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एक ट्रैवलर की नजर से देखे इलाहाबाद को

Written By: Goldi

प्रयाग के नाम से विख्यात इलाहाबाद हिंदुयों के प्रमुख तीर्थों में से एक है। प्रयाग के नाम से प्रसिद्ध इलाहाबाद का वर्णन वेदों के साथ-साथ रामायण और महाभारत में भी मिलता है। 1575 में मुगल बादशाह अकबर ने इस शहर का नाम इलाहाबास रखा था, जो बाद में इलाहाबाद के नाम से जाना जाने लगा। उर्दू से अनुवाद में इलाहाबाद का मतलब है 'अल्लाह का बाग़'।

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यह भारत की तीन पवित्र नदियों की मिलन स्थली है।यह जगह हिन्दू और पंडितों द्वारा काफी पवित्र समझा जाता है। उनका मानना है कि यहां डुबकी लगाने से सारे बुरे कर्म धुल जाते हैं और मनुष्य पुनर्जन्म की प्रक्रिया से भी मुक्त हो जाता है। यह जगह हर 12 साल में एक बार कुंभ मेला आयोजित करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर 6 साल बाद अर्धकुंभ का आयोजन भी किया जाता है।

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आज इलाहाबाद में घूमने के लिए बहुत कुछ है। तस्वीरों में ट्राइबल इंडिया यहां के पर्यटन स्थलों में मंदिर, किला और विश्वविद्यालय शामिल हैं। तीर्थ का केन्द्र होने के कारण यहां कई प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। तो अब देर किस बात की आइये जानें कि इलाहाबाद की यात्रा के दौरान क्या क्या देखना और करना चाहिए आपको।

त्रिवेणी संगम

त्रिवेणी संगम

इलाहाबाद के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक त्रिवेणी संगम काफी प्रसिद्द है ...यह भारत की तीन पवित्र नदियों की मिलन स्थली है। "त्रिवेणी संगम" इसका आधिकारिक नाम है और यहां गंगा, जमुना और लोककथाओं के अनुसार सरस्वती नदी आपस में मिलती है। ऐसा माना जाता है कि सरस्वती नदी जमीन के अंदर समा गई है। यह जगह हिन्दू और पंडितों द्वारा काफी पवित्र समझा जाता है। उनका मानना है कि यहां डुबकी लगाने से सारे बुरे कर्म धुल जाते हैं और मनुष्य पुनर्जन्म की प्रक्रिया से भी मुक्त हो जाता है। यह जगह हर 12 साल में एक बार कुंभ मेला आयोजित करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर 6 साल बाद अर्धकुंभ का आयोजन भी किया जाता है।PC: Partha Sarathi Sahana

इलाहाबाद संग्राहालय

इलाहाबाद संग्राहालय

इलाहाबाद संग्राहालय का निर्माण 1931 में किया गया था और संस्कृति मंत्रालय इसके लिए फंड मुहैया कराता है। अनूठी कलाकृतियों के संग्रहण के मामले में इस संग्राहालय की खासी प्रतिष्ठा है। यह संग्राहालय चंन्द्रशेखर आजाद पार्क के बगल में स्थित है। 1947 में जब भारत आजाद हुआ था तभी इस संग्राहालय का उद्घाटन किया गया था। यहां 18 अलग-अलग गैलरी है, जिसमें पुरातात्त्विक खोज, प्राकृतिक इतिहास प्रमाण पत्र, आर्ट गैलरी और लाल-भूरे मिट्टी से बनी प्राचीन कलाकृतियां शामिल है। यहां जवाहरलाल नेहरू से जुड़े कुछ दस्तावेज और निजी चीजें के अलावा स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृति चिन्ह भी प्रदर्शन के लिए रखी गई है।

खुसरो बाग

खुसरो बाग

दिवारों से अच्छी तरह से घिरा खुसरो बाग इलाहाबाद जंक्शन के करीब ही है। यहां मुगल बादशाह जहांगीर के परिवार के तीन लोगों का मकबरा है। ये हैं- जहांगीर के सबसे बड़े बेटे खुसरो मिर्जा, जहांगीर की पहली पत्नी शाह बेगम और जहांगीर की बेटी राजकुमारी सुल्तान निथार बेगम। इन्हें 17वीं शताब्दी में यहां दफनाया गया था। इस बाग़ में स्थित कब्रों पर करी गयी नक्काशी देखते ही बनती है जो मुग़ल कला संग स्थापत्य कला का एक जीवंत उदाहरण है।PC: सत्यम् मिश्र

