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बेहद खूबसूरत है श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी....

Written By: Goldi

हिंदुयों के पवित्र चार धामों में से एक धाम द्वारका भी है। द्वारका भारत के सात प्राचीन शहरों में से एक है। यह शहर भगवान कृष्ण का घर था। ज्ञात हो कि शब्द द्वारका "द्वार" शब्द से निकला है जिसका संस्कृत में अर्थ होता है दरवाज़ा तथा इस शब्द का महत्व ब्रह्मा के लिए दरवाज़े से है।

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वैष्णवों के लिए इस शहर का बहुत अधिक महत्व है। जगतमंदिर मंदिर में द्वारकाधीश की मूर्ति है जो भगवान कृष्ण का एक रूप हैं।इसके अलावा द्वारका के पास शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भी स्थित है।

भवन श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के दौरान द्वारका को लाइट और फूलों से सजाया जाता है..मथुरा की तरह यहां भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाते हैं।

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इसी के साथ द्वारका के आसपास कई सारे पर्यटक स्थल मौजूद है, जिन्हें हर साल लाखो की तादाद में पर्यटक देखने पहुंचते हैं। द्वारकाधीश मंदिर, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, मीराबाई का मंदिर, श्री कृष्ण मंदिर, हनुमान मंदिर और बेट द्वारका में कचोरियु द्वारका के कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान हैं।

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अगर आप द्वारका की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं,तो इन जगहों की सैर करना बिल्कुल ना भूले। सौराष्ट्र प्रायद्वीप के पश्चिमी हिस्से में स्थित सुंदर स्थान में बहुत कुछ है; यह आपको आंतरिक शांति और भारत के ऐतिहासिक अतीत की एक झलक देगा

कैसे जायें

कैसे जायें

फ्लाइट द्वारा : द्वारका का निकटतम घरेलू हवाई अड्डा जामनगर में स्थित है जो लगभग 137 किमी. की दूरी पर स्थित है जहाँ से आप टैक्सी द्वारा द्वारका पहुँच सकते हैं। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जामनगर के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।

रेल द्वारा : द्वारका स्टेशन अहमदाबाद - ओखा ब्रॉड गेज रेलवे लाइन पर स्थित है जहाँ से राजकोट, अहमदाबाद और जामनगर के लिए रेल सेवा उपलब्ध है। इसके अलावा कुछ ट्रेन सूरत, वड़ोदरा, गोवा, कर्नाटक, मुंबई तथा केरल तक भी जाती हैं।

सड़क मार्ग द्वारा : द्वारका का निकटतम घरेलू हवाई अड्डा जामनगर में स्थित है जो लगभग 137 किमी. की दूरी पर स्थित है जहाँ से आप टैक्सी द्वारा द्वारका पहुँच सकते हैं। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जामनगर के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।PC:Asdelhi95

नागेश्वर ज्योतिर्लिंगा

नागेश्वर ज्योतिर्लिंगा

मंदिर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सौराष्ट्र तट पर द्वारका और बेट द्वारका आइलैंड के रास्ते पर स्थित है। मंदिर में विश्व के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग है तथा यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के साथ साथ एक तीर्थ स्थान भी है। यहाँ भूमिगत गर्भगृह है तथा मंदिर के परिसर में भगवान शिव की आदमकद मूर्ति है जिसके चारों ओर सुंदर हरा भरा उद्यान है। शिवरात्रि के समय यहाँ बहुत भीड़ होती है।

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बेट द्वारका

बेट द्वारका

बेट द्वारका वह स्थान है जिसकी प्रशंसा प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति करेगा। इस आइलैंड पर कुछ दुर्लभ और सुंदर मंदिर हैं तथा इसे बेट शंखोधर के नाम से भी जाना जाता है और यह एक समृद्ध बंदरगाह है। यहाँ आप डॉल्फिन देख सकते हैं, कैम्पिंग का आनंद उठा सकते हैं और समुद्री यात्रा भी कर सकते हैं। यहाँ के कुछ प्रमुख मंदिर हैं वल्लभाचार्य द्वारा बनाया हुआ 500 वर्ष पुराना मंदिर, हनुमान मंदिर जो उनके पुत्र मकरध्वज की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, कचोरियु - भगवान श्री राम का मंदिर, हाजी किरमानी पीर की दरगाह (एक जाने माने सूफी संत) और एक गुरुद्वारा।PC:Bhargavinf

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर

द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) भी कहा जाता है। किवदंती है कि जगत मंदिर - द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है और इसका निर्माण भगवान कृष्ण के पड़ पोते वज्रनाभ ने किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के बाद जब द्वारका जो भगवान कृष्ण का राज्य था, पानी में डूब गई थी तब इस मंदिर का निर्माण किया गया था। जगत मंदिर के आसपास की अन्य कलात्मक संरचाओं का निर्माण 16 वीं शताब्दी में हुआ।PC: Scalebelow

