विन्ध्य पहाड़ियों की चोटी पर विन्ध्याचल देवी मन्दिर से 2 किमी की दूरी पर एक गुफा में स्थित कालीकोह मन्दिर उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण पर्यटक एवं तीर्थस्थल है। यह प्राचीन मन्दिर देवी काली को समर्पित है जिनकी मूर्ति इसमें स्थापित है। घने जंगलों की शाँत धाराओँ के बीच...
जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है अष्टभुजा मन्दिर देवी अष्टभुजा को समर्पित है जो कि भगवान कृष्ण को पालने वाली माता यशोदा की पुत्री थीं। लोककथाओं के अनुसार वे मथुरा के राक्षस राजा कंस के क्रूर हाथों से चमत्कारिक रूप से छूट कर विन्ध्याचल की पहाड़ियों पर आकर बसीं। यह...
जैसा कि नाम से प्रतीत होता है देवी विन्ध्यवासिनी उत्तरप्रदेश के मीरजापुर जिले के विन्ध्याचल स्थान की संरक्षक मानी जाती हैं। धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार वे देवी दुर्गा की अवतार हैं। उनके आसान को हिन्दू भक्तों द्वारा सबसे पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है।...
विन्ध्याचल के मुंगेर में विन्ध्य कुण्ड और मणि पर्वत के निकट छोटी सी पहाड़ी पर सीता कुण्ड भी स्थित है। इसकी उत्पत्ति रामायण काल की है जब राम, सीता और लक्षमण लंका से अपनी विजय के बाद लौट रहे थे। सीता को प्यास लगी किन्तु आसपास कोई पानी का स्रोत नहीं था। तब लक्षमण ने...
रामेश्वर महादेव मन्दिर विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी देवी मन्दिर से एक किमी तथा मीरजापुर से आठ किमी की दूरी पर राम गया घाट पर स्थित है। मन्दिर का नाम उस पूजा या श्राद्ध के नाम से प्राप्त होता है जिसे भगवान राम ने भगवान शिव के सम्मान में अपने पूर्वजों को प्रसन्न...
विन्ध्यवासिनी जयन्ती समारोह या पर्व को विन्ध्याचल की संरक्षक देवी विन्ध्यवासिनी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है और क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं को जीवन्त करने के लिये मनाया जाता है।
इसकी शुरूआत सन् 1971 में उत्तरप्रदेश सरकार...