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800 साल पुराना ऐसा मंदिर, जिसकी छत आज तक कोई पूरी नहीं करा सका

यूं तो देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान शिव के कई मंदिर है। लेकिन देश में एक ऐसा भी मंदिर है, जो अपने आप में अद्भुत है। इस मंदिर का ऊपरी शिखर यानी की छत नहीं है और ना हीं आज तक इसे कोई पूरा करवा सका। यह मंदिर गुजरात के वलसाड जिले में स्थित है, जो करीब 800 साल पुराना है। इस मंदिर में हर रोज सूर्याभिषेक होता है, भगवान सूर्य स्वयं मंदिर में स्थित महादेव का अभिषेक करते हैं। इस मंदिर का नाम ताड़केश्वर महादेव मंदिर (तड़के का अर्थ होता है - धूप, इसीलिए यहां शिव जी को ताड़केश्वर महादेव के नाम से जाना गया) है।

ताड़केश्वर महादेव मंदिर की कहानी

इस मंदिर को लेकर एक कहानी है कि अब्रामा गांव (जिला - वलसाड) के एक ग्वाला की गाय झुंड से अलग होकर एक निश्चित स्थान पर जाकर खुद से ही दूध की धारा प्रवाहित करती थी, ऐसा हर रोज होता था। जब ग्वाले ने इस बात गांव के बाकी लोगों के साथ साझा की तब सभी गांव वालों ने वहां जाने का निश्चय किया और जब वहां जाकर देखा तो उस स्थान के गर्भ में एक पावन और अद्भुत शिला विराजमान थी।

tarkeshwar mahadev temple

फिर हर रोज ग्वाले द्वारा पवित्र शिला का अभिषेक किया जाने लगा, जिससे शिव जी प्रसन्न होकर उसके स्वप्न में आए और कहा, "उन्हें उस स्थान (घना जंगल) से हटाकर किसी पवित्र स्थान पर विस्थापित करें।" इसके स्वप्न के बारे में जब ग्वाले ने गांव वालों को बताया तो वहां खुदाई का काम शुरू हुआ और तब वहां से करीब 7 फीट लंबा पवित्र शिला मिला, जिसे गांव में ही विधि-विधान से विस्थापित की और एक अच्छा मंदिर भी बनवाया गया, जिसकी शिला कुछ ही दिनों में ढह गई। ऐसा बार-बार होता था और मंदिर का ऊपरी शिखर ध्वस्त हो जाता था।

इस घटनाक्रम के बाद ग्वाले को एक बार फिर भगवान शिव ने स्वप्न देकर बताया कि मंदिर के ऊपर कोई छप्पर या शिखर नहीं बनाया जाए। फिर ग्रामीणों ने ऐसा ही किया और मंदिर के ऊपरी शिखर को खुला रखा, ताकि सूर्य देवता शिवलिंग का अभिषेक करते रहें, जो आज भी मंदिर में देखने को मिलता है।

tarkeshwar mahadev temple

ताड़केश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार

ताड़केश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार साल 1994 में किया गया। इस दौरान मंदिर में 20 फुट के गोलाकार आकृति में खुले शिखर का निर्माण कराया गया। यहां दर्शन करने के लिए शिव भक्तों की लाइन लगी रहती है। श्रावण के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां एक विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है, जहां हजारों की संख्या में भक्तगण दूर-दूर से आते हैं और बाबा के दर्शन करते हैं।

कैसे पहुंचें ताड़केश्वर महादेव मंदिर

ताड़केश्वर महादेव मंदिर पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट सूरत में है, जो यहां से करीब 99 किमी. है। वहीं, यहां पहुचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन वलसाड में है, जो यहां से 7 किमी. है। इसके अलावा यहां बस या निजी वाहन से भी पहुंचा जा सकता है।

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