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दिल्ली के टॉप 10 मंदिर जिनकी सुन्दरता और वास्तु कर देगा एक ट्रैवलर को मंत्र मुग्ध

By Super

वर्तमान में देश की राजनीति का प्रमुख केंद्र और भारत के सबसे प्राचीनतम शहरों में शुमार देश की राजधानी दिल्लीकई मायनों में बेमिसाल है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्राचीन और आदिम से लेके नवीनतम तक यहां ऐसा बहुत कुछ है जो एक घूमने के शौक़ीन उत्साही पर्यटक को वो सब देता है जिसकी उसे तलाश है। ज्ञात हो कि यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है जिसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। मुंबई के बाद दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर दिल्ली जहां अपने ग्लैमर के लिए जाना जाता है तो वहीं ये शहर उनके लिए भी ख़ास रहा है जिन्हें एकांत की तलाश है।

Read in English: Travel to the 10 Famous Temples of Delhi

इस मंत्रमुग्ध कर देने वाली नई और पुरानी दिल्ली के मिश्रण में, आपको भारत का इतिहास, संस्कृति और विस्मित चीजों का संकलन मिलेगा। आपको बताते चलें कि दिल्ली के इतिहास की तरह दिल्ली की संस्कृति भी बडी विविध है और वर्तमान में आपको यहां सभी प्रमुख धर्मों और उन धर्मों से जुड़ी संस्कृतियों के दर्शन हो जाएंगे।

Read : कश्मीर से लेके कन्याकुमारी तक जानें कहां कहां है 'मां दुर्गा' के अलग अलग मंदिर

तो इसी क्रम में आज हम अपने इस आर्टिकल के जरिये आपको अवगत कराने जा रहे हैं दिल्ली के कुछ ऐसे मंदिरों से जो जहां एक तरफ बेहद खूबसूरत और शांत हैं तो वहीँ दूसरी तरफ इन मंदिरों कि वास्तुकला किसी भी पर्यटक का मन मोह सकती है। तो अब देर किस बात की आइये जानें दिल्ली के इन मंदिरों के बारे में जरा गहराई से साथ ही ये भी जानाजाए कि क्यों एक ट्रैवलर को अपनी दिल्ली यात्रा पर इन मंदिरों के दर्शन करने चाहियें। Deal of the day: होटल बुकिंग पर पाएं 50% की छूट

बिरला मंदिर

बिरला मंदिर

दिल्ली के बिरला मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मेट्रो के इस प्रमुख आकर्षण का निर्माण उद्योगपति जी. डी. बिरला द्वारा किया गया जो 1939 में पूर्ण हुआ और जिसका उद्घाटन महात्मा गाँधी ने किया। दिल्ली के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक यह मंदिर देवी लक्ष्मी (धन और संपत्ति की देवी) और नारायण (उनके पति और त्रिमूर्ति के पालक) को समर्पित है। इसके अलावा इस मंदिर के चारों ओर भगवान कृष्ण, शिव, गणेश, हनुमान और बुद्ध को समर्पित छोटे मंदिर भी हैं। यहाँ देवी दुर्गा - शक्ति की देवी, को समर्पित एक मंदिर भी है। हिंदू मंदिर स्थापत्य कला की नगर शैली में बने इस मंदिर का निर्माण पंडित विश्वनाथ शास्त्री नाम के व्यक्ति के मार्गदर्शन में हुआ और इसके पूर्ण होने के बाद महात्मा गाँधी इसके उद्घाटन के लिए इस शर्त पर राज़ी हुए कि इस मंदिर में सभी धर्म और जातियों के लोगों को प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। कनॉट प्लेस के पास मंदिर मार्ग पर स्थित इस मंदिर तक परिवहन के सभी साधनों द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है और सप्ताह में सात दिन सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है।

Photo Courtesy: Ashishbhatnagar72

दिगंबर जैन मंदिर

दिगंबर जैन मंदिर

दिल्ली में लाल किले के पार स्थित दिगंबर जैन मंदिर यहाँ का सबसे पुराना जैन मंदिर है। श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर के नाम से भी प्रसिद्द मंदिर दिल्ली के प्रसिद्द चाँदनी चौक क्षेत्र में भी पाया जा सकत है। सुंदर लाल बलुआ पत्थरों से बना यह मंदिर चाँदनी चौक और नेताजी सुभाष मार्ग के चौराहे पर स्थित है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर है जिसका निर्माण 1656 में किया गया। इस प्रसिद्ध मंदिर को रेड टेम्पल या लाल मंदिर भी कहा जाता है और इसकी स्थापना के बाद से इसमें कई परिवर्तन किये गए हैं। लाल मंदिर के मुख्य देवता भगवान महावीर हैं - जो जैन धर्म के 24 वीं तीर्थंकर थे। इस मंदिर में भगवान आदिनाथ - जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर और भगवान पार्श्वनाथ - भगवान महावीर के पूर्ववर्ती की मूर्तियां भी हैं।

