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लखनऊ, नफासत नज़ाक़त कारीगरी और शान-ओ-शौक़त का ऐतिहासिक शहर

By Khushnuma

"ये रंग रूप का चमन, ये हुस्न-ओ-इश्क़ का वतन, यही तो वो मुक़ाम है, जहां अवध की शाम है, यहां की सब रवायतें, अदब की शाहकार हैं, अमीर अहल-ए-दिल यहां, ग़रीब जां-निसार हैं" सही मायनों में लखनऊ नफासत और नज़ाक़त का शहर है। लखनऊ को कभी 'सोने की नगरी' और 'शिराज ए हिंद' भी कहा जाता था। जहाँ कदम कदम पर कहकहे, हैं बुलबुलों के चह-चहे। लखनऊ का नाम आते ही तहज़ीब और नज़ाकत की ना जाने क्यूँ बरबस ही याद आ जाती है। लखनऊ के बाशिंदे जो वाक़ई लखनऊ की सरज़मीं से जुड़े हुए हैं उनकी हर बात इतने सलीके-तरीके और मीठे अंदाज़ में होती है की बस ऐसा लगता है मानो मुंह से फूल झड़ रहे हों।

लखनऊ में भले ही नवाब न बचे हों लेकिन उनकी शान-ओ-शौक़त आज भी लखनऊ की संस्कृति में साफ़ साफ़ झलकती है। गोमती नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक नगर अपनी तहज़ीब के लिए दुनिया भर में मशहूर है, इसलिए इस शहर को 'शहर ऐ अदब' भी कहा जाता है। "लखनऊ है तो महज़ गुम्बद-ओ मीनार नहीं,सिर्फ एक शहर नहीं,कूचा ओ बाज़ार नहीं, इसके दामन में मोहब्बत के फूल खिलते हैं, इसकी गलियों में फरिश्तों के पते मिलते हैं, लखनऊ हम पर फ़िदा, हम फ़िदा ऐ लखनऊ"। तो आइये इस बार शहर-ऐ-गुलज़ार 'लखनऊ' की सैर करते हैं।

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लखनऊ की खूबसूरती

लखनऊ की खूबसूरती

कहते हैं अवध जैसी खूबसूरत शाम पूरी दुनिया में कहीं नहीं है और यह एक हद तक सही भी है। क्यूंकि यहाँ गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल जितनी भी दी जाए वो कम ही पढ़ जाती है। कहा जाता है कि अवध के नवाब शाम-ऐ-अवध का खूबसूरत नज़ारा करने के लिए गोमती नदी के किनारे आया करते थे और गोमती के पानी में वह अवध का अक्स देखा करते थे।

Image Courtesy: Vinamra Agrawal

बड़ा इमामबाड़ा

बड़ा इमामबाड़ा

बड़ा इमामबाड़ा अवध की कलात्मक शैली का अद्भुत नमूना है। जिसको अवध के नवाब आसिफुद्दौला ने बनवाया था। इस इमारत में एक बहुत बड़ा हॉल है जिसमे करबला की बहुत सी निशानियाँ रखी हुई हैं। इस हॉल की खासियत यह है कि इसके एक कोने पे जाकर आप कागज़ फाड़ो तो दूसरे कोने में इसकी आवाज़ सुनाई देती है।

Image Courtesy:Aditya22041992

भूलभुलैया

भूलभुलैया

भूलभुलैया बड़े इमामबाड़े के ऊपर ही बना हुआ है। इस भूलभुलैया में 409 दरवाज़ेरहित गलियारे हैं। जिनके बारे में कहा जाता है कि यह सुरक्षा के तहत बनवाए गए थे। यहाँ आने वाला पर्यटक लाख कोशिशों के बाद भी भटक ही जाता है। अगर आप भूलभुलैया का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो बेहतर होगा एक गाइड करलें जिससे रास्ता बताने में आसानी रहे।

Image Courtesy:BOMBMAN

रूमी दरवाज़ा

रूमी दरवाज़ा

बड़े इमामबाड़े की सड़क के सामने ही बड़ा सा आलीशान ऐतिहासिक दरवाज़ा नज़र आता है। यह दरवाज़ा मुग़ल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है इसकी नक्काशी अदूतीय है। इसके अंदर से सेंकडों गाड़ियां गुज़रती हुई बेहद लुभावनी लगती हैं। इस दरवाज़े की ऊंचाई 60 फुट है। इस दरवाज़े खासियत यह है की इसमें कहीं भी लकड़ी या लोहे का इस्तमाल नहीं किया गया है।

