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जानिये कैसे अपने आप में अनोखे हैं, भारत के ये टॉप 20 नेशनल पार्क

By Syedbelal

भारत के अलग अलग वन्यजीव अभ्यारण्य हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहे हैं। चाहे खूंखार भेड़िया हो, दहाड़ता शेर हो, चालाक लोमड़ी हो या फिर घास के हरे भरे मैदान में अठखेलियां करते हिरनों और नीलगायों का झुंड, जानवर किसे नहीं पसंद हैं। आज हमारा भारत अलग अलग प्रकार के कई सारे जीव जंतुओं और वनस्पतियों का घर है। यहां के जंगलों में आपको वो सब मिल जायगा जिसकी कल्पना आपने की होगी। ज्ञात हो कि वन्य जीवन प्रकृति की एक अमूल्य देन है जो अपने आप में बेमिसाल है। जानिये उस गिर को जहां रहते हैं खूंखार मगर बेहद खूबसूरत एशियाई शेर

लगभग 7517 किलो मीटर समुंद्र तट,हिमालय, घाट, थार रेगिस्तान और सुंदरवन तक फैली असमान स्थलाकृति और चार अलग मौसम भारत को एक बेहतरीन डेस्टिनेशन बनाते हैं जहां आपको अरब महासागर से लेके बंगाल की खाड़ी और कश्मीर से लेके केरल और कन्याकुमारी तक आपको अनोखी जैव विविधता दिखेगी। अगर आज भारत में नेशनल पार्क की संख्या पर बात करें तो मिलता है कि आज भारत में कोई सवा सौ के करीब नेशनल पार्क हैं।

आज भारत पशु प्रेमियों और प्रकृति से लगाव रखने वालों का बेस्ट डेस्टिनेशन बन गया है। यहां जहां आपको एक तरफ असम में एक सींघ वाला गैंडा मिलेगा तो वहीं दूसरी तरफ आप कश्मीर में कस्तूरी मृग के दर्शन कर सकेंगे। तो चलिए इसी क्रम में आज हम आपको अवगत कराते हैं भारत के कुछ प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों से। आइये जानें कैसे हैं भारत के ये राष्ट्रीय उद्यान।

अरिगनार अन्ना जूलॉजिकल पार्क

अरिगनार अन्ना जूलॉजिकल पार्क

अरिगनार अन्ना जूलॉजिकल पार्क भारत के तमिलनाडु राज्य में है जिसे वंडालूर चिड़ियाघर के नाम से भी जाना जाता है। ये स्थान चेन्नई शहर के मुख्य बिंदु से 31 किलोमीटर की दूरी पर है। 1855 में स्थापित इस जू को भारत का पहला पब्लिक ज़ू होने का गौरव प्राप्त है। 602 हेक्टेयर में फैले इस जू में जानवरों की कई प्रजातियां वास करती है।

बांधवगढ़ नेशनल पार्क

बांधवगढ़ नेशनल पार्क

मध्यप्रदेश के विंध्य पर्वत में फैला बांधवगढ़ नेशनल पार्क बाघों और अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। करीब 400 किमी तक फैले इस पार्क में लहलहाते हुए जंगल, खड़ी चट्टानें और खुले मैदान हैं। पार्क में कई ऐसे स्थान हैं जो टूरिस्ट स्पॉट का काम करते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में स्तनपाई की 22 प्रजाति सहित पक्षियों की 250 प्रजातियां पाई जाती हैं। इस अभ्यारण्य में घूमने पर आप बाघ, एशियाई सियार, धारीदार लकड़बग्घा, बंगाली लोमड़ी, राटेल, भालू, जंगली बिल्ली, भूरा नेवला और तेंदुआ सहित कई तरह के जानवर देख सकते हैं।

 बांदीपुर नेशनल पार्क

बांदीपुर नेशनल पार्क

बांदीपुर नेशनल पार्क (बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान), बांदीपुर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के साथ साथ रोमांच प्रेमियों के लिए भी एक आदर्श स्थान है। 800 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए इस पार्क (उद्यान) में प्रचुर मात्रा में सुंदर, गहरा और घना जंगल है। 1931 में मैसूर के महाराजा ने इस पार्क (उद्यान) की स्थापना की थी, जो उस समय 90 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में था। यह पार्क(उद्यान) कई जानवरों जैसे बाघ, चार सींगों वाला हिरण, विशाल गिलहरी, हाथी, हार्नबिल, जंगली कुत्ते, चीता, निष्क्रिय भालू, और गौर को प्राकृतिक आवास प्रदान करता है। जानवरों के साथ साथ यहाँ कुछ दुर्लभ प्रजाति के पक्षी भी पाए जाते हैं जिसके अंतर्गत प्रवासी और निवासी पक्षी आते हैं।

