Tap to Read ➤

एक पत्रकार ने दिया कालका-शिमला रेल का आइडिया

एक नज़र कालका-शिमला रेल मार्ग व ट्रेन से जुड़ी अनसुनी बातों पर...
1864 में अंग्रेजों ने शिमला को ब्रिटिश इंडिया की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी बना दिया, यानि की समर कैपिटल।
जब शिमला बनी राजधानी
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
हर गर्मियों में अंग्रेजी सरकार के शीर्ष अधिकारी शिमला की वादियों में जाकर बस जाते थे।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
अब बिना कागज़ात सरकार कैसे चले? इसलिए सरकार के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ व कागज़ात कलकत्ता से शिमला स्‍थानांतरित किए जाते थे।
कलकत्ता से दिल्‍ली तक ट्रेन व ट्रक से और उसके आगे कागज़ात पहुंचाने की जिम्मेादी छोटे वाहनों, खच्‍चरों व घोड़ों की होती थी।
तब थे ये विकल्‍प
कई वर्षों तक ऐसा ही चलता रहा फिर अंग्रेजों ने दिल्‍ली गैजेट के पत्रकार के उस आइडिया पर काम करना शुरू किया जो उन्‍होंने 1847 में दिया था।
शुरू हुआ रेल पर काम
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
1855 से 1891
20 अप्रैल 1855 को शिमला-कालका रेल मार्ग का निर्माण शुरू हुआ और 1891 तक कालका तक रेल-रूट तैयार हो गया।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
9 नवम्‍बर 1903 को कालका से शिमला तक पहली ट्रेन चली जिसे तत्‍कालीन वॉयसरॉय लॉर्ड कर्जन ने हरी झंडी दी।
रेल की शुरुआत
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
आज यह ट्रेन युनेस्को की इंडिया वर्ल्‍ड हेरिटेज में शुमार है।
Created by potrace 1.15, written by Peter Selinger 2001-2017
तो आप जब भी इस ट्रेन में बैठें तो अपना अनुभव जरूर ईमेल करें वो भी np@oneindia.co.in पर।
आपका अनुभव
Kedarnath Story