आनंद भवन

आनंद भवन

आनंद भवन का शब्दिक अर्थ होता है- खुशियों का घर। यह नेहरू-गांधी परिवार का पुस्तैनी मकान है, जिसे अब स्वराज भवन के नाम से जाना जाता है। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू ने जब इस मकान को खरीदा था तब यह एक बुचड़खाना हुआ करता था। उन्होंने इस मकान का पूरी तरह से नवीनीकरण किया। उन्होंने इस मकान को इंग्लिश लुक देने के लिए यूरोप और चीन से फर्नीचर मंगवाए। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के समय इस घर का प्रयोग एक मुख्यालय के तौर पर किया जाता था और यहां विद्वानों और राजनेताओं की बैठकें हुआ करती थी।

PC: Gurpreet singh Ranchi

इलाहाबाद किला

इलाहाबाद किला

अपने समय में सबसे उत्कृष्ट समझे जाने वाले इलाहाबाद किला का निर्माण 1583 में किया गया था। यह अकबर के द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा किला है। अपने विशिष्ट बनावट, निर्माण और शिल्पकारिता के लिए जाना जाने वाला यह किला गंगा और युमाना के संगम पर स्थित है। इस किले का इस्तेमाल अब भारतीय सेना द्वारा किया जाता है। आम नागरिकों के लिए कुछ हिस्सों को छोड़कर बाकी हिस्सों में प्रवेश वजिर्त है। ऐसा कहा जाता है कि किले में अक्षय वट यानी अमर वृक्ष है। हालांकि यह वृक्ष किले के प्रतिबंधित क्षेत्र में है, जहां पहुंचने के लिए अधिकारियों से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।PC:Nikhil2789

जवाहर प्लेनेटेरियम

जवाहर प्लेनेटेरियम


आनंद भवन के बगल में स्थित इस प्लेनेटेरियम में खगोलीय और वैज्ञानिक जानकारी हासिल करने के लिए जाया जा सकता है। और यह प्लेनेटेरियम 3 डी है।

ऑल सेंट कैथिडरल

ऑल सेंट कैथिडरल

प्रसिद्ध ऑल सेंट कैथिडरल इलाहाबाद के दो प्रमुख सड़क के क्रासिंग पर स्थित है। 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने इस चर्च को उत्कृष्ट गौथिक शैली पर बनवाया था। इसकी डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश वास्तुकार विलियम इमरसन ने तैयार की थी, जिन्होंने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल की डिजाइन भी बनाई थी।

कैसे पहुंचे इलाहाबाद

कैसे पहुंचे इलाहाबाद

वायुमार्ग
वायु सेवा का विकास इलाहाबाद में पर्याप्त रूप से नहीं हो पाया हैं। फिर भी यहाँ के बम्हरौली हवाई अड्डे से दिल्ली एवं कलकत्ता के लिये उडाने हैं। निकटवर्ती बड़े विमानक्षेत्रों में वाराणसी विमानक्षेत्र 142 कि.मी. (88 मील)) एवं लखनऊ (अमौसी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र 210 कि.मी. (130 मील) हैं।

सड़क
इलाहाबाद सभी राजमार्गो से अच्छे से जुड़ा हुआ है..इलाहाबाद में राज्य परिवन निगम के तीन डिपो (बस-अड्डे) हैं:

लीडर रोड (बस अड्डा): यहाँ से कानपुर, आगरा व दिल्ली हेतु बसे उपलब्ध हैं।
सिविल लाईन्स (बस अड्डा): यहाँ से लखनऊ फैजाबाद ,जौनपुर,गोरखपुर आदि के लिये बसे उपलब्ध हैं।
जीरो रोड (बस अड्डा): यहाँ से रीवा सतना खजुराहो आदि के लिये बसे उपलब्ध हैं।PC:Abhijeet Vardhan

ट्रेन द्वारा

ट्रेन द्वारा

इलाहाबाद जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय है। ये अन्य प्रधान शहरों जैसे कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, लखनऊ, छपरा, पटना, भोपाल, ग्वालियर,जौनपुर, जबलपुर, बंगलुरु जयपुर एवं कानपुर से भली भांति जुड़ा हुआ है।PC: Jay.Here

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