Photo Courtesy: carol mitchell

कालकाजी मंदिर

कालकाजी मंदिर

प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर, भारत में सबसे अधिक भ्रमण किये जाने वाले प्राचीन एवं श्रद्धेय मंदिरों में से एक है। यह दिल्ली में नेहरू प्लेस के पास कालकाजी में स्थित है। यह मंदिर माँ दुर्गा की एक अवतार, देवी काली को समर्पित है।यह मनोकामना सिद्ध पीठ के नाम से भी जाना जाता है। मनोकामना का अर्थ है कि यहाँ भक्तों की सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस मंदिर के पीछे की पौराणिक कथा भी बहुत रोचक है। यह मंदिर ईटों की चिनाई द्वारा बनाया गया था परन्तु वर्तमान में यह संगमरमर से सजा है एवं यह चारों ओर से पिरामिड के आकार वाले स्तंभ से घिरा हुआ है। आपको बताते चलें कि मंदिर का गर्भगृह 12 तरफ़ा है जिसमें प्रत्येक पक्ष पर संगमरमर से सुसज्जित एक प्रशस्त गलियारा है। यहाँ गर्भगृह को चारों तरफ से घेरे हुए एक बरामदा है जिसमें 36 धनुषाकार मार्ग हैं।

Photo Courtesy: Kalkama

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम या स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर दिल्ली में स्थित भारतीय संस्कृति, वास्तुकला, और आध्यात्मिकता के लिए एक सच्चा चित्रण है। इस मंदिर परिसर को पूरा बनने में 5 साल का समय लगा जिसे श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज के कुशल नेतृत्व में पूरा किया गया। इस मंदिर को 11,000 कारीगरों ने मिलकर बनाया है जिसमें 3000 से ज्यादा स्वयंसेवक भी शामिल थे, इस मंदिर परिसर का उदघाटन आधिकारिक तौर पर 6 नवम्बर, 2005 को किया गया। गौरतलब है की मंदिर वास्तु शास्त्र और पंचरात्र शास्त्र की बारीकियों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। आपको बता दें कि पूरा मंदिर परिसर 5 प्रमुख भागों में विभाजित है। मुख्य मंदिर परिसर ठीक बीचोंबीच यानी केंद्र में स्थित है। इस 141फीट उच्च संरचना में 234 शानदार नक़्क़ाशीदार खंभे, 9 अलंकृत गुंबदों, 20 शिखर , एक भव्य गजेंद्र 20,000 मूर्तियां शामिल हैं । यदि आप दिल्ली में हैं तो इस मंदिर का दौर अवश्य करिए यहाँ देखने के लिए आपको बहुत कुछ मिलेगा।

Photo Courtesy: Kapil.xerox

 पूजा का बहाई स्थान

पूजा का बहाई स्थान

पूजा का बहाई स्थान : 1986 में नई दिल्ली में इसकी स्थापना के बाद से पर्यटकों ने स्वयं यह सिद्ध किया है कि यह एक अवश्य घूमने योग्य आकर्षण है । कैसे? पूजा के इस स्थान को लोटस टेंपल (मंदिर) के नाम से जाना जाता है जो प्रतिवर्ष बहुत बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बहापुर नाम के छोटे से गाँव में स्थित यह स्थान नई दिल्ली का प्रमुख आकर्षण स्थल है और यह भारतीय महाद्वीप में संप्रदाय का प्रमुख मंदिर है तथा इसने अपनी सुंदर स्थापत्य कला के लिए कई पुरस्कार भी जीते हैं। इस स्थान की सुंदरता के कारण अवश्य देखने के अलावा इसका वर्णन कई प्रकाशनों और टी. वी. के कई कार्यक्रमों में किया गया है, तथा इसने विभिन्न कार्यक्षेत्रों में कई पुरस्कार भी जीते हैं।

