India
Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »पहाड़ की चोटी पर स्थित है इस्लामी स्मारक थिरुपरनकुंद्रम दरगाह, जानें इसकी पूर्ण जानकारी

पहाड़ की चोटी पर स्थित है इस्लामी स्मारक थिरुपरनकुंद्रम दरगाह, जानें इसकी पूर्ण जानकारी

तमिलनाडु में मदुरै के पास थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ की चोटी पर एक इस्लामी स्मारक थिरुपरनकुंद्रम दरगाह है। मदुरै सल्तनत के अंतिम सुल्तान सिकंदर शाह की 14वीं सदी की कब्र पर 17वीं से 18वीं सदी में स्मारक बनाया गया था। यह क्षेत्र के तमिल मुसलमानों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।

थिरुप्परनकुंद्रम दरगाह थिरुपरनकुंद्रम शहर में अपनी ऐतिहासिक चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है। यह शहर मदुरै शहर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।

thiruparankundram dargah

दरगाह का इतिहास

थिरुपरनकुंद्रम शहर अल्पकालिक मदुरै सल्तनत की राजधानी थी। इस दक्षिण भारतीय सल्तनत का गठन दिल्ली सल्तनत के अला अल-दीन खिलजी की सेना द्वारा 1310 में सुंदर पांड्या की मदद करने के बहाने तमिल पर छापा मारने के बाद किया गया था, जिसमें मदुरै प्राथमिक लक्ष्यों में से एक था।

मुस्लिम सेना ने मदुरै क्षेत्र को तबाह कर दिया और कस्बों को लूट लिया साथ ही एक साल में मंदिरों को ध्वस्त कर दिया। इस सामाजिक और राजनीतिक अराजकता के बाद दिल्ली लौटने से पहले, उन्होंने मदुरै-थिरुपरनकुंदरम से नियंत्रित एक मुस्लिम शासन स्थापित किया था।

खिलजी युग के बाद दिल्ली सल्तनत का तुगलक युग आया, जब जलाल अल-दीन अहसान ने मदुरै सल्तनत पर शासन किया। 1334 ईस्वी में, अहसान ने विद्रोह किया और दिल्ली सल्तनत से अलग हो गए। मदुरै क्षेत्र का दौरा करने वाले मोरक्को के यात्री और विद्वान इब्न बतूता के संस्मरणों के अनुसार, उन्होंने खुद को सुल्तान अहसान शाह के रूप में घोषित किया। यह अलग मदुरै सल्तनत की शुरुआत थी। इन सुल्तानों ने दिल्ली सल्तनत का प्रत्यक्ष समर्थन खो दिया था और स्थानीय आबादी पर शासन करने के लिए संघर्ष किया था। मदुरै सल्तनत की सेनाओं ने स्थानीय हिंदू आबादी का "क्रूरता से दमन" किया और पड़ोसी हिंदू राज्यों के साथ लगातार युद्ध करते रहें।

अहसान शाह और उनके उत्तराधिकारी कई सुल्तान इन लड़ाइयों में मारे गए। कर्नाटक के उत्तर में, विजयनगर साम्राज्य की स्थापना हो चुकी थी और इसकी बड़ी सेना सुल्तान सिकंदर शाह के खिलाफ युद्ध में शामिल हो गई थी। उन्होंने 1377 ई. में थिरुपरनकुंद्रम को घेर लिया और बंद कर दिया।सिकंदर शाह, उनके दरबार के अधिकारी और सैनिक थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर चले गए। विजयनगर सेना ने उनका पीछा किया और उन्हें मार डाला।

thiruparankundram dargah

बता दें मुस्लिम कब्रें पहाड़ी की चोटी के रास्ते में पाई जाती हैं, कुछ में बड़े मकबरे हैं। ये मदुरै सल्तनत के सैनिकों और अधिकारियों के हैं। सिकंदर शाह अपनी अंतिम लड़ाई में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर मर गए और हिंदू सेनापति ने सुल्तान की कब्र को वहां बनाने की अनुमति दी। 17वीं शताब्दी तक, पहाड़ी की चोटी पर केवल कब्र थी। इस क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय ने तब एक बड़ा स्मारक और एक क्षेत्रीय मुस्लिम तीर्थ स्थल का निर्माण किया, जिसे थिरुपरनकुंदरम दरगाह कहा जाता है।

थिरुपरनकुंदरम दरगाह में सुल्तान की कब्र है जिसमें एक मकबरा और एक बड़ी चट्टान तिरछे शीर्ष पर रखी गई है। इस कब्र के ऊपर एक अधिक आधुनिक मंदिर है जिसमें एक चौकोर मकबरा कक्ष है और इसके पूर्व में एक संलग्न मस्जिद है। मस्जिद का हॉल मकबरे के कक्ष के स्तर से लगभग ऊपर है।

थिरुपरनकुंदरम दरगाह की अधिकांश वास्तुकला पत्थर के ब्लॉक का उपयोग करती है और हॉल के स्तंभों में नागपदम नक्काशी शैली और तमिलनाडु के स्मारकों में पाए जाने वाले कमल हैं जो मदुरै सल्तनत से पहले के हैं। स्मारक की छत पत्थर के स्लैब से बनी है। मस्जिद का कोई अलग मिहराब नहीं है और यह सिकंदर शाह के मकबरे के कक्ष में खुलता है।

दरगाह का त्योहार

हजरत सुल्तान सिकंदर बादशाह शहीद का वार्षिक उर्स त्योहार हर हिजरी वर्ष में रजब के इस्लामी महीने की 17 वीं रात को मनाया जाता है। इस दिन हजारों लोग पहाड़ी की चोटी पर स्थित दरगाह के दर्शन करने आते हैं।

thiruparankundram dargah

कैसे पहुंचे थिरुपरनकुंदरम दरगाह

मदुरै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से, थिरुपरनकुंदरम दरगाह 12.6 KM दूर है। अदुरई जंक्शन रेलवे स्टेशन से 8.8 किमी, तिरुपरनकुंद्रम स्टेशन से 1.9 किमी और थिरुपरनकुंद्रम कोविल बस स्टॉप से 2.8 किमी की दूरी पर थिरुपरनकुंदरम दरगाह है।

तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X