चिन्‍नार वन्‍यजीव अभयारण्‍य

चिन्‍नार वन्‍यजीव अभयारण्‍य

चिन्‍नार वन्‍यजीव अभयारण्‍य, पोल्लाची से 65 किमी. की दूरी पर स्थित है। इस अभयारण्‍य में 34 प्रकार के स्‍तनधारी जीव पाएं जाते है जिनमें से पैंथर, स्‍पॉटेड हिरन, गौर, टाइगर, हाथी, बॉनेट मकाऊ, नीलगिरि तहर, हनुमान मंकी और ग्रिल्‍ड जाइंट स्‍वक्‍वीरिल आदि पाएं जाते है। यहां का मुख्‍य आकर्षण वाला जीव ग्रिजल्‍ड जाइंट स्‍क्‍वीरल, थुवनम झरना और पैरोनाममिक वॉच टॉवर है जो पूरे पार्क का सुंदर दृश्‍य प्रदान करता है।

कॉर्बेट नेशनल पार्क

कॉर्बेट नेशनल पार्क

कॉर्बेट नेशनल पार्क वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है जो प्रकृति माँ की शांत गोद में आराम करना चाहते हैं। पहले यह पार्क (उद्यान) रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था परंतु वर्ष 1957 में इसका नाम कॉर्बेट नेशनल पार्क (कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान) रखा गया। इस पार्क का नाम प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी, प्रकृतिवादी और फोटोग्राफर जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया। उनकी प्रसिद्द पुस्तक " मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं" में कुमाऊं में शिकार के अनुभवों का वर्णन किया गया है।

दांदेली वन्यजीव अभ्यारण्य

दांदेली वन्यजीव अभ्यारण्य

दांदेली की यात्रा पर आये पर्यटकों को दांदेली वन्यजीव अभ्यारण्य अवश्य आना चाहिये जो कि इस शहर का प्रमुख आकर्षण है। एक चयनित वन क्षेत्र को 10 मई 1956 में दांदेली वन्यजीव अभ्यारण्य माना गया जिसे सन् 2006 में दांदेली अन्शी टाइगर रिज़र्व के रूप में घोषित किया गया। इस अभ्यारण्य में पहुँचने पर पर्यटकों को खड़ी चढ़ाइयों, गहरी घाटियों और पहाड़ी वन क्षेत्रों को देखने का मौका मिलता है। यह अभ्यारण्य 834.16 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला है और 100 से 970 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह अभ्यारण्य काले तेन्दुयें जैसे कई अनोखे और दुर्लभ प्रजातियों का घर है।

दुधवा राष्‍ट्रीय पार्क

दुधवा राष्‍ट्रीय पार्क

दुधवा नेशनल पार्क, भारत - नेपाल सीमा के पास उत्‍तर प्रदेश राज्‍य के तराई बेल्‍ट में स्थित है। इसे 1958 में वन्‍यजीव अभयारण्‍य के रूप में स्‍थापित किया गया था और 1977 में यह एक राष्‍ट्रीय उद्यान बन गया था। आज, यह उद्यान दो भागों में विभाजित है : किशनपुर वन्‍यजीव अभयारण्‍य और कतरनियाघाट वन्‍यजीव अभयारण्‍य। इस क्षेत्र में अधिकाश: जलोढ़ मैदान, झील, पूल और कई नाले हैं। यहां की भारतीय - गंगा भूमि पर विविध वनस्‍पति के अलावा, विभिन्‍न प्रकार के जीव जन्‍तु और चिडि़यां भी पाई जाती है जिनमें लुप्‍तप्राय दलदल हिरण तेंदुआ, फिशिंग कैट, रैटल, सिवेट, सियार, हॉग डियर और बार्किंग डियर भी शामिल है।

