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दिल्‍ली से पुष्‍कर का सफर

By Namrata Shatsri

तीन पहाड़ियों से घिरा पुष्‍कर शहर बेहद शांत है। सामान्‍य दिन पर इस शहर में बड़े आराम से पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देती है। इस शहर में लगभग 400 मंदिर हैं और विश्‍व में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर भी यहां स्थित है।

राजस्‍थान के इस शहर को रोज़ गार्डन के नाम से जाना जाता है क्‍योंकि पुष्‍कर गुलाब के फूलों का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक है। पुष्‍कर के फूलों की महक मन में कई दिनों तक बस जाती है।

पुष्‍कर की यात्रा

 पुष्‍कर आने का सही समय

पुष्‍कर आने का सही समय

पर्यटकों को इस पवित्र शहर में नवंबर से मार्च के बीच आना चाहिए। सर्दी के मौसम में इस शहर में घूमना बेहद अच्‍छा लगता है। इस मौसम में रेगिस्‍तान सफारी का लुत्‍फ जरूर उठाएं। ठंड के मौसम में पुष्‍कर शहर में कई मेलों और उत्‍सवों का आयोजन किया जाता है। गर्मी में यहां चिलचिलाती धूप पड़ती है तो वहीं मॉनसून में खूब बारिश होती है। इस दौरान यहां बहुत कम पर्यटक आते हैं। PC:Nicholas Kenrick

कैसे पहुंचे

कैसे पहुंचे

पहले रूट से जाने पर दिल्‍ली से पुष्‍कर की दूरी 415 किमी दूर है। दूसरे रूट से 460 किमी रहेगी। इसका रूट इस प्रकार है :

रूट 1 : दिल्ली - रोहतक रोड - दिल्ली अजमेर एक्सप्रेस वे एनएच 48 - पाओटा - एनएच 448 से बाहर निकलें - पुष्कर बायपास - बड़ी बस्ती - पुष्कर

रूट 2 : दिल्ली - राष्ट्रीय राजमार्ग 9 के माध्यम से डॉ एनएस हरदीकर रोड - एनएच 48 के माध्यम से महात्मा गांधी रोड़ - अलवर भिवाडी रोड - एनएच 248 ए - एनएच 448 से बाहर निकलें - पुष्कर बायपास - एनएच 58 - पुष्कर

दिल्‍ली से पुष्‍कर पहुंचने में पहले रूट से 7 घंटे का समय लगेगा और दूसरे रूट से 9 घंटे इसलिए आपको पहले रूट से जाना चाहिए।

दिल्‍ली से पुष्‍कर के बीच कहां रूकें

दिल्‍ली से पुष्‍कर के बीच कहां रूकें

दिल्‍ली से सुबह जल्‍दी निकलें। दिल्‍ली से 130 किमी दूर आगे आने पर नीमराणा पहुंचेंगें।

राजस्‍थान के अलवर जिले में नीमराणा महाराजा पृथ्‍वी राज चौहान का गृह नगर है। ऐतिहासिक जगह के साथ-साथ नीमराणा इंडस्ट्रियल क्षेत्र भी है। इस क्षेत्र में जापानी औद्योगिक क्षेत्र और कोरियाई औद्योगिक क्षेत्र अपनी जड़े फैला रहे हैं।

आप चाहें तो यहां किले में भी रूक सकते हैं। अगर आपके बजट में है तो एक बार इस महल को जरूर देखें। सरिसका नेशनल पार्क, बाला किला और पुरानी बावड़ी आदि ऐतिहासिक वास्‍तुकला का नमूना हैं। नीमराणा किले के पास एडवेंचर का मज़ा भी लिया जा सकता है।

PC:Astoriajohn

जयपुर

जयपुर

155 किमी चलने के बाद आप गुलाबी शहर जयपुर पहुंच जाएंगें। यहां पर दाल बाटी चूरमा खाना ना भूलें। राजस्‍थानी संस्‍कृति और यहां के खानपान और जीवनशैली को देखने के लिए चोखी धानी भी देख सकते हैं। गुलाबी शहर में बहुत कुछ देखने के लिए है। शादी की खरीदारी के लिए ये जगह बेस्ट मानी जाती है। हवा महल, आमेर किला, जल महल भी इतिहास की वास्‍तुकला को दर्शाते हैं। जयपुर में स्‍ट्रीट फूड का मज़ा जरूर लें। रावत मिष्‍ठान भंडार में प्‍याज की कचौड़ी भी खा सकते हैं। इसके अलावा लस्‍सी भी पी सकते हैं। एनएच 48 से 146 किमी दूर पुष्‍कर शहर है। PC:Ziaur Rahman

पुष्‍कर पहुंचने के अन्‍य माध्‍यम

पुष्‍कर पहुंचने के अन्‍य माध्‍यम

रेल मार्ग : पुष्‍कर में कोई रेलवे स्‍टेशन नहीं है। हालांकि, अजमेर इसका नज़दीकी रेलवे स्‍टेशन है।

बस द्वारा : दिल्‍ली से पुष्‍कर के लिए रोज़ दो बसें चलती हैं। इस सफर में 9 घंटे का समय लगता है।

वायु मार्ग द्वारा : पुष्‍कर के लिए जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट नज़दीकी हवाई अड्डा है। जल्‍द ही किशनगढ़ में भी एयरपोर्ट बन रहा है। यहां से पुष्‍कर 45 किमी दूर है। PC: wikimedia

पुष्‍कर के आकर्षित स्‍थल

पुष्‍कर के आकर्षित स्‍थल

पुष्‍कर में हिंदुओं की पवित्र झील पुष्‍कर झील स्थित है। राजस्‍थान में ये झील मुख्‍य आकर्षण है। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने इस झील में धार्मिक संस्‍कार किया था। उन्‍होंने इस जगह पर कमल का फूल गिराया था और आज यहां पुष्‍कर झील है। PC: wikimedia

ब्रह्मा मंदिर

ब्रह्मा मंदिर

भारत में ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर राजस्‍थान के पुष्‍कर में स्थित है। इस वजह से भी पुष्‍कर शहर खास महत्‍व रखता है। इश शानदार में मंदिर में प्रवेश से पूर्व पुष्‍कर की पवित्र नदी में स्‍नान जरूर कर लें। इससे मन, मस्तिष्‍क और आत्‍मा शुद्ध हो जाती है। PC:K.vishnupranay

सावि‍त्री नदी

सावि‍त्री नदी

सावित्री, ब्रह्मा जी की पहली पत्‍नी हैं। रत्‍नागिरि पर्वत की चोटि पर ये मंदिर स्थित है। देवी सावित्री के इस मंदिर को ब्रह्मा जी पर नज़र रखने के लिए बनाया गया था। ब्रह्मा जी ने अन्‍य महिला से विवाह कर लिया था जिस वजह से सावित्री जी क्रोधित हो गईं थीं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आधे घंटे का ट्रैक करना पड़ता है। PC: SINHA

पुष्‍कर मेला

पुष्‍कर मेला

इस प्रसिद्ध मेला दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ग्रामीण इस मेले में सांस्‍कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओं में हिस्‍सा लेते हैं। इस उत्‍सव की धूम देखने लायक होती है। पुष्‍कर नदी के तट पर पुरुष पशु, घोड़े और मवेशियों का व्‍यापार करने आते हैं। इसके अलावा मेले में और भी कई चीज़ें होती हैं।

PC:mantra_man

मन महल

मन महल

सरोवर नदी के तट पर मुगल कला की झलक देखने के लिए शाही महल जरूर देखें। इसे राजा मान सिंह 1 ने बनवाया था।

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