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प्रयागराज के माघ मेला में कल्पवास परम्परा का क्यों है इतना महत्त्व ?

हर साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होने वाला माघ मेला दुनिया भर के साधु - संत, भक्त और विदेशी सैलानियों को आकर्षित करता है क्या है माघ मेले का महत्त्व? पुरी स्टोरी पढ़ें...
Sanyogita Agrahari
हर साल माघ मेला पौष मास की पूर्णिमा से के पहले स्नान से शुरू होता हैं और महाशिवरात्रि के बाद पड़ने वाले मौनी अमावस्या के स्नान पर खत्म होता हैं।
यह मेला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल 45 दिनों के लिए आयोजित होता है।
कहा जाता है ब्रह्मा जी के पृथ्वी का निर्माण पर माघ मेले का जश्न मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस मेला का बहुत महत्व है।
इस मेले में नागा साधु यानी कि ऐसे साधू संत जिनको आप वर्षों तक नहीं देखेंगे, उन्हे आप इस माघ मेले में पाएंगे।
इस मेले में कल्पवास परम्परा को बहुत महत्व दिया जाता है। मान्यता है, कि जो भी इस माघ मेले के समय गंगा, यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान कर लेता है उसके पिछले जन्मों के पाप भी धुल जाते है।
सैलानियों के लिए इस मेले में प्रशासन द्वारा हर तरह की सुख सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रयागराज स्टेशन पर लगभग 10,000 दर्शनार्थी रुक सकते हैं।
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