गिर राष्ट्रीय उद्यान

गिर राष्ट्रीय उद्यान

एशियाई शेर दुनिया में कहीं और नहीं बल्कि सिर्फ गिर राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात में पैदा होते है। यह मन जाता है की जूनागढ़ के नवाब ने इन शेरो की रक्षा करी थी तब यह केवल 13 थे। हालाँकि, यह आंकड़ा बाद में पाए गए अभिलेखों के अनुसार विवादास्पद रहा है। जंगल के निवास स्थान और वातावरण इस जगह इन शेरों के लिए सुरक्षित जगह बनाता है। जबसे बढती मानव जनसंख्या ने एशियाई शेरों के निवास स्थान को खेतों से रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है तबसे इन बड़ी भारतीय बिल्लियाँ विलुप्त होने के कगार पे आ गयी हैं। पशु प्रेमियों यहाँ शेरों की लुप्तप्राय उप प्रजाति को देखने यहाँ आते हैं।

 कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान

यह भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान हैं। मध्य प्रदेश अपने राष्ट्रीय पार्को और जंगलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां की प्राकृतिक सुन्दरता और वास्तुकला के लिए विख्यात कान्हा पर्यटकों के बीच हमेशा ही आकर्षण का केन्द्र रहा है। कान्हा जीव जन्तुओं के संरक्षण के लिए विख्यात है। यह अलग-अलग प्रजातियों के पशुओं का घर है। जीव जन्तुओं का यह पार्क 1945 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। रूडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध किताब और धारावाहिक जंगल बुक की भी प्रेरणा इसी स्‍थान से ली गई थी।

 काजीरंगा राष्‍ट्रीय उद्यान

काजीरंगा राष्‍ट्रीय उद्यान

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम के गर्व में से एक है। यह उल्लेख करना जरूरी है कि यह लुप्तप्राय भारतीय एक सींग वाले गैंडे का घर है और दुनिया में बाघों की सबसे अधिक घनत्व को समयोजित करते हुए, 2006 में इसे बाघ अभयारण्य के रूप में भी घोषित किया गया। राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व विरासत स्थल भी है। यह लगभग 429.93 कि.मी के वर्ग के क्षेत्र वाला एक बड़ा उद्यान है। यह असम के दो जिलों - गोलाघाट और नोआगांव के अंतर्गत आता है।

मानस नेशनल पार्क

मानस नेशनल पार्क

मानस नेशनल पार्क असम का एक प्रसिद्ध पार्क है। इसे यूनेस्को नेचुरल वर्ल्ड हेरिटेज साइट के साथ-साथ प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व, बायोस्फियर रिजर्व और एलिफेंट रिजर्व घोषित किया गया है। यह हिमालय के फुट्हिल पर स्थित है और भूटान तक फैला हुआ है, जहां इसे रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। यह पार्क बालों वाले खरगोश, असम के छतरी वाले कछुए, नाटे कद वाले सुअर और सुनहरे लंगूर सहित कई लुप्तप्राय: जानवरों का घर है। यहां जंगली पानी की भैंस भी बड़ी संख्या में पाई जाती है। इस पार्क में स्तनपाई की 55, पक्षी की 380, सरीसृप की 50 और उभयचर की 3 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती है।

नागरहोल नेशनल पार्क

नागरहोल नेशनल पार्क

नागरहोल शहर की यात्रा पर पर्यटक को नागरहोल राष्ट्रीय पार्क का दौरा अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व का एक हिस्सा है। यह राष्ट्रीय पार्क, राजीव गांधी नेशनल पार्क के रूप में जाना जाता है, देश में सबसे अच्छे वन्यजीव भंडार के रूप में माना जाता है। वर्ष 1955 में स्थापित यह, शानदार झरने, सुंदर घाटियों और पतली धाराओं के शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है।

 पन्‍ना राष्‍ट्रीय उद्यान

पन्‍ना राष्‍ट्रीय उद्यान

पन्‍ना राष्‍ट्रीय उद्यान, पन्‍ना शहर के पास में स्थित है लेकिन यह मध्‍य प्रदेश के छतरपुर जिले का हिस्‍सा है। यह पार्क, राज्‍य का पांचवा और देश का बाईसवां, टाइगर रिजर्व पार्क है। इस पार्क को पर्यटन मंत्रालय के द्वारा देश का सबसे अच्‍छा और कायदे से रखा गया पार्क घोषित किया गया और सम्‍मान से नवाजा गया। बाघों के अलावा, इस राष्‍ट्रीय पार्क में अन्‍य जानवरों व सरीसृपों का भी घर है।

