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अरुणाचल प्रदेश का खूबसूरत कमलंग वन्यजीव अभयारण्य

अगर आप प्रकृति के करीब जाकर कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं, तो आप अरुणाचल प्रेदश की यात्रा का प्लान बना सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश, भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में से एक है, जो पूर्व में भूटान, उत्तर और पूर्वोत्तर में चीन, दक्षिणपूर्व में म्यांमार और दक्षिण में असम और नागालैंड राज्यों से घिरा हुआ है। पर्यटन के लिहास से यह राज्य काफी खास माना जाता है, जहां दूर-दूर से सैलानी अपने मनोरंजन और रोमांच को दुगना करने के लिए आते हैं।

एक शानदार अवकाश के लिए आप यहां का प्लान अपने परिवार या दोस्तों के साथ बना सकते हैं। इस राज्य का इतिहास कई हजार साल पुराना है, जिसका उल्लेख हिन्दू धर्म के महाकाव्यों में भी मिलता है। यहां चारों तरफ फैले पहाड़, और हरियाली को देखकर पर्यटकों काफी रोमांचित हो उठते हैं। यहां स्थित बौद्ध मठ विश्व भर में प्रसिद्ध हैं, आत्मिक और मानसिक शांति के लिए यहां दुनिया भर से नामचीन लोगों का भी आगमन होता है।

पहाड़ी आकर्षण से अलग यहां के वन्यजीव अभयारण्य सैलानियों को काफी ज्यादा प्रभावित करते हैं। इस लेख में हमारे साथ जानिए अरुणाचल प्रदेश के खूबसूरत कमलंग वन्यजीव अभयारण्य के बारे में, जानिए यह अभयारण्य आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

कमलंग वन्यजीव अभयारण्य

कमलंग वन्यजीव अभयारण्य

कमलंग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, अरुणाचल प्रदेश का एक खूबसूरत वन्यजीव अभयारण्य है, जो राज्य के लोहित जिले में स्थित है। इस अभयारण्य को 1989 में स्थापित किया गया था। चूंकि यह आरक्षित वन क्षेत्र यहां की कमलंग नदी के आसपास विकसित है, इसलिए इसका नाम नदी के नाम पर रखा गया था। यह सेंचुरी न सिर्फ वनस्पति और जंगली जीवों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करती है, बल्कि मिसमी, दिगारु, मिजो जैसी कई जनजातियां इसी अभयारण्य के आसपास रहती हैं।

इन जनजातियों को मानना है कि ये महाभारत के रुकमो नामक राजा के वंशज हैं। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इस बात का कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता। उष्णकटिबंधीय और उप उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्रों में स्थित यह अभयारण्य भारत की चार बड़ी बिल्ली प्रजातियों (बाघ, तेंदुआ, स्नो लेपर्ड और क्लाउडेड लेपर्ड) का निवास स्थान भी है। कमलंग वन्यजीव अभयारण्य लोहित जिले के दक्षिण-पूर्व भाग में स्थित है, और 783 वर्ग कि.मी के क्षेत्र में फैला है। यहां कई खूबसूरत जलाशय भी मौजूद हैं, जिनमें ग्लो झील और परशुराम कुंड काफी लोकप्रिय हैं। ये जलाशय काफी ऊचांई पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए आपको ट्रेकिंग का सहारा लेना होगा। परशुराम कुंड के दर्शन करने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालुओं का भी आगमन होता है। आगे जानिए इस अभयारण्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां।

आने का सही समय

आने का सही समय

कमलंग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, का भ्रमण आप किसी भी समय कर सकते हैं, यहां का मौसम साल भर शानदार बना रहता है, लेकिन यहां आने का आदर्श समय अक्टूबर से लेकर अप्रैल के मध्य का बताया जाता है, क्योंकि इस दौरान यह अभयारण्य हरियाली से भरा रहता है। इस दौरान आप यहां अपने आनंद को दुगना कर सकते हैं। फोटोग्राफी के लिए यह बताए गए महीने काफी उपयुक्त हैं।

वन्य जीवन

वन्य जीवन

कमलंग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी वनस्पतियों और जीवों को सुरक्षित आश्रय देने का काम करती है। जैव विविधता के मामले में यह एक शानदर स्थल है। आप यहां वनस्पति, जंगली जीवों और पक्षियों की कई प्रजातियों को देख सकते हैं। जंगली जानवरों में आप यहां इंडियन लेपर्ड, बाघ, स्नो लेपर्ड, उड़ने वाली गिलहरी, जंगली सूअर और हिरण को देख सकते हैं। आप यहां पक्षियों की भी विभिन्न प्रजातियों को भी देख सकते हैं, जिनमें हॉर्नबिल, बैंबू, गेमहर, बारविंग, पैरोटबिल आदि प्रमुख हैं। इसके अलावा आप फूलों की कई खूबसूरत प्रजातियों को भी देख सकते हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

PC- Rohit Naniwadekar

वायु मार्ग : कमलंग वन्यजीव अभयारण्य का निकटतम हवाई अड्डा लगभग 180 किमी की दूरी पर असम के डिब्रूगढ़ में स्थित है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी के जरिए लोहित और लोहित से कमलंग वन्यजीव अभयारण्य आसानी से पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग : रेल यात्रा के लिए आप असम स्थित डिब्रूगढ़ रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। यहां से आप अभयारण्य के लिए ट्रैक्सी ले सकते हैं।

सड़क मार्ग : अगर आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों से भी पहुंच सकते हैं, बेहतर सड़क मार्गों से कमलंग वन्यजीव अभयारण्य के पास लोहित और उसके आसपास का क्षेत्र राज्य के अन्य शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

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