विन्ध्याचल के मुंगेर में विन्ध्य कुण्ड और मणि पर्वत के निकट छोटी सी पहाड़ी पर सीता कुण्ड भी स्थित है। इसकी उत्पत्ति रामायण काल की है जब राम, सीता और लक्षमण लंका से अपनी विजय के बाद लौट रहे थे। सीता को प्यास लगी किन्तु आसपास कोई पानी का स्रोत नहीं था। तब लक्षमण ने धरती में एक तीर मारा और उसी स्थान से पानी की एक धारा फूट पड़ी।
सीता कुण्ड एक सदाबाहार सोता है। सीता का नाम जुड़ा होने के कारण यह स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिये एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान है।
मनमोहक पहाड़ियों की पृष्ठभूमि में स्थित कुण्ड को भक्तो द्वारा पवित्र माना जाता है जो यहाँ के पवित्र जल को लेने के लिये आते हैं। सोते तक पहुँचने के लिये 48 खड़ी सीढ़ियों के द्वारा जाना पड़ता है। पास की ही पहाड़ी पर हनुमान, राम-जानकी और दुर्गा देवी को समर्पित तीन अन्य मन्दिर हैं। चौरासी परिक्रमा, श्रावण और रामनवमी पर्वों पर भक्त भारी संख्या में इन मन्दिरों में आते हैं।



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