» »ग्वालियर की ट्रिप में..इन ऐतिहासिक स्थलों को घूमना ना भूले

ग्वालियर की ट्रिप में..इन ऐतिहासिक स्थलों को घूमना ना भूले

Written By: Goldi

मध्यप्रदेश का ग्वालियर समृद्धशाली पुरातात्विक धरोहरों से भरा-पूरा है। यह स्थान ग्वालियर किले के लिए प्रसिद्ध है जो कई उत्तर भारतीय राजवंशों का प्रशासनिक केंद्र था। ग्वालियर साहित्य, संगीत,काव्य,चित्रकला,शिल्प,हस्तकला आदि सभी में यह नगर सर्वोपरी रहा है। ग्वालियर मध्य प्रदेश राज्य का चौथा बड़ा शहर है।

यह शहर आगरा के दक्षिण में 122 किलोमीटर दूर स्थित है जो मध्य प्रदेश की पर्यटन राजधानी है। ग्वालियर वह स्थान है जहाँ इतिहास आधुनिकता से मिलता है। यह अपने ऐतिहासिक स्मारकों, किलों और संग्रहालयों के द्वारा आपको अपने इतिहास में ले जाता है तथा साथ ही साथ यह एक प्रगतिशील औद्योगिक शहर भी है। आधुनिक भारत के इतिहास में ग्वालियर कोअद्वितीय स्थान प्राप्त है।

ग्वालियर में प्रतिवर्ष तानसेन संगीत समारोह मनाया जाता है। हिंदुस्तानी संगीत की ख्याल घराने की शैली का नाम इस शहर के नाम पर ही पड़ा है। ग्वालियर सिख और जैन तीर्थ स्थानों के लिए प्रसिद्ध है।

ग्वालियर दुर्ग

ग्वालियर दुर्ग

ग्वालियर दुर्ग ग्वालियर में मौजूद ग्वालियर किले का निर्माण 8वीं शताब्दी में किया गया था। तीन वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस किले की ऊंचाई 35 फीट है। यह किला मध्यकालीन स्थापत्य के अद्भुत नमूनों में से एक है। यह ग्वालियर शहर का प्रमुख स्मारक है जो गोपांचल नामक छोटी पहाड़ी पर स्थित है। लाल बलुए पत्थर से निर्मित यह किला देश के सबसे बड़े किले में से एक है और इसका भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान है।

किला मुख्यतः दो भाग में बंटा है. मुख्य किला और महल (गुजारी महल और मान मंदिर महल)। इन किलों का निर्माण राजा मान सिंह ने करवाया था। गुजारी महल का निर्माण उन्होंने अपनी प्रिय रानी मृगनयनी के लिए करवाया था। अब गुजारी महल को पुरातात्विक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है। इस संग्रहालय में दुर्लभ मूर्तियां रखी गई हैं जो पहली ईस्वी की हैं. ये मूर्तियां यहीं के आसपास के इलाकों से प्राप्त हुई हैं।PC: flickr.com

जय विलास महल

जय विलास महल

जय विलास महल आज भी सिंधिया राजवंश और उनके पूर्वजों का निवास स्थान है। इसके एक भाग का उपयोग आजकल संग्रहालय की तरह किया जाता है। इसका निर्माण जीवाजी राव सिंधिया ने 1809 में किया था।
लेफ्टिनेंट कर्नल सर माइकल फ़िलोस इसके वास्तुकार थे।

सास बहु का मंदिर

सास बहु का मंदिर

ग्वालियर में सास बहु का मंदिर भी विशेष रूप से दर्शनीय है। हालांकि इस मंदिर में अब कोई प्रतिमा नहीं है, फिर भी इसकी कलात्मक देखने योग्य है।PC: flickr.com

सूरज कुंड

सूरज कुंड

एक सुंदर तालाब है जो ग्वालियर किले के पास स्थित है। इसे 8 वीं शताब्दी के राजा सूरज सेन की लोक कथाओं के कारण महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है। कहानी के अनुसार राजा को कुष्ठ रोग हो गया था और सौभाग्य से वे किले के पास ग्वालिपा नाम के साधू से मिले।
PC: flickr.com

मुहम्मद गौस का मकबरा

मुहम्मद गौस का मकबरा

अकबर कालीन सुप्रसिद्ध सूफी संत हजरत मुहम्मद गौस का मकबरा मुगलकालीन मकबरा शैली का का बेहतरीन नमूना है।
PC: flickr.com

कैसे जायें

कैसे जायें

हवाई जहाज
ग्वालियर के लिए देश के प्रमुख शहरों से सीधी उड़ाने उपलब्ध हैं।

रेल मार्ग
देश के प्रमुख शहरों से ग्वालियर के लिए रेल सेवाएँ उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग
ग्वालियर सड़क मार्ग द्वारा भी देश जे सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां से आगरा ,मथुरा, दिल्ली,जयपुर, भोपाल झासी आशी शहरों के नियमित बस सेवा उपलब्ध है।PC: flickr.com

कहां रुके

कहां रुके

ग्वालियर में ठहरने के लिए के स्थानीय होटल और धर्मशालाएं की उचित व्यवस्था है।PC: flickr.com

  
Please Wait while comments are loading...