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चेट्टीनाद - एक बेहतरीन पाकशाला से कई ज्यादा है

By: Namrata Shatsri

चेट्टीनाद, देशभर में अपने स्‍वादिष्‍ट भोजन के कारण प्रसिद्ध है। तमिलनाडु के शिवगंगा जिले एक क्षेत्र में चेट्टीनाद स्थित है। चेट्टी शब्द एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है धन।

चेट्टीयार, मार्केटाइल बैंकर्स की एक सामाजिक जाति है जो मसालों और नमक के व्यापारियों के नाम से जानी जाती है।
इस जगह पर कई तरह के व्यंजनों की वैरायटी पाई जाती है जिनमें से सबसे प्रिय व्यंजन है चिकन चेट्टीनाद और चेट्टीनाद शैली में बना सीफूड। चेट्टीनाद में कई मशहूर और पर्यटक स्थल हैं जिनके कारण चेट्टीनाद क्षेत्र को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थलों में से एक घोषित किया गया है।

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PC: CCFoodTravel.com

चेट्टीनाद एक समय पर 96 गांव का एक समूह हुआ करता था लेकिन 19वीं और 20वीं शताब्दी के शुरुआत में बहुत से लोग दक्षिणपूर्व एशिया में जाकर बीएस गये जिस कारण अब यहां सिर्फ 74 गांव ही बचे हैं। 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान इस गांव के लोग पूर्वी एशिया और यूरोपीय देशों जैसे बर्मा, बेल्जियम और इंडोनेशिया से सफेद संगमरमर, झूमर, क्रॉकरी इत्यादि इम्पोर्ट किया करते थे।

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विट्नैसिंग मैन्शन
19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान चेट्टीनाद के लोगों ने संगमरमर और सजावटी वस्तुओं एवं नमक और मसालों का कारोबार किया। ये लोग चेट्टीनाद-शैली के विशाल मकानों में इन चीज़ों का इस्तेमाल करना चाहते थे।

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PC:KARTY JazZ

यह मकान इतने बड़े थे कि प्रवेश द्वार एक गली से शुरू होता था तो निकास द्वार दूसरी गली में खत्म होता था। स्थानीय तौर पर इन मैन्शन को नटटुकोटाई कहा जाता है, इन मैन्शन को आज भी देखा जा सकता है, जिनमें से कुछ बचे हुए मकानों को लक्जरी होटल में बदल दिया गया है।अगर आप एक सदी पीछे का समय देखना चाहते हैं तो इन मैन्शन का दौरा जरूर करें या फिर कुछ समय के लिए यहां रह कर 19वीं शताब्दी का लुत्‍फ उठाएं।गो

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ये राजसी महल अभी तक सफेद कोट और दीवारों पर चूने लगे होने की वजह से चमक रहे हैं। इस महल की छत का खापरा स्पेन से, झुमर और सागौन खंभे बर्मा से मंगवाया गया था और यहां तक कि यहां के लोगों ने सैकडों वर्ष पहले जल संचयन विधि को अपनाया था।इन महलों को इस तरह से बनाया गया है कि तमिलनाडु की सख्त गर्मी में भी इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।


चेट्टीनाद मंदिर
चेट्टीनाद के कनदुकतान से लगभग 17 किमी दूर एक सुंदर और प्राचीन पिल्लारीपट्टी मंदिर स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर को 5वीं शताब्दी में स्थापित किया गया था और यह भगवान शिव और भगवान गणेश को समर्पित मंदिरो में से सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है।

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थुरुमयाम किले का निर्माण 1687 में स्थानीय शासक विजया रघुनाथ सेतुपति द्वारा 40 एकड़ में फैले क्षेत्र में किया गया था। इस जगह से आपको शानदार नज़ारा देखने को मिलता है लेकिन इस स्थान का मुख्य आकर्षण 3 रॉक-कट वाले मंदिरों का समूह है जो भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित है। किले के अंदर ब्रिटिशों के सिंध्दांतो के साथ गढों को भी देखा जा सकता है।

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कैसे पहुंचे चेट्टीनाद

वायु मार्ग
चेट्टीनाद से 100 किमी की दूरी पर स्थित मदुरई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जोकि इस क्षेत्र से सबसे निकटतम हवाई अड्डा है।यह भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुम्बई, बैंग्लुरु से अच्छी तरह से जुडा हुआ है।

रेल मार्ग
थिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन, चेट्टीनाद यहां से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो चेन्नई, रामेश्‍वरम, कोयम्बटूर आदि जैसे सभी शहरों से जुडा हुआ है।

सड़क मार्ग

यहां की सड़कें बेहद साफ और सुरक्षित हैं जोकि राज्य के बाकी हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ी हुई हैं। टैक्सी और अंतर्राज्यीय बसें नियमित रूप से उपलब्ध हैं और यह राज्य के भीतर और आसपास के सभी स्थानों को जोडती हैं।

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