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किस-किस ने किया भोपाल पर शासन?

एक नज़र आज़ादी के पहले भोपाल पर राज करने वाले शासकों पर...
Ajay Mohan
स्थापना
भोपाल की स्थापना धाड़ से अपना राज-काज चलाने वाले परमारा के राजा भोज ने 11वीं शताब्‍दी में की थी।
राजा के एक मंत्री ने जब यहां एक बांध बनाया, तब इसका नाम भोजपाल पड़ा और जब यहां झील का निर्माण हुआ तब इसका नाम भोज-ताल पड़ा।
भोज-ताल
ये थी भोजपाल से भोजताल तक की कहानी, अब एक नज़र भोपाल बनने के बाद वहां के शासकों पर...
सत्रहवीं शताब्‍दी में भोपाल एक छोटा सा राज्‍य था, जहां पर गोंड साम्राज्‍य का शासन हुआ करता था।
17वीं शताब्‍दी
करीब सौ वर्षों तक यहां पर केवल बेग़मों का राज रहा। लेकिन इस दौरान भोपाल की कमान अंग्रेज़ों के हाथ में ही थी।
1819 से 1926 तक
1844 से 1860
मुगल शासक शाह जहां की मॉं सिकंदर बेगम ने यहां पर 1844 से 1860 तक शासन किया।
इस बीच शाह जहां की बेटी काईखुसरऊ जहां ने बेगम के रूप में शासन किया
1901 से 1926
कईखुसरऊ जहां बेग़म के बेटे हमीदुल्लाह खान से शासन किया। वे यहां के अंतिम नवाब थे।
1926 से 1947
आज़ादी के बाद
स्वतंत्रता के बाद भोपाल दूसरा सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला राज्‍य था। पहला हैदराबाद था।
नवाबों ने एग्रीमेंट पर हस्‍ताक्षर किए और भोपाल भारत गणराज्य का हिस्‍सा बन गया।
30 अप्रैल 1949 को
भारत सरकार ने भोपाल के शासन की कमान अपने हाथों में ले ली।
1 जून 1949 को
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