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काशी के इन प्रमुख शिव मंदिरों की अपनी एक अलग मान्यता

श्रावण के महीने में भगवान शिव के सभी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है। ऐसे में जानिए काशी के इन मंदिरों के बारे में... जिनकी अपनी एक अलग मान्यता है।
Kishan Gupta
काशी विश्वनाथ मंदिर
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर को स्वर्ण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। हजारों साल पुराने इस मंदिर को कई बार ध्वस्त किया गया और कई बार इसका जीर्णोद्धार भी किया जा चुका है।
मृत्युंजय महादेव
दारानगर स्थित मृत्युंजय महादेव मंदिर भी यहां के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि यहां के शिवलिंग पर चढ़े जल के सेवन मात्र से कई रोगों से मुक्ति मिलती है।
तिलभाण्डेश्वर महादेव
पाण्डेय हवेली स्थित तिलभाण्डेश्वर महादेव की अपनी एक अलग मान्यता है। यहां का शिवलिंग हर वर्ष एक तिल की भांति बढ़ता है। यह एक स्वयंभू शिवलिंग है।
जागेश्वर महादेव मंदिर
ईश्वरगंगी स्थित जागेश्वर महादेव का मंदिर हजारों साल पुराना है और हर साल शिवरात्रि के दिन एक जौ के बराबर बढ़ जाता है। मान्यता है कि यहां लगातार तीन महीने दर्शन करने पर सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है।
मारकण्डेय महादेव
शहर से करीब 30 किमी. दूर कैथी स्थित मारकण्डेय महादेव मंदिर भी काफी प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है। यहां काफी लोग अपने रोगों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं और उनकी मनोकामना भी पूरी होती है।
सारंगनाथ महादेव
सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव के मंदिर पूरे श्रावण के महीने में भक्तों का भारी भीड़ देखी जाती है। कहा जाता है कि इस मंदिर में महादेव के साले सारंग ऋषि और भोले का एक साथ दर्शन होता है।
गौरी-केदारेश्वर महादेव
हरिश्चंद्र घाट के बगल में स्थित गौरी-केदारेश्वर महादेव यहां खिचड़ी रूप में विद्यमान है। यहां पर दर्शन करने मात्र से ही केदारनाथ धाम के जितना फल मिलता है।
शूलटंकेश्वर महादेव
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