पेंच नेशनल पार्क

पेंच नेशनल पार्क

पेंच नेशनल पार्क सतपुड़ा की पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में स्थित है। इस स्थान का नामकरण पेंच नदी के कारण हुआ है जो कि पेंच नेशनल पार्क के साथ-साथ उत्तर से दक्षिण की और बहती है। यह पार्क मध्य प्रदेश की दक्षिणी सीमा में महाराष्ट्र के पास स्थित है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा इसे 1983 में नेशनल पार्क घोषित किया गया और 1992 में इसे अधिकारिक रूप से भारत का उन्नीसवा टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, जवाहर लाल नेहरू ग्रेट हिमालयन पार्क के रूप में भी जाना जाता है, कुल्लू के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक है। 50 वर्ग किमी का एक क्षेत्र में फैला, राष्ट्रीय पार्क 30 से अधिक स्तनधारियों और पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियों सहित वनस्पतियों और पशुवर्ग की प्रजातियों की एक विस्तृत विविधता का घर है। यह विशेष रूप से पश्चिमी ट्रैगोपैन, पक्षियों की अत्यधिक लुप्तप्राय प्रजाति, के पार्क के जंगलों में रहने के लिए जाना जाता है। यह पार्क, कँवर वन्यजीव अभयारण्य, रूपी भाभा अभयारण्य और पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान के साथ साथ, उत्तर भारत में पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के सबसे बड़े पारिस्थितिकी प्रणाली क्षेत्र है जोकि अपेक्षाकृत अनछुये हैं।

पेरियार वन्यजीव अभयारण्य

पेरियार वन्यजीव अभयारण्य

थेक्केडी में स्थित सबसे अधिक घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक पेरियार वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान ने अप्रत्याशित रूप से केरल वन्यजीव पर्यटन का चेहरा बदल दिया है पेरियार झील (जो दिलचस्प एक कृत्रिम झील है) के किनारे स्थित यह अभ्यारण्य घने सदाबहार वनों, मिस्टी पर्वत इलाकों और हरे-भरे घास के मैदानों से घिरा है।

 रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, उत्तर भारत में सबसे बड़ा वन्यजीव भंडार में से एक है, जो राजसी खेल संरक्षण था। 1955 में, यह एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था. बाद में, 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के पहले चरण में इसको शामिल किया गया। रणथंभौर वन्यजीव अभयारण्य को 1980 में राष्ट्रीय पार्क का दर्जा प्रदान किया गया था. बाघों के अलावा, राष्ट्रीय पार्क में विभिन्न जंगली जानवरों, सियार, चीते, हाइना, दलदल मगरमच्छ, जंगली सुअरों और हिरण के विभिन्न किस्मों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान के रूप में कार्य करता है, इसके अलावा, वहाँ जैसे जलीय वनस्पति, लिली, डकवीड और पार्क में कमल बहुतायत है।

 ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान

ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान भारत के महाराष्ट्र राज्य के चंद्रपुर जिले में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है। इस राष्ट्रीय उद्यान का शुमार महाराष्ट्र राज्य के सबसे बड़े और पुराने नेशनल पार्क के रूप में होता है। आपको बताते चलें कि आज इस नेशनल पार्क में 43 टाइगर्स हैं।

सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान

सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान

दिल्ली - अलवर - जयपुर सड़क मार्ग पर स्थित सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान, जो सरिस्का टाइगर रिजर्व भी है,राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। यह स्थान जो कभी अलवर राज्य में एक शिकारगाह थी,1955 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित हुआ तथा 1979 में इसे एक राष्ट्रीय पार्क का दर्जा मिला। यह राष्ट्रीय उद्यान सुंदर अरावली की पहाड़ियों में स्थित है तथा 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां घास, शुष्क पर्णपाती वन,चट्टानें और चट्टानी परिदृश्य दिखाई पड़ते हैं। इस क्षेत्र के बड़े हिस्से में धाक के वृक्ष पाये जाते है और यहां विभिन्न वन्यजीव प्रजातियं रहती हैं।

अलीपुर चिड़ियाघर

अलीपुर चिड़ियाघर

ब्रिटिश युग को याद करने के लिए पर्यटक अलीपुर चिड़ियाघर साल भर आते रहते हैं। इस पार्क की खूबसूरती अद्भुत है और प्रेरणादायक है जो फ़ोटोग्राफी के शौक़ीन लोगों के लिए आदर्श कैनवास है, और हल्के मानसून वाली दोपहर को परिवार के साथ घूमने के लिए एक आदर्श जगह है। हाल ही में इस पार्क को एक कछुए के लिए प्रशंसित किया गया था जो कथित तौर पर 250 वर्षों तक जीवित रहा।

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