Image Courtesy:Ankursingh560

छोटा इमामबाड़ा

छोटा इमामबाड़ा

छोटे इमामबाड़े को 'हुसैनाबाद का इमामबाड़ा' का इमामबाड़ा भी कहा जाता है। इसे अवध के तीसरे नवाब मुहम्मद अलीशाह ने बनवाया था। इस इमामबाड़े में मुहम्मद अलीशाह की कब्र है। यह महीन नक्काशियों वाला अवधकाल की स्थपत्य कला का बेजोड़ नमूना है।

Image Courtesy:A Sarkar

छोटा इमामबाड़ा और उसकी खासियत

छोटा इमामबाड़ा और उसकी खासियत

अंदरूनी व बाहरी नक्काशियों से रचा हुआ बड़े बड़े झूमरों से अपनी ओर आकर्षित करता है। इस इमामबाड़े की खासियत यह है कि यहाँ एक शाही हम्माम बना हुआ है, जिसमे गोमती नदी का पानी आता है। इसमें बने दो हौजों में पहुंचकर यह पानी एक हौज़े में गर्म और दुसरे हौज़े में ठंडा हो जाता है। जो कि किसी भी दृष्टि से बेजोड़ है।

Image Courtesy:Pr1delhi

घड़ी मीनार (क्लॉक टॉवर)

घड़ी मीनार (क्लॉक टॉवर)

छोटे इमामबाड़े के सामने ही क्लॉक टावर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह क्लॉक टावर पूरे भारत का सबसे ऊँचा टॉवर है। जो कि 221 फुट ऊँचा और इसका पेंडुलम 14 फुट लंबा है। चारों और घंटियां लगी इस घड़ी का डायल 12 पंखुड़ियों वाला है।

Image Courtesy:MGA73bot2

रेज़ीडेंसी

रेज़ीडेंसी

लखनऊ में रेज़ीडेंसी भी दर्शनीय स्थलों में से एक है। रेज़ीडेंसी को पुराने समय में 'बेलीशारद' के नाम से जाना जाता था। परन्तु अंग्रेज़ों ने इसपर कब्ज़ा करके इसे अपना निवास स्थान बना लिया था तब से यह रेज़ीडेंसी पड़ गया।

Image Courtesy:Get2himanshu

पिक्चर गैलरी

पिक्चर गैलरी

यह गैलरी छोटे इमामबाड़े के सामने और घंटा घर (क्लॉक टावर) के बगल में मौजूद है। इस गैलरी में अवध के ऐतिहासिक गौरव और नवाबों से सम्बंधित चीज़ें संग्रहित हैं। यहाँ नवाबों की पिक्चर देखने लायक है इन पिक्चरों की खासियत यह है कि आप नवाबों की आँखों में देखते हुए जैसे जैसे घूमते जायेंगे वैसे वैसे आपको महसूस होगा की नवाबों की आँखें मतलब उनकी दृष्टि आपकी और ही है।

Image Courtesy:Vikas

दीनदयाल पार्क

दीनदयाल पार्क

यह पार्क चारबाग रेलवे स्टेशन से मुश्किल से आधा किलोमीटर दूर है। यहाँ एक संगीत मय फव्वारा है। गर्मियों के मौसम में शाम के बाद यहाँ का दृश्य बहुत ही खूबसूरत होता है। इस खूबसूरती को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं।

Image Courtesy:Virendra Kumar Verma

गौतमबुध्द पार्क

गौतमबुध्द पार्क

यह पार्क शहीद स्मारक के पास ही बनी हुई है। इसमें आप स्टीमर का लुफ्त उठाने के साथ साथ बच्चों के छोटे छोटे झूले, बच्चों की रेल गाड़ी, झूले जिसपर हर उम्र के लोग बैठ सकते हैं आदि का आंनद उठा सकते है। यह फैमिली के हिसाब से बहुत अच्छा पार्क है।

Image Courtesy:Khushnuma

टिकैतराय तालाब पार्क

टिकैतराय तालाब पार्क

यूँ तो लखनऊ में बाग़ों की कमी नहीं है। दीनदयाल पार्क है या बेगम पार्क उनमे से एक है टिकैतराय तालाब पार्क जिसमे संगीतमय फव्वारे पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करते हैं। इन बागों की वगह से लखनऊ को 'बागों का शहर' भी कहा जाता है।

Image Courtesy:Khushnuma Parveen

डॉ. आंबेडकर पार्क

डॉ. आंबेडकर पार्क

इस पार्क को बेहद खूबसूरती से योजनाबद्ध तरीके से बनाया गया है। इसलिए यहाँ देखने के लिए और घूमने के लिए बहुत कुछ ख़ास है। इसे देखने से ऐसा लगता है जैसे बौध्द स्तूप हो। जो कि काफी चढाई से बना हुआ है। आप शाम के वक़्त यहाँ का लुफ्त उठा सकते हैं।

