी पत्थर

टिनटिनी पत्थर

यह एक बेहद ही पुराना पत्थर है, जिस पर हाथ या कुछ मारने से इसमें टनटन की आवाजे निकलती है..जिस कारण इसे टिनटिनी पत्थर भी कहा जाता है। यह पत्थर यह अंबिकापुर से करीब 10 किलोमीटर दूर दरिमा हवाई पट्टी के पास है।

मैनापाट

मैनापाट

हिमाचल प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में तिब्बती शरणार्थियों को देखा जा सकता है..जोकि छत्तीसगढ़ का एक छोटा तिब्बत है।यहां पर जलजला नामक स्थान पर चार एकड़ की जमीन लोगों की दिलचस्पी का कारण बनी हुई है। असल में यह चार एकड़ की जमीन स्पंज के जैसे है, जिस पर उछलने से आस-पास की जमीन में भी कंपन पैदा होता है। ठीक उसी तरह जैसे एक गद्दे पर उछलने से महसूस होता है। 1997 में जबलपुर में आए भूकंप की वजह से यह जगह बनी।

प्राचीन गुफा और अंधी मछलियां

प्राचीन गुफा और अंधी मछलियां

जगदलपुर से 30 किमी दूर कांगेर वैली नेशनल पार्क में की कुटुमसर अंधेरी गुफा है। है। यह अंधी मछलियों के लिए मशहूर है। गुफा के भीतर झींगुर, मकड़ी, चमगादड़, सांप, दीमक जैसे जीव जंतु हैं, लेकिन अंधी मछलियां रहस्यमयी हैं।

7 धारायों में बंटती नदी

7 धारायों में बंटती नदी

जगदलपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर वारसूर इंद्रावती नदी 7 धाराओं में बंटती है। कुछ दूर जानकर सातों नदी मिल जाती हैं। इनके अलग- अलग रंग काफी दूर तक नजर आते हैं। बारिश में सात धाराओं का नजारा साफ नजर आता है। सभी धाराएं मिलकर आखिरी में पानी का रंग नीला कर देती हैं।

फरसाबहार इलाका नागलोक

फरसाबहार इलाका नागलोक

छत्तीसगढ़ के जशपुर में फरसाबहार इलाका नागलोक के नाम से मशहूर है। तपकरा, पत्थलगांव, बगीचा, कासांबेल में कॉमन, ब्लैक और बेंडेड करैत, कोबरा तथा ग्रीन पिट वाइपर समेत 40 प्रकार के सांप पाए जाते हैं। इनमें दुनिया की सबसे जहरीली 6 में से 4 प्रजातियां यहां मिलती हैं। यहां स्नेक पार्क बनाने की भी प्लानिंग है, जिसमें एंटी वेनम के लिए सांपों का जहर भी निकाला जाएगा।

अम्बिकापुर गर्म कुंड

अम्बिकापुर गर्म कुंड

अम्बिकापुर से रामानुजगंज जाने वाली सड़क पर करीब 80 किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे के पास गर्म पानी के आठ- दस कुंड हैं।इनमें जमीन के भीतर से गर्म पानी आता है। कहीं-कहीं पानी इतना गर्म है कि अंडे और चावल
तक उबल जाते हैं। इसके अलावा लगातार भाप भी निकलती रहती है।

कैसे पहुंचे छत्तीसगढ़

कैसे पहुंचे छत्तीसगढ़

हवाई मार्ग से
छत्तीसगढ़ में एक घरेलू हवाई अड्डा है जो कि देश के लगभग सभी हवाई अड्डों से जुड़ा है। इंडियन एयरलाइंस छत्तीसगढ़ से और छत्तीसगढ़ तक नियमित उड़ानें संचालित करती है।

रेल मार्ग से
छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख रेलवे स्टेशन रायपुर और बिलासपुर इस राज्य को देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जोड़ते हैं। रायपुर मुंबई और हावड़ा के लगभग मध्य में आता है जो कि क्रमशः पश्चिम और पूर्व भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशन हैैं और नियमित तौर पर यहां से महत्वपूर्ण रेलें संचालित होती हैं।

सड़क से
छत्तीसगढ़ में सड़क नेटवर्क शानदार है। एनएच 6, एनएच 16 और एनएच 43 राजमार्ग छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ते हैं।

 खरीददारी

खरीददारी

छत्तीसगढ़ में खरीददारी एक खुशनुमा अनुभव है। छत्तीसगढ़ की जनजातियां विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प बनाने में काफी कुशल हैं। यह हस्तशिल्प दुनिया भर में मशहूर हैं और शानदार सजावटी सामान, तोहफे या उपयोगी सामान के तौर पर काम आते हैं। इन हस्तशिल्पों का आकर्षण इतना ज्यादा है कि छत्तीसगढ़ में खरीददारी एक अनूठी गतिविधि है।

 
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