Photo Courtesy: Arian Zwegers

छतरपुर मंदिर

छतरपुर मंदिर

छतरपुर मंदिर या श्री अध्‍य कात्‍यानी शक्ति पीठ, दक्षिण दिल्‍ली में छतरपुर में स्थित है जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर है। यह मंदिर देवी कात्‍यायनी, जो देवी दुर्गा का छठां स्‍वरूप है को समर्पित है। अन्‍य मंदिरों के विपरीत इस मंदिर में हर जाति और हर धर्म के श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति है। इस मंदिर को देवी दुर्गा मां के एक उत्‍साही भक्‍त स्‍वामी नागपाल ने बनवाया था। यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है और आसपास खूबसूरत बगीचों से घिरा हुआ है। मंदिर की नक्‍काशी, दक्षिण भारतीय वास्‍तुकला में की गई है। इस विशाल मंदिर परिसर में हमेशा निर्माण चलता रहता है जो कभी समाप्‍त नहीं होता है। मंदिर परिसर लगभग 70 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और इसके अंदर लगभग 20 छोटे और बड़े मंदिर भी तीन विभिन्‍न परिसरों में बने हुए हैं।

Photo Courtesy: Sujit kumar

गौरी शंकर मंदिर

गौरी शंकर मंदिर

दिल्‍ली के चांदनी चौक में दिगंबर जैन लाल मंदिर के नजदीक 800 साल पुराना गौरी शंकर मंदिर स्थित है। यह मंदिर भारत के शैव सम्‍प्रदाय के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। इसे कॉस्मिक पिलर या पूरे ब्रह्मांड का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर को एक मराठा सैनिक आपा गंगाधर के द्वारा बनाया गया था जो भगवान शिव का परम भक्‍त था। यह मंदिर 1761 में बनाया गया था। मंदिर के अंदर भगवान शिव, उनकी पत्‍नी देवी पार्वती और उनके पुत्र गणेश और कार्तिक की मूर्ति रखी हुई है। शिव और पार्वती की सुसज्जित मूर्ति, शिवलिंग के पीछे स्थित हैं। शिवलिंग के ऊपर एक चांदी का बर्तन रखा है जिससे सतत् रूप से पानी शिवलिंग पर गिरता रहता है।

Photo Courtesy: rajkumar1220

श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर या इस्कॉन मंदिर

श्री श्री राधा पार्थसारथी मंदिर या इस्कॉन मंदिर

दक्षिणी दिल्ली के संतनगर, निकट नेहरू प्लेस के पास स्थित है। यह इस्कॉन समाज का मंदिर है। इस समाज के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद जी है। आपको बताते चलें कि इस्कॉन या अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ को "हरे कृष्ण आंदोलन" के नाम से भी जाना जाता है। इसे 1966 में न्यूयॉर्क नगर में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने प्रारंभ किया था। देश-विदेश में इसके अनेक मंदिर और विद्यालय है।

Photo Courtesy: Bill william compton

श्री उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर

श्री उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर

पूर्वी दिल्ली में एक मंदिर है जो भगवान कृष्ण को समर्पित है जिसका नाम श्री उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर है। मयूर विहार इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1983 के दौरान किया गया थाजिसमें दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर केरल स्थित भगवान कृष्ण के मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। ये मंदिर अपने वार्षिक कार्यक्रमों के चलते स्थानीय लोगों में बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। यहाँ ये कार्यक्रम हर साल आयोजित किये जाते हैं। धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा, मंदिर भी जनता के सामाजिक - सांस्कृतिक विकास को पूरा करता है। मंदिर में एक धर्मार्थ अस्पताल, अर्शा धर्म परिषद चलता है इसके अलावा यह मंदिर शिक्षा और रोजगार को भी बढ़ावा देता है। यहाँ सभागार भी हैं जिनकी आप ऑनलाइन बुकिंग कर इसमें पूजा कर सकते हैं।

Photo Courtesy: Native Planet

योगमाया मंदीर

योगमाया मंदीर

योगमाया मंदिर जिसे योगमाया मंदिर जिसे जोगमाया के नाम से भी जाना जाता है दिल्ली का एक प्राचीन मंदिर है जो देवी योगमाया को समर्पित है। ग्रंथों के अनुसार योगमाया भगवान श्री कृष्ण की बहन थी। महरोली में स्थित और क़ुतुब कॉम्प्लेक्स के पास बना ये मंदिर हर साल देश दुनिया के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। इस मंदिर के बारे में लोगों का मत है कि ये महाभारतकाल का मंदिर है जहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। यदि आप दिल्ली में हैं तो हमारा सुझाव है की आप इस मंदिर के दर्शन अवश्य करें।

Photo Courtesy: Nvvchar

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