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उज्जैन नगरी में एक मंदिर जहां भगवान श्री कृष्ण ने शिक्षा प्राप्त किया

द्वापर युग में मंदिरों की नगरी उज्जैन विद्यासागर का एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था और यहीं से भगवान श्री कृष्ण ने भी ज्ञान प्राप्ति की। जानिए पूरी कहानी...
Sanyogita Agrahari
द्वापर युग में महाकाल की नगरी उज्जैन भी तक्षशिला तथा नालंदा के जैसे ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
भगवान श्री कृष्ण के साथ साथ उनके मित्र- सुदामा, भाई- बलराम ने उज्जैन में स्थित संदीपनी आश्रम से शिक्षा प्राप्त किया।
संदीपनी आश्रम में कई पुराण जैसे श्रीमद् भागवत, महाभारत और कई अन्य पुराणों में इस के बारे में बताया गया है।
कंश के वध के बाद देवकी और वसुदेव ने पुत्र कृष्ण को संदीपनी आश्रम में संस्कार और शिक्षा प्राप्ति के लिए भेज दिया।
इसी आश्रम में श्री कृष्ण की मुलाकात सुदामा से हुई थी इसी आश्रम में दोनों की मित्रता गहरी हुई और आज विश्व भर में भगवान श्री कृष्ण और सुदामा के घनिष्ट मित्रता का उदाहरण दिया जाता है।
इस आश्रम में एक कुंड है जोकि गोमती कुंड कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में श्री कृष्ण ने गुरू संदीपनी स्नान के लिए गोमती नदी का जल उपलब्ध करवाया था।
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