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किसी महल से कम नहीं 'पैलेस ऑन व्हील्स', हर साल करती है करोड़ों की कमाई

भारत के लोगों को घूमने का बड़ा ही शौक होता है। ऐसे घुमक्कड़ी लोगों के लिए कई ऐसी ट्रेनें हैं, जो आपको रास्ते में एक शानदार दृश्यों से अवगत कराती हैं। लेकिन इस बार हम आपको शानदार दृश्यों को दिखाने वाले ट्रेन और उसके डेस्टिनेशन के बारे में नहीं बल्कि एक राजशाही ट्रेन के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपको एक राजशाही ठाठ भरा जीवन जीने का एक मौका भी देता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं 'पैलेस ऑन व्हील्स' की। राजशाही सुविधाओं से भरपूर यह ट्रेन सितंबर से अप्रैल के दौरान चलती है। कुल 3 हजार किलोमीटर की यात्रा में ट्रेन दिल्ली से पिंक सिटी जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा होते हुए वापस दिल्ली आती है।

'पैलेस ऑन व्हील्स' में मिलने वाली सुविधाएं किसी महल से कम नहीं

'पैलेस ऑन व्हील्स' की शुरुआत 26 जनवरी 1982 को किया गया था। इसके बाद से अबतक 50 हजार से अधिक यात्रियों को राजस्थान की आलीशान भव्य हवेलियों, विशाल किलों और रेत के टीलों के साथ पर्यटन स्थलों की सवारी करवा चुकी है। इस लग्जरी ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं किसी महल से कम नहीं हैं।

palace on wheels

बेहद ही खूबसूरत है 'पैलेस ऑन व्हील्स'

इस ट्रेन की खूबसूरती भी बेहद खास है। ट्रेन के हर कोच को अंदर से फिरोजा, माणिक और मोती के रंगों से सजाया गया है। इसके हर केबिन का नामकरण राजस्थान के महलों और किलों पर रखा गया है। इस ट्रेन में एक आयुर्वेदिक स्पा है, जिसका लाभ यात्री उठा सकते हैं। रेल के सफर में आयुर्वेद का अनोखा संगम भी इसे खास बनाता है। मदिरा के शौक रखने वालों के लिए ट्रेन में अलग से बार लाउंज है। इसके अलावा दो रेस्त्रां भी बनाए गए हैं, जिसमें रॉयल फूड का जायका मेहमानों के लिए रहता है। शाही ट्रेन हर अत्याधुनिक सुख सुविधाओं से लैस होती है। यह शाही ट्रेन सैलानियों को एक सप्ताह तक यात्रा करवाती है।

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इस रिहायशी ट्रेन में 2 रेस्टोरेंट, 1 बार और 4 सर्विस कारें है। इस ट्रेन में 39 डिलक्स केबिन और 2 सुपर डिलक्स केबिन हैं। इन केबिन में 82 यात्रियों के लिए सीट की व्यवस्था दी गई है। हर केबिन के साथ एक अटैच्ड वॉशरूम भी दिया गया है। इनमें ट्रिपल बेड, डबल बेड और सिंगल बेड की सुविधा दी गई है, जिसका किराया भी अलग-अलग निर्धारित है। इस ट्रेन में एटीएम और सेटेलाइट फोन जैसी सुविधा भी उपलब्ध है।

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अब बात करते हैं इससे मिलने वाले रेवेन्यू की...

कोरोना के कारण दो साल से बंद पड़ी 'पैलेस ऑन व्हील्स' ट्रेन को राजस्थान पर्यटन निगम (आरटीडीसी) इसी साल सितम्बर-अक्टूबर से चलाने की तैयारी कर रहा है। आरटीडीसी ने इस बार इस ट्रेन के संचालन निजी सहभागिता से पीपीपी मोड पर करने का निर्णय किया है। कोरोना काल से पहले तक इस ट्रेन को रेलवे के साथ पार्टनरशिप करके चलाया जाता था, जिसमें रेलवे को 56 फीसदी और आरटीडीसी को 44 फीसदी रेवेन्यू शेयर मिलता था, लेकिन इस बार ट्रेन का किराया और अन्य खर्चे के तौर पर एक फिक्स रेलवे को दी जाएगी। लक्जरी ट्रेन के संचालन को फिर से शुरू करने से पहले निगम अपने बकाया राशि लगभग 42 करोड़ रुपए का भुगतान करेगा। विभिन्न श्रेणियों के तहत, इस ट्रेन में एक रात का शुल्क वर्तमान में 55,000 से 1.53 लाख तक है।

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