विन्ध्यवासिनी जयन्ती समारोह या पर्व को विन्ध्याचल की संरक्षक देवी विन्ध्यवासिनी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है और क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं को जीवन्त करने के लिये मनाया जाता है।
इसकी शुरूआत सन् 1971 में उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा की गई थी और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी लोग भी इसका भरपूर आनन्द उठाते हैं। यह पर्व राजा कान्तित नरेश की पुत्री कजली के जीवन की यद दिलाता है। ऐसा माना जाता है कि राजकुमारी को उनके पति से अलग कर दिया गया था जिन्हें वे बेहद प्यार करतीं थीं। उन्होंने अपना शेष जीवन उनकी याद में गीत गाते बिताया।
यह पर्व प्रदेश के लोकप्रिय गायकों और लोकगीत गायकों को आकर्षित करता है। देवी की याद में वे गाते हैं, नाचते हैं और अपनी प्रतिभा द्वारा दर्शकों की भरपूर वाह-वाही पाते हैं। ऐसा माना जाता है कि बेगम अख्तर और अन्य शास्त्रीय गायकों द्वारा लोकप्रिय की गई कजरी शैली का संगीत का उद्गम इसी क्षेत्र से हुआ है।



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