Image Courtesy:Ejaz Rizvi

चिड़ियाघर

चिड़ियाघर

लखनऊ का चिड़ियाघर विशेष रूप से दर्शनीय है। जो कि हज़रतगंज के तरफ ही पढता है। यहाँ बच्चों की रेलगाड़ी और बच्चों के झूले मुख्य रूप से आकर्षक हैं। आप भी इस रेल गाडी का लुफ्त उठा सकते हैं।इसके अलावा यहाँ जानवरों की अनेक किस्मों के साथ साथ एक संग्राहलय (म्यूज़ियम) भी है जिसे देखने के लिए यहाँ काफी लोग आते हैं।

Image Courtesy:Victuallers

मकबरे

मकबरे

बेगम हज़रत महल पार्क के सामने ही यह आलीशान मक़बरा बना हुआ है। जिसके पीछे के हिस्से में भातखंडे इंस्टिट्यूट है जहाँ संगीत की शिक्षा दी जाती है और में एक साहित्यिक प्रोग्राम के लिए बना है राय उमानाथ बली।

Image Courtesy:Khalid Ahmed

हज़रतगंज

हज़रतगंज

हज़रतगंज लखनऊ का सबसे लोकप्रिय बाज़ार है जो बाकी जगह से महगा भी है। हज़रतगंज को लखनऊ का दिल भी कहा जाता है। हज़रतगंज में 'लवलेन' नाम की ऐसी जगह है जिसे जोड़ों का मिलन स्थल भी माना जाता है। साथ ही लवलेन बहुत ही अच्छा बाजार भी है जहाँ लड़कियों के कपड़ों से लेकर हर ज़रूरी सामान मिलता है। जिसकी वजह से यह नवयुवक व युवतियों में खासा लोकप्रिय है।

Image Courtesy:Mohitextreme

चौक बाज़ार

चौक बाज़ार

यह बाज़ार चिकन उधोग के लिए विश्व-भर में मशहूर है। यहाँ चिकन के काम के कपड़े देखने व लेने लायक होते हैं, चिकन की कारीगरी देख लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

Image Courtesy:MGA73bot2

ला मार्टिनियर

ला मार्टिनियर

ला मार्टिनियर इमारत यूरोपीय स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। ला मार्टिनियर इमारत ब्रिटिश काल के मेजर जनरल क्लायड मार्टिन अपने रहने के लिए बनवाई थी। इस महल के लॉन में एक झील भी है। मार्टिन ने मरने से पहले अपनी वसीयत में लिखा था कि उसके मरने के बाद इस इमारत में 'ला मार्टिनियर स्कूल' बनाया जायगा। जो कि वैसा की किया गया है।

Image Courtesy: Mohitextreme

विश्वविधालय

विश्वविधालय

भारत के पुरातन विश्वविधालय में से एक है लखनऊ विश्वविधालय जो की विश्व प्रसिद्ध है। लखनऊ की विशाल ऐतिहासिक इमारत देखने लायक है।

Image Courtesy:MGA73bot2

कैसे जाएँ

कैसे जाएँ

वायु मार्ग द्वारा

लखनऊ का एयरपोर्ट, शहर से 14 किमी. दूर अमौसी नामक जगह पर स्थित है। इस एयरपोर्ट से कई देशों और कई शहरों के लिए उड़ाने भरी जाती हैं। दिल्‍ली, मुम्‍बई, पटना और रांची के लिए यहां से नियमित फ्लाइट हैं।

रेल मार्ग द्वारा

लखनऊ में दो मुख्‍य रेलवे स्‍टेशन हैं पहला शहर के केंद्र में और दूसरा चार बाग रेलवे स्‍टेशन है। लखनऊ रेलवे स्‍टेशन से भारत के लगभग सभी शहरों के लिए ट्रेन मिल जाती हैं, शताब्‍दी और राजधानी एक्‍सप्रेस भी यहां चलती हैं।

Image Courtesy:In Transit

कैसे जाएँ

कैसे जाएँ

लखनऊ जाने के लिए फ्लाइट, ट्रेन, बस व टैक्सी की अधिक कजानकारी के लिए बस एक क्लिक करें-

सड़क मार्ग द्वारा

लखनऊ के बसों की अच्‍छी सुविधा उपलब्‍ध है। यहां से स्‍थानीय और बाहरी क्षेत्रों के लिए डीलक्‍स और नॉन डीलक्‍स बसें काफी चलती है जो सस्‍ती और सुविधाजनक हैं।

Image Courtesy:neiljs

कब जाएँ

कब जाएँ

उत्‍तर भारत के अन्‍य शहरों की तरह लखनऊ में भी तीनों मौसम आते हैं : गर्मी, मानसून और सर्दी। वैसे तो यहाँ कभी भी जाया जा सकता है। लेकिन अगर आप लखनऊ घूमने की दृष्टि से जा रहे हैं तो सितंबर से मार्च का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।

Image Courtesy: In Transit

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