रुक्मिणी देवी मंदिर

रुक्मिणी देवी मंदिर

रुक्मिणी देवी मंदिर द्वारकाधीश मंदिर से 2 किमी. की दूरी पर स्थित है जिसके बाहरी ओर गजतारस (हाथी) और नाराथारस (मानव मूर्तियाँ) की नक्काशी की गई है। एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार यह मंदिर भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को समर्पित है।

स्वामी नारायण मंदिर

स्वामी नारायण मंदिर

स्वामी नारायण मंदिर द्वारकाधिष मंदिर के पास स्थित है। इसकी खूबसूरत वास्तुकला पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। दीवारों पर खूबसूरत नक्काशीयां हैं जो आर्किटेक्चर के आकर्षक आकर्षण को जोड़ती हैं। मंदिर में हिंदू देवताओं और देवी की मूर्तियां हैं और जिन्हें शांति की तलाश है वह इस मंदिर को भी घूम सकते हैं।

 गीता मंदिर

गीता मंदिर

गीता मंदिर द्वारका के पश्चिमी घाट की ओर भद्रकेश्वर महादेव मंदिर के नजदीक स्थित है । यह मंदिर मार्बल के पत्थर के द्वारा बनाया गया है, जो मंदिर की सुंदरता को जोड़ता है। हिंदू की धार्मिक पुस्तक, ‘भगवद् गीता' के समृद्ध शास्त्र, शिक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए इस मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर की दीवार पर मंदिर की दीवारों पर हिंदुओं की पवित्र किताब भगवद गीता मंदिर पर अंकित है। यह मंदिर 1 9 70 में प्रसिद्ध भारतीय व्यापार जगत बिर्ला परिवार द्वारा बनाया गया था।

गोपी तलाव

गोपी तलाव

गोपी तलाव से जुड़ी एक पुरानी लोक कथा हैं। बताया जाता है कि, इस जगह पर भगवान कृष्ण ने एक राक्षस कव्ध कर 16,000 राजकुमारों को राक्षस से मुक्त किया था। यह मंदिर शहर से 20 किमी की दूरी पर स्थित है...गोपी तलव एक खूबसूरत तालाब है जिसमें रेत है। इस तालाव के किनारे की रेत अत्यंत नरम है और पीले रंग की है जिसे गोपी चंदन कहा जाता है जिसका उपयोग भक्त तिलक लगाने के लिए करते हैं।

गोमती घाट

गोमती घाट

पवित्र शहर द्वारका अद्भुत धार्मिक निवासों के बारे में है और इसके साथ कई रहस्यमय किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। इनमें से कुछ की झलक पाने के लिए तथा साथ ही साथ इस पवित्र शहर का पूर्ण दृश्य देखने के लिए आप गोमती नदी से नाव द्वारा यहाँ पहुँच सकते हैं। इसके किनारे भगवान शिव, भगवान कृष्ण, भगवान राम और सुदामा को समर्पित एक मंदिर भी है। सुदामा भगवान कृष्ण के सच्चे मित्र थे। कई वर्षों से ये मंदिर पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है।

 द्वारका तट

द्वारका तट

अगर आप समुद्री तट का मजा लेना चाहते हैं..तो द्वारका बीच एक उचित विकल्प है...यह तट अर्ब सागर की तरह फैला हुआ है..यहां आप सूर्यास्त को भी निहार सकते हैं। अधिकतर तीर्थयात्री मुख्य मंदिर के दर्शन करने के बाद शाम को यहां घूमने आते हैं।PC:Prabhuti Sorathiya

लाइट हाउस

लाइट हाउस

द्वारका शहर में लाइटहाउस एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और वो गुजरात में विशाल ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है। इस लाइट हाउस का निर्माण सन 1866 में किया गया था..यह 43 मीटर लंबा लाइटहाउस सभी उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय है। यह मुख्य शहर से 35 किमी की दूरी पर स्थित है। अधिकतर पर्यटक यहां शाम के समय आते हैं..यह जगह उन लोगो के लिए एकदम परफेक्ट है जो असीम शांति का एहसास करना चाहते हैं। PC: Saawariyasairam

सुदामा देतु

सुदामा देतु

महाभारत के अनुसार, सुदामा भगवान कृष्ण के सबसे अच्छे दोस्त थे और इस पुल को उनके नाम पर रखा गया था। द्वारकधार मंदिर के निकट स्थित यह निलंबन पुल गोमती घाट के बारे में एक सुंदर दृश्य देता है। तीर्थयात्री इस पुल से सूर्यास्त के खूबसूरत नजारों का लुत्फ यहां से उठा सकते हैं..

क्या खरीदें

क्या खरीदें

पर्यटक पूरे साल द्वारका घूमने जा सकते हैं..यहां खरीदने के लिए भी काफी कुछ है जैसे पटोला रेशम साड़ी, बांदीनी लोक कला के कपड़े, कढ़ाई वाली हस्तकला वस्तुओं, सुशोभित जूते, घागरा चोली, और पोशाक सामग्री, कलात्मक रूप से सिक्वंस, रंगीन धागे और दर्पण आदि।

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