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वाया आमेर-भानगढ़ देखे सरिस्का के बाघ

यूं तो जयपुर में घूमने को कई जगह हैं, लेकिन कभी कभी यूं ही दोस्तों के साथ या फिर यूं ही अकेले हवा से बातें करते हुए अपनी यारी यानी बाइक से रोड ट्रिप करने का एक अलग ही मजा होता है। खासकर कि गुलाबी सर्दी में रोड ट्रिप करने का एक अलग ही मजा है, तो अगर आप इस वीकेंड बोर नहीं होना चाहते तो क्यों ना एक रोड ट्रिप यारो के साथ हो जाये सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की।

अरावली की पहाड़ियों में स्थित सरिस्का 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां घास, शुष्क पर्णपाती वन,चट्टानें और चट्टानी परिदृश्य दिखाई पड़ते हैं। इस क्षेत्र के बड़े हिस्से में धाक के वृक्ष पाये जाते है और यहां विभिन्न वन्यजीव प्रजातियं रहती हैं।

जयपुर से सरिस्का जाने के कई रूट है-

जयपुर से सरिस्का जाने के कई रूट है-

पहला रूट- जयपुर-कुंडा-सैंथल-भानगढ़-तेहला-सरिस्का नेशनल पार्क दूरी 103 किमी जिसे दो घंटे 45 में पूरा किया जा सकता है।

दूसरा रूट- जयपुर-आमेर-कुकस-अकरोल-माधोगढ़-लालपुरा-अगर-अलवर-सरिस्का नेशनल पार्क दूरी 110 किमी जिसे 3घंटे में पूरा किया जा सकता है।

हम अपनी ट्रिप के लिए पहले रूट का चुनाव करते हैं-

जयपुर

जयपुर

इस ट्रिप की शुरुआत होती है जयपुर जोकि गुलाबी नगरी के नाम से से भी जाना जाता है। राजस्‍थान राज्‍य की राजधानी कहा जाने वाला जयपुर शहर एक अर्द्ध रेगिस्‍तान क्षेत्र में स्थित है। इस खूबसूरत शहर को अम्‍बेर के राजा महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बंगाल के एक वास्‍तुकार विद्याधर भट्टाचार्य की मदद से बनाया गया था। यह भारत का पहला शहर है जिसे वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार बनाया गया था।
Pc:Arian Zwegers

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आमेर

आमेर

इस ट्रिप पर जाते समय आप रास्ते में पड़ने वाले कुंडा से करीबन 11 किमी आगे आमेर को भी देख सकते हैं। आमेर किले का नाम अम्भा माता के नाम पर पड़ा था अम्भा माता को मीनाओ की देवी माना जाता है। आमेर किला हिन्दू धर्म के लिए मुख़्य माना गया है यहाँ पर हिन्दू धर्म क़ी बहुत सी चित्रकारी और आकृतियां है आमेर किले को बनाने में कई राजाओ का हिस्सा रहा है राजा मान सिंह ,राजा जय सिंह आदि थे।
Pc: Saksham Kumar

आमेर में क्या देखें

आमेर में क्या देखें

आमेर किले भीतर महोठा झील, शीश महल आदि देख सकते हैं, इसके साथ ही महल के अंदर बिकने वाली वस्तुयों को भी खरीद सकते हैं।
Pc: Shreyaagrawal123

भानगढ़

भानगढ़

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ का किला राजस्थान के भुतहा स्थानों में से एक है। अगर यहां के स्थानीय लोगों की माने तो यहां आने के बाद पर्यटक आज भी एक अलग तरह के डर और बेचैनी का अनुभव करते हैं। लेकिन दिन के समय इस किले को आसानी से घूमा जा सकता है।
Pc: Aabhas

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 किले के इतिहास को बयां करती एक खौफनाक कहानी

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भानगढ़ की राजकुमारी रत्‍नावती जो बेहद खुबसुरत थी और उनके रूप की चर्चा पूरे राज्‍य में थी वो एक तांत्रिक की मौत का कारण बनी क्योंकि तांत्रिक राजकुमारी से विवाह करना चाहता था। राजकुमारी से विवाह न होने के कारण उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने से पहले भानगढ़ को तांत्रिक से ये श्राप मिला क‍ि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्‍द ही मर जायेंगे और ताउम्र उनकी आत्‍माएं इस किले में भटकती रहेंगी। उस तांत्रिक के मौत के कुछ दिनों बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच जंग हुई जिसमें किले में रहने वाले सारे लोग मारे गये। यहां तक की राजकुमारी रत्‍नावती भी उस श्राप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी। तब से लेकर आज तक इस किले में रूहों ने अपना डेरा जमा रखा है।Pc:A Frequent Traveller

खूबसूरती के क्या कहने

खूबसूरती के क्या कहने

भले ही आज इस किले को भूतिया और वीरान कहा जाता है लेकिन अगर यहां आने वाले इसकी वास्तुकला को गौर से देखें तो उन्हें एहसास होगा कि इसकी खूबसूरती बेमिसाल है और ये किसी का भी मन मोह सकती है।Pc:C980040

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डेस्टिनेशन- सरिस्का नेशनल पार्क

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सरिस्का नेशनल पार्क को 1955 में वन्यजीव रिजर्व घोषित किया गया था और 1 978 में बाघ अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था। इस राष्ट्रीय उद्यान को दुनिया का पहला राष्ट्रीय पार्क होने का गौरव प्राप्त है।Pc:Jyoti D

<strong></strong>अगर है चीते से हकीकत में सामना करने की हिम्मत..तो पहुंच जायें यहांअगर है चीते से हकीकत में सामना करने की हिम्मत..तो पहुंच जायें यहां

कई प्रजातियों का है घर

कई प्रजातियों का है घर

इस क्षेत्र के बड़े हिस्से में धाक के वृक्ष पाये जाते है और यहां विभिन्न वन्यजीव प्रजातियं रहती हैं। सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान विविध प्रजातियों के जंगली जानवरों-तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय, चार सींग वाला हिरण, जंगली सुअर, रीसस मकाक, लंगूर, लकड़बग्घा और जंगली बिल्लियों का शरणस्थल है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बड़ी संख्या में मोर,सैंडग्राउस, स्वर्ण कठफोड़वा और कलगी नागिन ईगल भी हैं।

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